Zohran Mamdani की चिट्ठी पर Umar khalid के पिता का जवाब, BJP को पहले अपने रवैये पर नजर डालनी चाहिए
न्यूयॉर्क के मेयर Zohran Mamdani की Umar khalid के समर्थन में लिखी चिट्ठी पर सियासी घमासान तेज। उमर खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल इलियास ने BJP की प्रतिक्रिया पर क्या कहा, पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
दिल्ली दंगों के मामले में जेल में बंद जेएनयू के पूर्व छात्र Umar Khalid को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। इस बार चर्चा की वजह न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी की वह चिट्ठी है, जो उन्होंने उमर खालिद के समर्थन में लिखी है। इस पत्र के सामने आने के बाद भारतीय राजनीति में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। बीजेपी ने इसे भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया, जबकि उमर खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल इलियास ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
सैयद कासिम रसूल इलियास ने साफ कहा कि इस चिट्ठी में कहीं भी भारतीय न्यायपालिका पर टिप्पणी नहीं की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बीजेपी नेता दूसरे देशों के मामलों पर खुलकर बयान देते हैं, तब उसे किस श्रेणी में रखा जाएगा। उनके मुताबिक, अगर विदेशों में हो रहे घटनाक्रम पर बोलना हस्तक्षेप नहीं है, तो फिर एक मानवीय पत्र को लेकर इतना हंगामा क्यों किया जा रहा है।
इलियास ने कहा कि भारत में पिछले कुछ सालों से ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां लोग वर्षों से जेल में हैं और उन्हें न तो जमानत मिल पा रही है और न ही समय पर ट्रायल। उन्होंने कहा कि बीजेपी को इस बात पर चिंता जतानी चाहिए कि किसी व्यक्ति को पांच साल तक बिना ट्रायल के जेल में रखना क्या न्यायसंगत है। उनके अनुसार, असल मुद्दा यह होना चाहिए कि कानून और न्याय की प्रक्रिया समयबद्ध और निष्पक्ष हो।
जोहरान ममदानी द्वारा लिखी गई यह चिट्ठी हाथ से लिखी गई है और उस पर उनके हस्ताक्षर भी हैं। इस पत्र को उमर खालिद की सहयोगी बनोज्योत्सना लाहिड़ी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया था। पोस्ट के साथ लिखा गया कि जेलें भले ही लोगों को अलग-थलग करने की कोशिश करें, लेकिन शब्द अपनी ताकत के साथ बाहर तक पहुंच जाते हैं। इस एक पंक्ति ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी।
अपने पत्र में ममदानी ने उमर खालिद के विचारों और उनके आत्मबल का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा कि वह अक्सर उन शब्दों को याद करते हैं, जिनमें कड़वाहट को खुद पर हावी न होने देने की बात कही गई थी। ममदानी ने यह भी लिखा कि उमर के माता-पिता से मिलकर उन्हें खुशी हुई और वे सभी उनके बारे में ही सोच रहे हैं। पत्र का लहजा पूरी तरह भावनात्मक और मानवीय है, न कि राजनीतिक या कानूनी टिप्पणी से भरा हुआ।
इस बीच, अमेरिका के कुछ सांसदों के एक समूह ने भी भारत में तैनात अमेरिकी राजदूत विनय क्वात्रा को पत्र लिखकर उमर खालिद के लिए जमानत और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत निष्पक्ष व समयबद्ध सुनवाई की मांग की है। इस कदम को भी बीजेपी ने विदेशी हस्तक्षेप के रूप में देखा है।
गौरतलब है कि उमर खालिद पर 2020 के दिल्ली दंगों में मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप है। इस मामले में उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA और भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था। दिल्ली दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या किसी व्यक्ति के मानवाधिकार और न्याय की बात उठाना विदेशी हस्तक्षेप माना जाना चाहिए या इसे एक सामान्य लोकतांत्रिक चिंता के रूप में देखा जाना चाहिए। उमर खालिद के पिता का कहना है कि बहस का केंद्र राजनीति नहीं, बल्कि न्याय होना चाहिए, ताकि किसी भी नागरिक को वर्षों तक बिना सुनवाई के जेल में न रहना पड़े।