Azam Khan Case: 8 साल पुराने विवादित बयान पर लगी बड़ी मुहर, एमपी एमएलए कोर्ट ने आजम खान को किया बरी; सपा में खुशी की लहर
Azam Khan Case में आजम खान को एमपी एमएलए कोर्ट रामपुर ने 8 साल पुराने विवादित बयान मामले में बरी किया। बेटे अब्दुल्ला आजम समेत दो पैन कार्ड मामले में दोनों जेल में बंद। जानें पूरा मामला, कोर्ट reasoning, राजनीतिक असर।
Azam Khan Case में आज समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता आजम खान को बड़ी राहत मिली है। रामपुर की एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट ने 8 साल पुराने उस मामले में उन्हें दोषमुक्त कर दिया, जिसमें वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान सेना के जवानों पर विवादित टिप्पणी का आरोप लगाया गया था। भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने इस बयान को आधार बनाकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। लंबे समय से चल रही सुनवाई के बाद कोर्ट ने आज साफ कहा कि मामले में ऐसे ठोस सबूत नहीं मिले, जिनके आधार पर आजम खान को दोषी ठहराया जा सके। इसी वजह से Azam Khan Case में अदालत की ओर से बरी करने का यह फैसला आया।
कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। जिला प्रशासन ने पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी थी ताकि फैसले के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो। सुनवाई के दौरान सभी पक्षों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। जैसे ही फैसला सामने आया, समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ पड़ी और उन्होंने इसे न्याय की जीत बताया। फैसले के बाद कोर्ट के बाहर मौजूद कई सपा नेताओं ने कहा कि Azam Khan Case में यह फैसला उनकी छवि को बड़ा सहारा देगा और यह साबित करता है,कि राजनीतिक द्वेष के चलते उन पर कई बार झूठे आरोप लगाए गए।
हालांकि इस राहत के बावजूद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम वर्तमान में रामपुर जेल में बंद हैं। दोनों को दो पैन कार्ड मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद सजा सुनाई गई थी। यह केस प्रशासन और पुलिस की संयुक्त पड़ताल में सामने आया था। इस वक्त दोनों अदालत द्वारा दी गई सजा काट रहे हैं। समर्थकों का कहना है, कि अगर Azam Khan Case में मिली यह राहत आगे भी किसी दूसरे केस में प्रभाव डालती है, तो आने वाले समय में आजम खान और उनके बेटे की कानूनी राह कुछ आसान हो सकती है।
आजम खान का राजनीतिक सफर हमेशा विवादों और आरोपों से घिरा रहा है। लेकिन उनकी लोकप्रियता और सपा समर्थकों में उनकी पकड़ कभी कमजोर नहीं पड़ी। कई राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है, कि Azam Khan Case में मिली छूट आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा असर डाल सकती है। यह फैसला उनके राजनीतिक पुनरुत्थान की एक नई शुरुआत भी हो सकता है, खासकर तब जब विपक्ष उन्हें लगातार निशाने पर लेता रहा है।
इस मामले से जुड़े लोगों, गवाहों और पुलिस प्रशासन ने अपने अपने पक्ष कोर्ट में रखे लेकिन अदालत ने स्पष्ट पाया कि Azam Khan Case में लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पुख्ता सबूत पेश नहीं किए गए। यही वजह रही कि अदालत ने 8 साल बाद आजम खान को बरी करते हुए उन्हें बड़ी राहत दी। समर्थक इसे न्याय की जीत बता रहे हैं, और पार्टी के भीतर भी इस फैसले का सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यह फैसला सपा के लिए भी ऊर्जा का काम करेगा और आजम खान की पार्टी के अंदर भूमिका फिर मजबूत हो सकती है।
पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि Azam Khan Case न सिर्फ कानूनी लड़ाई थी बल्कि राजनीतिक नजरिये से भी बेहद महत्वपूर्ण था। अब जबकि कोर्ट ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया है, आगे आने वाले राजनीतिक और कानूनी कदमों पर भी सबकी नजरें बनी रहेंगी।
Disclaimer: इस लेख का उद्देश्य केवल समाचार और जानकारी देना है। किसी भी व्यक्ति, संस्था या समूह की छवि को नुकसान पहुंचाना इसका लक्ष्य नहीं है। सभी तथ्य उपलब्ध अदालती दस्तावेज़ों, मीडिया रिपोर्ट्स और जारी सूचनाओं पर आधारित हैं।