Shankaracharya controversy शंकराचार्य विवाद: प्रयागराज से हरिद्वार तक संतों का उबाल, प्रशासन बनाम सनातन परंपरा

Written by: akhtar husain

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Shankaracharya controversy शंकराचार्य की जंग में उतरा संत समाज: प्रयागराज से दिल्ली तक गूंजा विरोध, देवकीनंदन ठाकुर, अनिरुद्धाचार्य और रामदेव के बयान

Shankaracharya controversy मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को गंगा स्नान से रोके जाने के बाद विवाद गहराया, संत समाज सड़क पर उतरा, अनिरुद्धाचार्य, देवकीनंदन ठाकुर और अन्य संतों की तीखी प्रतिक्रियाएं।

Shankaracharya controversy शंकराचार्य विवाद: प्रयागराज से हरिद्वार तक संतों का उबाल, प्रशासन बनाम सनातन परंपरा
Shankaracharya controversy शंकराचार्य विवाद: प्रयागराज से हरिद्वार तक संतों का उबाल, प्रशासन बनाम सनातन परंपरा

प्रयागराज माघ मेले की मौनी अमावस्या अब केवल आस्था का पर्व नहीं रही, बल्कि यह Shankaracharya controversy के रूप में देशव्यापी धार्मिक और प्रशासनिक टकराव की प्रतीक बन चुकी है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पालकी में बैठकर गंगा स्नान से रोके जाने की घटना ने ऐसा तूफान खड़ा किया, जिसने संत समाज को सड़कों पर उतरने पर मजबूर कर दिया।

मौनी अमावस्या के दिन मेला प्रशासन द्वारा शंकराचार्य को स्नान से रोके जाने के बाद समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। हालात बिगड़ते देख शंकराचार्य ने धरना दिया। यहीं से Shankaracharya controversy ने प्रशासन बनाम संत समाज का रूप ले लिया।

घटना के बाद प्रयागराज मेला प्राधिकरण की ओर से शंकराचार्य को दो नोटिस जारी किए गए। नोटिस जारी होते ही संत समाज में आक्रोश फैल गया। संतों का कहना है कि यह केवल एक संत का अपमान नहीं, बल्कि शंकराचार्य पीठ और सनातन परंपरा पर सीधा प्रहार है। इस कदम ने Shankaracharya controversy को और गहरा कर दिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान ने विवाद को नया मोड़ दे दिया। उन्होंने कहा कि एक योगी और सन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र ही सर्वोच्च होते हैं और कुछ ‘कालनेमि प्रवृत्ति’ के लोग सनातन को कमजोर करने का प्रयास कर सकते हैं। इस बयान के बाद समर्थकों और विरोधियों के बीच बहस तेज हो गई और Shankaracharya controversy राष्ट्रीय बहस बन गई।

घटना के बाद संत समाज दो खेमों में बंटता दिखा। एक ओर शंकराचार्य के समर्थन में संत खुलकर सामने आए, वहीं दूसरी ओर कुछ संतों ने संयम और संवाद की बात कही। कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने प्रशासन पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि चोटी पकड़कर अपमान करना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि पूरे ब्राह्मण समाज का अपमान है। उनका बयान Shankaracharya controversy में सबसे तीखा माना जा रहा है।

वहीं कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने संतुलित लेकिन स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि भगवा धारण करने वाले संत के साथ मारपीट किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है, लेकिन विवाद को सुलझाने का रास्ता संवाद और समझ से निकलेगा। उनका यह बयान Shankaracharya controversy में सुलह की आवाज़ के रूप में देखा गया।

Shankaracharya controversy शंकराचार्य विवाद: प्रयागराज से हरिद्वार तक संतों का उबाल, प्रशासन बनाम सनातन परंपरा
Shankaracharya controversy शंकराचार्य विवाद: प्रयागराज से हरिद्वार तक संतों का उबाल, प्रशासन बनाम सनातन परंपरा

वृंदावन में ब्रजभूमि के संत समाज ने शंकराचार्य को सम्मानपूर्वक दोबारा गंगा स्नान कराने की मांग की। फलाहारी बाबा ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी जानबूझकर सरकार को बदनाम करना चाहते हैं। महामंडलेश्वर रामदास महाराज ने कहा कि शंकराचार्य की पीठ भगवान शिव की गद्दी है और उसका अपमान पाप के समान है। इन बयानों ने Shankaracharya controversy को धार्मिक भावनाओं से जोड़ दिया।

हरिद्वार की हर की पौड़ी पर भारत साधु समाज और अखंड परशुराम अखाड़े ने धरना दिया। अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने सार्वजनिक माफी नहीं मांगी तो वे अपनी शिखा कटवाने जैसा कठोर कदम भी उठा सकते हैं। इससे साफ है कि Shankaracharya controversy अब शांत होने के बजाय और उग्र होती जा रही है।

अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले को केवल नोटिस और बयानों तक सीमित रखेगा या दोषियों पर ठोस कार्रवाई होगी। संत समाज का मानना है कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि सनातन परंपरा, सम्मान और धार्मिक मर्यादा की रक्षा का है। आने वाले दिन तय करेंगे कि Shankaracharya controversy इतिहास में किस मोड़ पर जाकर थमती है।

यह लेख सार्वजनिक बयानों, घटनाओं और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी धर्म, व्यक्ति या संस्था की भावनाओं को आहत करना नहीं है। सभी विचार संबंधित पक्षों के वक्तव्यों पर आधारित हैं।

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akhtar husain

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