Rajghat Bridge Repair राजघाट पुल में दरारें बनीं शहर की चिंता, 60 साल पुराने पुल की 20 साल बाद होगी बड़ी मरम्मत
Rajghat Bridge Repair गोरखपुर के राजघाट पुल में दरारें आने से सुरक्षा पर सवाल। 1965 में बने पुल की 20 साल बाद मरम्मत होगी। फरवरी में Rajghat Bridge Repair के तहत बेयरिंग बदली जाएंगी, यातायात रहेगा प्रभावित।
शहर की सड़कों पर रोज़ चलने वाला आम आदमी शायद यह नहीं सोचता कि जिस पुल से वह रोज़ गुजरता है, उसकी हालत कैसी है। लेकिन जब पुल से गुजरते वक्त झटका महसूस हो और मन में डर बैठे, तब सवाल उठना लाज़मी है। गोरखपुर का राजघाट पुल आज इसी चिंता का कारण बन गया है। राप्ती नदी पर बना यह पुल शहर की यातायात व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। अब इसमें आई दरारों और खराब बेयरिंग ने प्रशासन और जनता दोनों को सतर्क कर दिया है। Rajghat Bridge Repair अब सिर्फ एक तकनीकी काम नहीं बल्कि शहर की सुरक्षा से जुड़ा अहम मुद्दा बन गया है।
राजघाट पुल का निर्माण वर्ष 1965 में कराया गया था। यानी यह पुल करीब 60 साल पुराना है। लंबे समय से भारी यातायात का दबाव झेल रहे इस पुल का हालिया निरीक्षण लोक निर्माण विभाग ने कराया। जांच के दौरान कई स्थानों पर कंक्रीट टूट चुकी पाई गई और सरिया बाहर दिखाई देने लगा। जॉइंट रिप्लेसमेंट पर लगी कई बेयरिंग भी खराब हालत में मिलीं। विशेषज्ञों के अनुसार यह संकेत पुल की संरचनात्मक कमजोरी की ओर इशारा करते हैं। इसी वजह से Rajghat Bridge Repair को टालना अब संभव नहीं था।
पुल की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए पीडब्ल्यूडी ने मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के विशेषज्ञों से विस्तृत स्ट्रक्चरल जांच कराई। विश्वविद्यालय की टीम ने पुल की तकनीकी स्थिति का आकलन कर रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं की गई तो भविष्य में बड़ा जोखिम खड़ा हो सकता है। यह एक एवरग्रीन सच्चाई है, कि पुराने पुलों की समय समय पर जांच और मरम्मत न हो तो हादसों की आशंका बढ़ जाती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर Rajghat Bridge Repair की विस्तृत योजना तैयार की गई है।
फिलहाल पुल में आई दरारों को विशेष केमिकल से भरा जा रहा है, इस काम के लिए लखनऊ से अनुभवी कारीगर बुलाए गए हैं। कमजोर हो चुकी कंक्रीट को हटाकर नई तकनीक से मजबूती दी जा रही है। विभागीय अधिकारियों का कहना है, कि यह अस्थायी नहीं बल्कि दीर्घकालिक समाधान है। इसके बाद पुल की बेयरिंग बदलने का कार्य शुरू होगा, जो तकनीकी रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यही कारण है,कि Rajghat Bridge Repair के इस चरण में विशेष सावधानी बरती जाएगी।
अधिशासी अभियंता अरविंद कुमार ने साफ बताया कि बेयरिंग बदलने के दौरान पुल पर यातायात पूरी तरह से रोकना अनिवार्य होगा। फरवरी महीने में इस काम को शुरू करने की योजना है। खिचड़ी मेले और घने कोहरे को ध्यान में रखते हुए मरम्मत की टाइमिंग तय की गई है, इस दौरान दो पुराने पुलों में से एक से ही वाहनों की आवाजाही कराई जाएगी। प्रशासन का दावा है,कि विस्तृत ट्रैफिक प्लान तैयार किया जा रहा है,ताकि आम लोगों को कम से कम परेशानी हो। Rajghat Bridge Repair के दौरान स्कूल, अस्पताल और आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देने की बात भी कही गई है।
मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद पुल की लोड टेस्टिंग कराई जाएगी। एमएमएमयूटी के विशेषज्ञों की निगरानी में यह परीक्षण होगा जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि पुल पूरी तरह सुरक्षित है। अधिकारियों के अनुसार, सभी खराब बेयरिंग बदली जाएंगी और जॉइंट रिप्लेसमेंट का काम भी पूरा किया जाएगा। इसके बाद ही पुल को पूरी तरह यातायात के लिए खोला जाएगा। यह प्रक्रिया यह दिखाती है,कि Rajghat Bridge Repair केवल दिखावटी मरम्मत नहीं, बल्कि सुरक्षा केंद्रित योजना है।
पीडब्ल्यूडी का अनुमान है, कि अप्रैल मई तक राजघाट पुल की मरम्मत पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद पुल की उम्र और मजबूती दोनों में इजाफा होगा। दशकों से गोरखपुर की यातायात व्यवस्था को संभाल रहा यह पुल आने वाले वर्षों तक सुरक्षित रह सकेगा। यह मामला यह भी याद दिलाता है, कि इंफ्रास्ट्रक्चर की समय पर देखभाल न हो तो वह बोझ बन सकता है, लेकिन सही समय पर की गई मरम्मत उसे फिर से मजबूत आधार दे सकती है। Rajghat Bridge Repair उसी दिशा में उठाया गया जरूरी कदम है।
Disclaimer: यह लेख लोक निर्माण विभाग और संबंधित अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित है, मरम्मत कार्य की समय सारिणी और यातायात व्यवस्था में प्रशासनिक कारणों से बदलाव संभव है। पाठकों से अनुरोध है,कि यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी ताज़ा सूचनाओं की पुष्टि अवश्य करें।
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