contractual employees सुप्रीम कोर्ट का संविदा कर्मचारियों को न्यायोचित लाभ देने वाला निर्णय

Written by: akhtar husain

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contractual employees सुप्रीम कोर्ट का संविदा कर्मचारियों को न्यायोचित लाभ देने वाला निर्णय

  भारत सरकार में काम करने वाले संविदा कर्मचारी contractual employees के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्णायक फैसला सुनाया है। इस निर्णय में यह स्पष्ट बताया गया कि Rule 17 के तहत संविदा अवधि को भी पेंशन‑पर्याप्त सेवा (pensionable service) में शामिल किया जाएगा जब वो व्यक्ति बाद में नियमित (regularised) होता है।

contractual employeesफैसला क्यों अहम है?

यह निर्णय ऐसे लाखों कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। अब केवल नियमित नियुक्ति से पहले की अवधि ही नहीं, संविदा समय भी पेंशन, भत्ता, और Gratuity के लिए मान्य होंगा।

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  contractual employees न्यायालय द्वारा निर्धारित मुख्य बिंदु

1. संविदा सेवा को पेंशन में शामिल करना

सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि यदि कोई कर्मचारी संविदा पर नियुक्त हुआ और बाद में उसे नियमित किया गया, तो उसकी संपूर्ण संविदा अवधि को Rule 17 के अनुसार पेंशन योग्यता में शामिल करना आवश्यक है

2. विकल्प (Option) — CPF बनाम Pension

नियम 17 यह विकल्प देता है:

लेकिन वह कर्मचारी चाहता है, तो वह CPF (Contributory Provident Fund का सरकारी योगदान को बनाए रख सकता है,

या वह उस योगदान को वापस देकर पूरी संविदा अवधि को पेंशन योग्य बना सकता है। इस विकल्प को लागू करने के लिए कर्मचारी को नेतृत्व कार्यालय को तीन माह के भीतर सूचित करना होता है ।

3. प्रशासनिक निर्देश

न्यायालय ने Union of India को निर्देश दिया कि प्रभावित कर्मचारियों को विकल्प प्रदान करने की प्रक्रिया, रिफंड की राशि, आवेदन प्रक्रिया और समय सीमा की स्पष्ट जानकारी दें, जैसा कि Sheela Devi मामले में पहले से निर्देशित था ।

  contractual employees कानूनी पृष्ठभूमि और परिस्थिति

S.D. Jayaprakash मामला

contractual employees  यह मामला S.D. Jayaprakash & Ors. vs Union of India नामक अभियान था, जिसमें संविदा कर्मचारियों को नियमित करने के बाद उनकी सेवाओं को पेंशन के लिए गणना योग्य मानने की मांग की गई थी। इस मामले पर 29 अप्रैल 2025 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय दिया।

Sheela Devi मामले का पूर्वप्रभाव

contractual employees    सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले में अपने 2023 के Sheela Devi प्रकरण को भी उद्धृत किया, जिसमें पहले ये स्थापित किया गया था कि Rule 17, Rule 2(g) को प्रभावहीन कर देता है जब संविदा कर्मचारी को नियमित किया जाता है। इससे यह स्पष्ट हुआ कि संविदा अवधि को पेंशन में शामिल करना न्यायसंगत है ।

कर्मचारियों, प्रशासन और समाज पर प्रभाव

कर्मचारियों के लिए लाभ

पहले जिन संविदा कर्मचारियों को केवल सीमित अधिकार मिलते थे, अब उन्हें पेंशन, भत्ता, और Gratuity सहित व्यापक लाभ मिलेंगे।

इससे उनकी आर्थिक सुरक्षा और जीवनभर की स्थिरता सुनिश्चित होती है।

 प्रशासन को उठानी है जिम्मेदारी

सभी विभागों को संविदा कर्मचारियों की सेवा अवधि का डेटा अपडेट करना होगा।

विकल्प प्रक्रिया लागू करनी होगी और सभी प्रभावित कर्मचारियों को समयबद्ध सूचना देनी होगी।

भविष्य में पेंशन भुगतान की तैयारियों में बजट सुधार की आवश्यकता होगी।

सामाजिक न्याय का सन्देश

यह निर्णय संविदा कर्मचारियों के न्यायसंगत अधिकारों और समानता की रक्षा का प्रतीक है। यह सरकार, न्यायपालिका और कर्मचारियों के साझा कर्तव्य को दर्शाता

1. केंद्र एवं राज्य सरकार सभी विभागों को एक आधिकारिक सर्कुलर जारी करें जिसमें इस निर्णय को लागू करने की कार्यप्रणाली बताई जाए।

2. Online Pension Option Portal बनाया जाए ताकि कर्मचारी आसानी से विकल्प चुन सकें, आवेदन भरें और स्थिति ट्रैक कर सकें।

3कर्मचारी संगठनों, गैर-सरकारी संस्थाओं और सोशल मीडिया चैनलों की मदद से इस फैसले की पूरी जानकारी संविदा कर्मचारियों तक पहुँचाई जानी चाहिए, ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर समय पर लाभ उठा सकें।

4. मानव संसाधन विभाग संविदात्मक सेवा विवरण और विकल्प प्रक्रिया को समयांतराल पर अपडेट करें।

contractual employees सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला संविदा कर्मचारियों के अधिकारों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इस निर्णय से न केवल Contractual Employees को Pension Benefits का हक मिलेगा, बल्कि उन्हें स्थायी नौकरी जैसी सुरक्षा और सम्मान भी प्राप्त होगा। यह आदेश भारत में संवैधानिक समानता और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

 

akhtar husain

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