Mukhyamantri Abhyudaya Yojana Recruitment Scam अभ्युदय योजना में बड़ा खेल! 69 कोर्स कोऑर्डिनेटरों की जांच में सिर्फ 21 निकले पात्र, फर्जी दस्तावेजों से भर्ती पर FIR
Mukhyamantri Abhyudaya Yojana Recruitment Scam मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना में कोर्स कोऑर्डिनेटर भर्ती में भारी अनियमितता, जांच में 69 में से केवल 21 पात्र, मंत्री असीम अरुण के आदेश पर FIR
उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना, जो आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का मजबूत मंच देने के लिए शुरू की गई थी, अब खुद सवालों के कटघरे में खड़ी है। योजना के तहत कोर्स कोऑर्डिनेटरों की भर्ती में सामने आई भारी अनियमितताओं ने सरकारी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में जो सच सामने आया, उसने पूरे तंत्र को झकझोर दिया। यही मामला अब Mukhyamantri Abhyudaya Yojana Recruitment Scam के रूप में चर्चा में है।
पात्रता नियमों की खुली अनदेखी
जांच में स्पष्ट हुआ कि कोर्स कोऑर्डिनेटर पद के लिए यूपी पीसीएस मुख्य परीक्षा पास होना अनिवार्य शर्त थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों को नियुक्त कर दिया गया, जिन्होंने यह परीक्षा कभी पास ही नहीं की।
69 अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच में केवल 21 उम्मीदवार ही पूरी तरह पात्र पाए गए, जबकि शेष नियुक्तियां नियमों के खिलाफ की गई थीं। यह तथ्य Mukhyamantri Abhyudaya Yojana Recruitment Scam को बेहद गंभीर बनाता है।
फर्जी दस्तावेजों से मिली नौकरी
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अपात्र अभ्यर्थियों को नौकरी दिलाने के लिए फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों का सहारा लिया गया। कई प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए, जिनकी मदद से आउटसोर्सिंग प्रक्रिया के जरिए चयन कराया गया।
प्रथम दृष्टया इस पूरे मामले में संबंधित आउटसोर्सिंग कंपनी की भूमिका संदिग्ध मानी गई है, जिससे Mukhyamantri Abhyudaya Yojana Recruitment Scam का दायरा और फैलता नजर आ रहा है।
मंत्री असीम अरुण का सख्त रुख
समाज कल्याण विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने जैसे ही जांच रिपोर्ट देखी, उन्होंने तुरंत सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उनके आदेश पर लखनऊ के गोमती नगर थाने में आउटसोर्सिंग कंपनी और संबंधित अभ्यर्थियों के खिलाफ षड्यंत्र, फर्जी दस्तावेज और नियम विरुद्ध नियुक्ति के आरोपों में एफआईआर दर्ज कर ली गई।
असीम अरुण ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि Mukhyamantri Abhyudaya Yojana Recruitment Scam में दोषी किसी भी स्तर पर हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
शिकायत से शुरू हुई जांच, खुलते गए परतें
मंत्री ने बताया कि 29 अक्टूबर 2025 को मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत संचालित कोचिंग केंद्रों में आउटसोर्सिंग पर लगे कोर्स कोऑर्डिनेटरों की भर्ती को लेकर शिकायत मिली थी। इसके बाद विभागीय स्तर पर सभी दस्तावेजों और चयन प्रक्रिया की गहन जांच कराई गई, जिसमें एक के बाद एक चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
अब जांच का दायरा केवल अभ्यर्थियों और आउटसोर्सिंग कंपनी तक सीमित नहीं रहेगा। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी डॉक्युमेंट वैरिफिकेशन की थी, उनकी भूमिका की भी प्रशासनिक जांच होगी।
मंत्री ने निर्देश दिए हैं, कि भविष्य में सभी आउटसोर्सिंग नियुक्तियों में पुलिस वैरिफिकेशन और दस्तावेज सत्यापन अनिवार्य किया जाए। वर्तमान में कार्यरत सभी कर्मचारियों का भी पुनः सत्यापन कराया जाएगा।
योजना की साख पर सवाल
जिस योजना का उद्देश्य गरीब और होनहार छात्रों को IAS, PCS जैसी परीक्षाओं की तैयारी में मदद देना था, उसी योजना में भर्ती घोटाले का उजागर होना बेहद चिंता का विषय है।
Mukhyamantri Abhyudaya Yojana Recruitment Scam ने यह साफ कर दिया है,कि अगर चयन प्रक्रिया ही संदिग्ध होगी, तो योजनाओं का लाभ सही जरूरतमंदों तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा।
डिस्क्लेमर यह समाचार विभागीय जांच रिपोर्ट, आधिकारिक बयानों और पुलिस कार्रवाई पर आधारित है। लेख का उद्देश्य जनहित में तथ्यात्मक जानकारी प्रस्तुत करना है। किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना न्यायालय के अंतिम निर्णय पर निर्भर करता है।
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