Sonu Sood fraud,970 करोड़ की अंतरराष्ट्रीय ठगी का पर्दाफाश सोनू सूद को तीसरा नोटिस Sake लाइसेंस से कई कंपनियां चलाकर रवींद्रनाथ सोनी ने रचा महाघोटाला
Sonu Sood fraud case 970 करोड़ रुपये की अंतरराष्ट्रीय ठगी में सोनू सूद को तीसरा नोटिस जारी। महाठग रवींद्रनाथ सोनी ने एक लाइसेंस पर कई फर्जी कंपनियां बनाकर निवेशकों को ठगा। 10 देशों के 1500 से ज्यादा पीड़ित, एसआईटी जांच जारी।
Sonu Sood fraud case कभी कभी खबरें सिर्फ आंकड़े नहीं होतीं, वे लोगों की टूटी उम्मीदों और लुटी मेहनत की कहानी होती हैं। कानपुर से सामने आया 970 करोड़ रुपये की ठगी का मामला भी ऐसा ही है, जिसने देश ही नहीं बल्कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों को झकझोर दिया है। इस बड़े घोटाले में अब अभिनेता सोनू सूद को तीसरा नोटिस भेजा गया है, जिससे Sonu Sood fraud case एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। पुलिस और एसआईटी की जांच में साफ हुआ है, कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड महाठग रवींद्रनाथ सोनी था, जिसने निवेश के नाम पर एक अंतरराष्ट्रीय जाल खड़ा कर दिया।
न्यूज़ दिल से भारत संवाददाता के अनुसार, दिल्ली के मालवीय नगर निवासी रवींद्रनाथ सोनी ने ब्लूचिप कामर्शियल ब्रोकर कंपनी के नाम पर 10 देशों के एक हजार से ज्यादा लोगों से 970 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की। अब तक उसके खिलाफ 10 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।
एसआईटी जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ कि रवींद्र के पास ब्लूचिप नाम से केवल चार पांच कंपनियों के लाइसेंस थे, लेकिन उसने हर एक लाइसेंस पर नाम बदलकर चार से पांच नई कंपनियां खड़ी कर दीं। इसी फर्जीवाड़े के जरिए निवेशकों को मोटे रिटर्न का झांसा दिया गया। यही मॉडल Sonu Sood fraud case को गंभीर बनाता है, क्योंकि इसमें संगठित आर्थिक अपराध और जीएसटी से जुड़ी गड़बड़ियां भी सामने आई हैं।
Sonu Sood fraud case इस मामले में अभिनेता सूरज जुमानी और रेसलर खली की भूमिका भी जांच के दायरे में है, तीनों को तीसरा नोटिस भेजा जा चुका है। एसआईटी देहरादून स्थित रवींद्र के घर से बरामद लैपटॉप, मोबाइल, हार्ड डिस्क और दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है। अधिकारियों का फोकस इस बात पर है कि प्रचार, ब्रांडिंग और निवेश आकर्षित करने में किन किन लोगों की क्या भूमिका रही। पुलिस प्रशासन साफ कर चुका है, कि Sonu Sood fraud case में हर कदम सबूतों के आधार पर उठाया जाएगा।
पीड़ितों की कहानियां इस घोटाले की भयावहता को और गहरा करती हैं। लखनऊ निवासी एक महिला ने पुलिस आयुक्त से मिलकर बताया कि ब्लूचिप कंपनी में निवेश के नाम पर उनसे करीब 16 लाख रुपये ठग लिए गए। बुलंदशहर के साबित अली ने बताया कि उनके दुबई में काम करने वाले बेटे से 23.83 लाख रुपये हड़प लिए गए। वाराणसी के अनुपम ने 11 लाख रुपये निवेश किए एक महीने का लाभ मिला और फिर कंपनी बंद हो गई। ऐसे ही कानपुर, गोरखपुर, गुजरात, हिमाचल और हरियाणा के पीड़ितों ने करोड़ों की ठगी के मुकदमे दर्ज कराए हैं। बढ़ती शिकायतों को देखते हुए अधिकारियों का अनुमान है, कि पीड़ितों की संख्या 1500 से भी ज्यादा हो सकती है, जिससे Sonu Sood fraud case और बड़ा रूप लेता जा रहा है।
कोतवाली में दर्ज मामलों के अनुसार, परेड निवासी अब्दुल करीम ने 42.29 लाख रुपये की ठगी का पहला मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद कारोबारी अबरार सिद्दीकी से 4.80 करोड़, प्रदीप कुमार सिंह से 35 लाख, विशाल सिंह से 84.90 लाख, वासुदेव शर्मा से 1.54 करोड़, दीपक से 26.50 लाख, राजीव शास्त्री से 31.85 लाख धीरेंद्र प्रताप सिंह से 44.97 लाख, संगीता सावन कामदार से करीब 42 लाख और अमोल रजनी मिठानी से लगभग 50 लाख रुपये ठगे जाने के मुकदमे दर्ज हुए। इन सभी मामलों ने Sonu Sood fraud case को देश के सबसे बड़े निवेश घोटालों में शामिल कर दिया है।
डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता के अनुसार, रवींद्रनाथ सोनी ने जीएसटी और कंपनी रजिस्ट्रेशन की खामियों का फायदा उठाकर फर्जी कंपनियों का नेटवर्क बनाया। पुलिस प्रशासन अब संपत्तियों की कुर्की अंतरराष्ट्रीय लेन देन और सहयोगियों की भूमिका की भी जांच कर रहा है। यह मामला निवेशकों के लिए एक कड़ा सबक है,कि ज्यादा रिटर्न के वादों में फंसने से पहले पूरी जांच जरूरी है। आने वाले समय में Sonu Sood fraud case न सिर्फ कानूनी बल्कि सामाजिक स्तर पर भी लंबे समय तक चर्चा में रहने वाला है।
Disclaimer यह समाचार लेख पुलिस जांच, आधिकारिक बयानों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। मामला विचाराधीन है। अदालत के अंतिम निर्णय तक किसी भी व्यक्ति को दोषी या निर्दोष मानना उचित नहीं है।