Afzal Ansari Membership अंसारी परिवार को दूसरी बार कोर्ट से बड़ी राहत: अफ़ज़ल अंसारी की बहाल हुई सदस्यता

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Afzal Ansari Membership अंसारी परिवार को दूसरी बार कोर्ट से बड़ी राहत: अफ़ज़ल अंसारी की बहाल हुई सदस्यता

Afzal Ansari Membership बहाली पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला। अंसारी परिवार को मिली राहत, जानें गैंगस्टर एक्ट केस, ग़ाज़ीपुर राजनीति और चुनाव पर असर।

अंसारी परिवार और राजनीति में उनकी पकड़

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अंसारी परिवार का नाम हमेशा सुर्खियों में रहा है। कभी आपराधिक मामलों के चलते तो कभी चुनावी मैदान में जीत के कारण। इस परिवार की पकड़ ग़ाज़ीपुर और उसके आस-पास के इलाकों में बेहद मज़बूत मानी जाती है। ऐसे में जब कोर्ट से लगातार उन्हें राहत मिल रही है, तो यह न सिर्फ़ उनके राजनीतिक करियर के लिए अहम है,बल्कि पूरे पूर्वांचल की सियासत को भी प्रभावित करता है।

 ग़ाज़ीपुर गैंगस्टर एक्ट मामला सज़ा और विवाद

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अप्रैल 2023 में ग़ाज़ीपुर की MP/MLA कोर्ट ने अफ़ज़ल अंसारी को गैंगस्टर एक्ट मामले में दोषी ठहराते हुए 4 साल की सज़ा सुनाई थी। इस फैसले के बाद राजनीति में भूचाल आ गया। विपक्ष ने इस मामले को मुद्दा बनाया और समर्थकों ने इसे राजनीतिक साज़िश बताया। लगभग 90 दिन जेल में बिताने के बाद भी अफ़ज़ल अंसारी ने हिम्मत नहीं हारी।

Afzal Ansari Membership संसद सदस्यता रद्द क्यों हुई

Afzal Ansari Membership भारत के संविधान के अनुसार, अगर किसी सांसद या विधायक को दो साल या उससे अधिक की सज़ा हो जाती है, तो उनकी सदस्यता अपने आप रद्द हो जाती है। इसी नियम के तहत अफ़ज़ल अंसारी की लोकसभा सदस्यता निरस्त कर दी गई। यह फैसला उनके लिए बड़ा झटका था क्योंकि इससे न सिर्फ़ उनकी सियासत पर असर पड़ा, बल्कि उनके समर्थकों का मनोबल भी गिरा।

 सुप्रीम कोर्ट से राहत: दिसंबर 2023 का अहम मोड़

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हालांकि दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में एक बड़ा मोड़ लाया। कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाते हुए उन्हें फिर से सांस लेने का मौका दिया। इस फैसले के बाद उनकी लोकसभा सदस्यता बहाल हो गई और वे दोबारा संसद में अपनी सीट पर लौट सके। यह अंसारी परिवार के लिए पहली बड़ी राहत थी।

Afzal Ansari Membership इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला (जुलाई 2024)

Afzal Ansari Membership सुप्रीम कोर्ट से मिली अस्थायी राहत के बाद जुलाई 2024 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ग़ाज़ीपुर कोर्ट का आदेश खारिज कर दिया। कोर्ट ने सज़ा को रद्द कर दिया, जिससे अफ़ज़ल अंसारी पूरी तरह से बरी हो गए। यह उनके लिए दूसरी बड़ी राहत थी, जिसने उनकी राजनीतिक साख को और मज़बूत कर दिया।

 लोकसभा चुनाव 2024: अफ़ज़ल अंसारी की जीत

सज़ा रद्द होने के बाद जब 2024 के लोकसभा चुनाव हुए तो ग़ाज़ीपुर सीट से अफ़ज़ल अंसारी ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की। इस जीत ने साफ़ कर दिया कि जनता अभी भी उनके साथ है। यह नतीजा विरोधियों के लिए करारा जवाब था और समर्थकों के लिए जीत का जश्न।

दूसरी राहत: अब्बास अंसारी केस में हाई कोर्ट का फ़ैसला

Afzal Ansari Membership सिर्फ़ अफ़ज़ल ही नहीं, बल्कि उनके भतीजे अब्बास अंसारी को भी हाल ही में बड़ी राहत मिली। 2022 के हेट स्पीच मामले में मिली सज़ा को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया। इससे उनकी Semester सदस्यता बरकरार रही। यही वजह है, कि कहा जा रहा है,अंसारी परिवार को कोर्ट से दूसरी बार बड़ी राहत मिली है।

 सियासी असर: ग़ाज़ीपुर और यूपी की राजनीति पर प्रभाव

इन फैसलों का असर ग़ाज़ीपुर ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर पड़ा है। भाजपा और अन्य विरोधी दल इसे कानून और राजनीति का मिश्रण मान रहे हैं, जबकि सपा और बसपा समर्थक इसे न्याय की जीत बता रहे हैं। इस केस ने पूर्वांचल की सियासत को एक बार फिर से गरमा दिया है।

Afzal Ansari Membershipभविष्य की राह: अंसारी परिवार की चुनौतियाँ और संभावनाएँ

हालांकि कोर्ट से मिली राहत ने अंसारी परिवार को मजबूती दी है, लेकिन चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। विपक्ष लगातार उनके पुराने मामलों को उठाता रहता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अंसारी परिवार अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रख पाता है या विरोधी उन्हें किनारे कर देते हैं।

 निष्कर्ष  राजनीति, कानून और जनमत का संगम

अंसारी परिवार की कहानी बताती है, कि भारतीय राजनीति में कानून और सियासत का गहरा रिश्ता है। अफ़ज़ल अंसारी की सदस्यता रद्द होना और फिर बहाल होना इस बात का सबूत है, कि न्यायपालिका के फैसले राजनीति की दिशा बदल सकते हैं। दूसरी ओर, जनता का समर्थन यह दिखाता है, कि आखिरकार जनमत ही किसी नेता की असली ताक़त होता है।

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