Property Fraud Case BRD मेडिकल कॉलेज के सर्जन से 71.22 लाख की ठगी: जमीन के नाम पर बड़ा Property Fraud Case, पैसे मांगने पर जान से मारने की धमकी
Property Fraud Case गोरखपुर में BRD मेडिकल कॉलेज के जनरल सर्जन से जमीन के नाम पर 71.22 लाख रुपये की ठगी, Property Fraud Case में पांच नामजद, गुलरिहा पुलिस ने दर्ज की FIR.
गोरखपुर से सामने आया यह मामला न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि भरोसे और सुरक्षा पर सीधा सवाल खड़ा करता है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के जनरल सर्जन डॉ. दुर्गेश त्रिपाठी उस समय ठगी का शिकार हो गए, जब उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई को जमीन में निवेश करने का फैसला लिया। जेमिनी पैराडाइज, मोगलहा निवासी डॉ. दुर्गेश के अनुसार, उनकी पहचान कुशीनगर जिले के अहिरौली थाना क्षेत्र के सुक्खड़ गांव निवासी मनोज यादव से हुई। मनोज ने खुद को तेलंगाना के करीमनगर स्थित आर्शिया हॉस्पिटल का संचालक बताते हुए भरोसा जीता और इसी भरोसे का फायदा उठाकर यह Property Fraud Case अंजाम दिया।
आरोप है, कि मनोज यादव ने पिपराइच क्षेत्र के गढ़वा में 27 डिसमिल जमीन को अपनी बताते हुए 60 लाख रुपये में सौदा तय कराया। वर्ष 2024 में उसने 30 लाख रुपये एडवांस के रूप में ले लिए और बाद में एग्रीमेंट कराया। बाद में पता चला कि यह जमीन किसी और की थी। इसके बावजूद आरोपी यहीं नहीं रुके। उन्होंने एक और बड़ा लालच दिया और चिलुआताल क्षेत्र के फत्तेपुर में सात डिसमिल जमीन को अपनी दादी के ससुराल की नेहा यादव और लालसा यादव की बताते हुए 1.80 करोड़ रुपये में सौदा तय कराया। यही दूसरा सौदा इस Property Fraud Case को और गंभीर बना देता है।
डॉ. दुर्गेश त्रिपाठी के मुताबिक, इस दूसरे सौदे में उन्होंने 24 लाख रुपये नकद दिए। इसके अलावा नेहा यादव, लालसा यादव, शिरीष मिश्रा और वेंडर बताए गए कमलेश यादव के खातों में कुल 41 लाख 22 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए। इस तरह कुल रकम 71.22 लाख रुपये तक पहुंच गई। तय हुआ था कि दशहरा और दिवाली के बीच बैनामा हो जाएगा, लेकिन त्योहार बीत गए। न तो बैनामा हुआ और न ही जमीन के कागजात मिले। यह पूरा घटनाक्रम एक सुनियोजित Property Fraud Case की ओर इशारा करता है, जिसमें रिश्तेदारों और परिचितों के खातों का इस्तेमाल किया गया।
जब पीड़ित डॉक्टर ने अपने पैसे वापस मांगे, तो मामला और डरावना हो गया। आरोप है,कि आरोपियों ने रुपये लौटाने के बजाय उन्हें जान से मारने की धमकी देनी शुरू कर दी। एक सरकारी मेडिकल कॉलेज के सर्जन के लिए यह स्थिति बेहद मानसिक दबाव और असुरक्षा पैदा करने वाली थी। यह Property Fraud Case इस बात का उदाहरण है, कि जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े अब केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहे, बल्कि पीड़ितों की जान तक पर बन आते हैं।
पीड़ित की तहरीर पर गुलरिहा थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांचों नामजद आरोपियों मनोज यादव, नेहा यादव, लालसा यादव, शिरीष मिश्रा और कमलेश यादव के खिलाफ फर्जी दस्तावेज तैयार करने, दूसरे की जमीन बेचने, धोखाधड़ी और धमकी देने की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। प्रभारी निरीक्षक विजय प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया है, कि मामले की गहन जांच की जा रही है। बैंक ट्रांजैक्शन, जमीन के असली मालिक और आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है, ताकि इस Property Fraud Case की पूरी परतें खोली जा सकें।
यह मामला आम लोगों के लिए भी एक बड़ी सीख है। जमीन या प्रॉपर्टी में निवेश करने से पहले दस्तावेजों की पूरी जांच, राजस्व रिकॉर्ड की पुष्टि और कानूनी सलाह लेना बेहद जरूरी है। खासकर जब सौदा बड़े अमाउंट का हो, तो जल्दबाजी भारी पड़ सकती है। इस Property Fraud Case ने एक बार फिर साबित किया है, कि सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
Disclaimer:
यह लेख पुलिस में दर्ज एफआईआर और पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। सभी आरोपी कानूनन तब तक निर्दोष माने जाएंगे, जब तक न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध न हो जाए। लेख का उद्देश्य केवल सूचना देना और जनहित में जागरूकता फैलाना है।
इसे भी पढ़ें Gorakhpur Fake Tata Products गोरखपुर में नकली टाटा नमक और चायपत्ती का भंडाफोड़, 900 पैकेट जब्त, दो पर FIR