Varanasi Murder Case: संतान की चाह दबाव और साजिश आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अनुपमा की नृशंस हत्या का पूरा सच

Written by: akhtar husain

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Varanasi Murder Case संतान की चाह ने ली जान पड़ोसी युवक और उसकी पत्नी ने रची खौफनाक साजिश

Varanasi Murder Case में बड़ा खुलासा। वाराणसी के शिवपुर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अनुपमा उर्फ सीता की हत्या पड़ोसी मोहित यादव और उसकी पत्नी अंजलि चौहान ने की। जानिए पूरा घटनाक्रम, कबूलनामा, बरामदगी और पुलिस कार्रवाई।

कभी कभी कोई खबर सिर्फ खबर नहीं रहती, वह दिल पर बोझ बन जाती है। वाराणसी के शिवपुर इलाके से सामने आया यह मामला भी कुछ ऐसा ही है, जिसने रिश्तों, भरोसे और इंसानियत तीनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 11 दिसंबर की सुबह आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अनुपमा उर्फ सीता (45) की जिस बेरहमी से हत्या हुई, उसने पूरे क्षेत्र को सन्न कर दिया। यह Varanasi Murder Case अब सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के भीतर छिपे डर, दबाव और गलत फैसलों की भयावह तस्वीर बन चुका है।

Varanasi Murder Case: संतान की चाह दबाव और साजिश आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अनुपमा की नृशंस हत्या का पूरा सच
Varanasi Murder Case: संतान की चाह दबाव और साजिश आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अनुपमा की नृशंस हत्या का पूरा सच

घटना शिवपुर थाना क्षेत्र के लक्ष्मणपुर गांव की है। अनुपमा की शादी करीब 15 साल पहले शैलेश कुमार पटेल से हुई थी, लेकिन उन्हें संतान नहीं थी। पति शैलेश रोज की तरह सुबह करीब पांच बजे दूध बेचने घर से निकल गए थे। अनुपमा घर में खाना बना रही थीं। करीब दस बजे जब शैलेश लौटे तो कमरे में उनकी पत्नी खून से लथपथ जमीन पर पड़ी थीं। सिर, चेहरे और गर्दन पर धारदार हथियार और सिलबट्टे से किए गए गहरे वार साफ दिख रहे थे। मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था। पति की चीख सुनकर आसपास के लोग जमा हो गए। रिश्तेदार शुभम को बुलाया गया, जिसने 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी।

सूचना मिलते ही एडीसीपी नीतू कात्यान, एसीपी नितिन तनेजा, थाना प्रभारी वीरेंद्र कुमार सोनकर, फॉरेंसिक टीम और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। शुरू में मामला अज्ञात बदमाशों द्वारा हत्या का लग रहा था। शैलेश की तहरीर पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। यह Varanasi Murder Case जितना सीधा दिख रहा था उतना था नहीं।

जांच के दौरान पुलिस का शक पड़ोस में किराए पर रहने वाले मोहित यादव (21) पर गया, जो अपनी पत्नी अंजलि चौहान (21) के साथ शारदा विहार कॉलोनी में रहता था। मोहित का अनुपमा के घर आना जाना था। दूध खरीदने के दौरान दोनों की पहचान हुई थी। पूछताछ में जो सच सामने आया, उसने पुलिस को भी हैरान कर दिया। मोहित के अनुसार, अनुपमा उस पर संतान उत्पन्न करने के लिए संबंध बनाने का दबाव डाल रही थीं। इनकार करने पर पुलिस में फंसाने की धमकी दी जा रही थी। मोहित ने यह बात अपनी पत्नी अंजलि को बताई और दोनों ने मिलकर अनुपमा को रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली।

Varanasi Murder Case 11 दिसंबर की सुबह दोनों घर से निकले। अनुपमा के घर के पास पहुंचकर अंजलि बाहर रुक गई, जबकि मोहित पीछे के रास्ते से घर में घुसा। घर में मौजूद सिलबट्टे और स्टील के ड्रम से उसने अनुपमा के सिर, चेहरे और गर्दन पर ताबड़तोड़ वार कर हत्या कर दी। इसके बाद अनुपमा के पहने हुए जेवरात और अलमारी में रखे गहने व नकदी समेट ली। खून से सने कपड़े छिपाने के लिए उसने पत्नी की शॉल ओढ़ ली और दोनों ऑटो से भोजूबीर होते हुए मिश्रा पांडेयपुर स्थित काली माता मंदिर के पास एक होम स्टे में जाकर छिप गए।

Varanasi Murder Case पुलिस ने जब तेजी से जांच आगे बढ़ाई, तो शुक्रवार को शिवपुर रेलवे स्टेशन के पास से मोहित यादव और अंजलि चौहान को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में दोनों ने अपराध कबूल कर लिया। उनके पास से एक जोड़ी झुमके, चेन, अंगूठी, नाक की कील बिछिया, करधनी, पायल और 73,640 रुपये नकद बरामद किए गए। साथ ही घटना के समय पहने गए खून लगे कपड़े भी झाड़ियों से बरामद कराए गए। इस तरह Varanasi Murder Case का पूरा सच सामने आ गया।

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गिरफ्तारी करने वाली टीम में थाना प्रभारी वीरेंद्र कुमार सोनकर, उप निरीक्षक कृष्ण कुमार सरोज, गौरव सिंह, विद्यासागर चौरसिया, भूपेंद्र कुमार, महिला उप निरीक्षक प्रतिभाशाही हेड कांस्टेबल लवकुश कुमार, कांस्टेबल नीतीश कुमार तिवारी और बालमुकुंद मौर्य शामिल रहे। पुलिस आयुक्त ने सराहनीय कार्य के लिए टीम को 50 हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की।

यह Varanasi Murder Case सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं है, बल्कि यह चेतावनी भी है, कि दबाव डर और गलत सोच किस तरह इंसान को अपराध के रास्ते पर धकेल देती है। कानून अपना काम कर रहा है, लेकिन यह सवाल समाज के सामने छोड़ जाता है, कि ऐसे हालात बनने से पहले हम क्या कर सकते हैं।

Disclaimer यह लेख पुलिस जांच, आरोपियों के कबूलनामे और आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। सभी आरोपी कानूनन निर्दोष माने जाएंगे जब तक अदालत द्वारा दोष सिद्ध न हो।

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akhtar husain

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