Purvanchal State Demand यूपी बंटेगा? 28 जिलों को मिलाकर पूर्वांचल राज्य की मांग से BJP के भीतर सियासी हलचल तेज
Purvanchal State Demand उत्तर प्रदेश को बांटने की मांग फिर तेज हो गई है। अमेठी में BJP नेताओं ने 28 जिलों को मिलाकर पूर्वांचल राज्य बनाने की खुली वकालत की। जानिए पूरी खबर, सियासी असर और CM योगी का रुख।
उत्तर प्रदेश को बांटने की मांग एक बार फिर सियासत के केंद्र में आ गई है। लंबे समय से कभी पश्चिमी यूपी तो कभी बुंदेलखंड को लेकर राज्य विभाजन की बातें होती रही हैं, लेकिन इस बार चर्चा में है पूर्वांचल राज्य। खास बात यह है, कि इस मांग को हवा देने वाले कोई और नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं, जिससे राजनीतिक समीकरण और जटिल होते दिख रहे हैं।
बुधवार, 21 जनवरी 2026 को अमेठी जिले के ददन सदन में आयोजित खिचड़ी भोज एवं स्नेह मिलन कार्यक्रम के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय सिंह और पूर्व प्राविधिक शिक्षा मंत्री डॉ. अमीता सिंह ने मंच से खुलकर पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की वकालत की। हजारों की संख्या में मौजूद लोगों के बीच दिया गया यह बयान संकेत देता है कि Purvanchal State Demand अब सिर्फ मंचों तक सीमित नहीं रहने वाली।
डॉ. संजय सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है, जहां एक ही प्रशासनिक ढांचे के तहत सुशासन स्थापित करना अब व्यावहारिक नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों से ज्यादा आबादी वाले राज्य में लोकतंत्र और विकास, दोनों प्रभावित होते हैं। यही वजह है, कि Purvanchal State Demand को अब भावनात्मक नहीं, बल्कि प्रशासनिक जरूरत के तौर पर देखा जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित पूर्वांचल राज्य में उत्तर प्रदेश के 8 मंडलों के 28 जिले शामिल किए जाएंगे। इनमें वाराणसी, चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, प्रयागराज, कौशाम्बी, प्रतापगढ़, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही, अयोध्या, अकबरपुर, सुल्तानपुर, अमेठी, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, गोरखपुर, महाराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर और संत कबीर नगर शामिल हैं।
करीब 7 करोड़ 98 लाख की आबादी के साथ यह राज्य देश का 14वां सबसे बड़ा राज्य होगा। डॉ. सिंह का दावा है,कि यदि राजनीतिक सहमति बनी तो यह राज्य 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अस्तित्व में आ सकता है। इस दावे ने Purvanchal State Demand को और चर्चा में ला दिया है।
डॉ. संजय सिंह ने यह भी घोषणा की कि ‘पूर्वांचल राज्य संयुक्त संकल्प मंच’ के जरिए इस मांग को संगठित आंदोलन का रूप दिया जाएगा। उन्होंने पूर्वांचल राज्य के समर्थन में काम कर रहे सभी सामाजिक और राजनीतिक संगठनों से एकजुट होने की अपील की, ताकि यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया जा सके।
वहीं, पूर्व मंत्री डॉ. अमीता सिंह ने कहा कि पूर्वांचल की अपनी अलग भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान है, इसके बावजूद यह क्षेत्र दशकों से प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार रहा है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों, उपजाऊ भूमि और कुशल मानव संसाधन के बावजूद यह इलाका विकास की दौड़ में पीछे छूट गया। यही वजह है,कि Purvanchal State Demand आज आम जनता की आवाज़ बनती जा रही है।
डॉ. अमीता सिंह ने कृषि, उद्योग और शिक्षा पर विशेष नीति की जरूरत बताते हुए कहा कि रोजगार के अवसर न होने के कारण पूर्वांचल से बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है। नेपाल से आने वाली नदियों के कारण हर साल बाढ़ और सूखे की समस्या झेलनी पड़ती है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल सका। उनके अनुसार, अलग राज्य बनने पर ही इन समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव है।
उन्होंने यह भी कहा कि पूर्वांचल देश का बड़ा विद्युत उत्पादन क्षेत्र है। मिर्जापुर और सोनभद्र जैसे जिले खनिज संपदा से भरपूर हैं। अयोध्या, काशी और प्रयागराज जैसे धार्मिक केंद्रों के साथ-साथ सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती और कपिलवस्तु जैसे बौद्ध पर्यटन स्थल पूर्वांचल को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित कर सकते हैं। ये सभी तर्क Purvanchal State Demand को आर्थिक रूप से भी मजबूत बनाते हैं।
भावुक अपील करते हुए डॉ. अमीता सिंह ने कहा,
“मुंबई, सूरत, लुधियाना, सिंगापुर, दुबई और सिलिकॉन वैली तक पूर्वांचल के लोग अपनी मेहनत का लोहा मनवा रहे हैं। हमें पूर्वांचल राज्य दे दीजिए, हम भारत को जापान बनाने की ताकत रखते हैं।”
हालांकि, यह मांग बीजेपी के लिए सियासी चुनौती भी बन सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही उत्तर प्रदेश के बंटवारे का विरोध कर चुके हैं। उनका साफ कहना रहा है, कि उत्तर प्रदेश अपनी एकता में ही मजबूत है, और राज्य को विभाजित करने से उसकी पहचान और शक्ति कमजोर होगी।
अब देखना यह होगा कि Purvanchal State Demand केवल एक क्षेत्रीय आवाज़ बनकर रह जाती है, या आने वाले समय में यह उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरती है।
यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार स्रोतों और दिए गए तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें व्यक्त विचार संबंधित नेताओं के बयान हैं। लेख का उद्देश्य सूचना प्रदान करना है, न कि किसी राजनीतिक दल या विचारधारा का समर्थन या विरोध करना।