UP SIR बड़ा अपडेट: 2.89 करोड़ वोटर्स के नाम कटेंगे, 1.11 करोड़ को मिलेगा नोटिस, फरवरी 2026 में आएगी फाइनल वोटर लिस्ट
UP SIR बड़ा अपडेट: 2.89 करोड़ वोटर्स के नाम कटेंगे, 1.11 करोड़ को नोटिस, 31 दिसंबर को ड्राफ्ट और फरवरी 2026 में फाइनल वोटर लिस्ट जारी होगी।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर अब तक का सबसे बड़ा अपडेट सामने आया है। चुनाव आयोग द्वारा कराए गए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत प्रदेश की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव होने जा रहे हैं। SIR प्रक्रिया के अंतर्गत करीब 2 करोड़ 89 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे, जबकि 1 करोड़ 11 लाख वोटर्स को नोटिस जारी किया जाएगा। इन मतदाताओं को अपने दस्तावेज प्रस्तुत कर मतदाता सूची में नाम बनाए रखने का अवसर दिया जाएगा।
क्या है SIR प्रक्रिया
SIR यानी Special Intensive Revision चुनाव आयोग की वह विशेष प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाया जाता है। इसका उद्देश्य मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और लंबे समय से अनुपस्थित मतदाताओं के नाम हटाकर केवल वास्तविक और पात्र वोटर्स को सूची में बनाए रखना है।
SIR फॉर्म भरने की अंतिम तिथि
उत्तर प्रदेश में SIR फॉर्म भरने की अंतिम समय सीमा शुक्रवार रात 12 बजे तक तय की गई थी। इसके बाद प्रक्रिया के अगले चरण में ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा।
31 दिसंबर को जारी होगी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, 31 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसमें उन मतदाताओं के नाम शामिल होंगे, जिनका सत्यापन पूरा हो चुका है,या जिन्होंने समय पर SIR फॉर्म जमा किया है।
2.89 करोड़ वोटर्स के नाम क्यों कटेंगे
SIR प्रक्रिया के तहत जिन 2.89 करोड़ वोटर्स के नाम हटाए जाएंगे, वे विभिन्न श्रेणियों में आते हैं,
1.26 करोड़ वोटर्स: जो स्थानांतरित हो चुके हैं
46 लाख वोटर्स: जिनकी मृत्यु हो चुकी है
23.70 लाख वोटर्स: डुप्लीकेट मतदाता
83.73 लाख वोटर्स: लंबे समय से अनुपस्थित
9.57 लाख वोटर्स: अन्य श्रेणी के मतदाता
इन सभी का फील्ड लेवल पर सत्यापन किया गया है।
1.11 करोड़ वोटर्स को क्यों मिलेगा नोटिस
करीब 1.11 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी किया जाएगा। इन वोटर्स को यह साबित करना होगा कि वे संबंधित पते पर रहते हैं,और मतदाता बनने के योग्य हैं। नोटिस मिलने के बाद इन्हें चुनाव आयोग द्वारा मान्य 13 दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज जमा करना होगा।
13 मान्य दस्तावेजों की अनिवार्यता
मतदाता सूची में नाम बनाए रखने या जोड़ने के लिए चुनाव आयोग ने 13 वैध दस्तावेज तय किए हैं। इनमें पहचान और निवास से जुड़े प्रमाण शामिल हैं। दस्तावेज सत्यापित होने के बाद ही नाम अंतिम सूची में जोड़ा जाएगा।
घर घर जाकर किया गया सत्यापन
चुनाव आयोग ने SIR अभियान के तहत गली गली और घर घर जाकर वोटर्स की खोज कराई।
इस अभियान में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO), राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट को शामिल किया गया। बूथवार सूची तैयार कर हर श्रेणी के मतदाताओं का दोबारा सत्यापन कराया गया, ताकि किसी भी प्रकार की गलती की संभावना न रहे।
BLO और राजनीतिक दलों की अहम भूमिका
BLO के साथ साथ राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी सत्यापन प्रक्रिया में शामिल किया गया। इससे पारदर्शिता बनी रही और मतदाता सूची को अधिक भरोसेमंद बनाया जा सका।
2003 की मतदाता सूची से 91% मैपिंग पूरी
चुनाव आयोग ने साल 2003 की मतदाता सूची से वर्तमान सूची की मैपिंग का कार्य भी पूरा कर लिया है।
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करीब 91 प्रतिशत मतदाताओं का मिलान
स्वयं उनके नाम
माता-पिता
दादा-दादी
नाना-नानी
के नामों के आधार पर किया गया है। इससे फर्जी और गलत प्रविष्टियों की पहचान आसान हुई है।
दावे और आपत्तियों की समय सीमा
31 दिसंबर 2025 से 30 जनवरी 2026: दावे और आपत्तियां ली जाएंगी
31 दिसंबर 2025 से 21 फरवरी 2026: नोटिस चरण में दावों व आपत्तियों का निस्तारण
28 फरवरी 2026: अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित
फरवरी 2026 में जारी होगी फाइनल वोटर लिस्ट
सभी दावों, आपत्तियों और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद 28 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। यही सूची आगामी चुनावों में मान्य होगी।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश में SIR प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। जहां एक ओर लाखों अपात्र और निष्क्रिय वोटर्स के नाम हटाए जाएंगे, वहीं पात्र मतदाताओं को दस्तावेज देकर अपना नाम सुरक्षित रखने का पूरा अवसर दिया जा रहा है। यह प्रक्रिया आने वाले चुनावों की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को और मजबूत करेगी।
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