UGC Regulation 2026 पर देश में घमासान: कुमार विश्वास का विरोध, नेहा सिंह राठौर का तीखा पलटवार

Written by: Tanu K

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UGC Regulation 2026 पर देश आमने सामने: कुमार विश्वास का विरोध, नेहा सिंह राठौर का तीखा सवाल अब संविधान क्यों याद आ रहा है?

UGC Regulation 2026 को लेकर विवाद तेज, कुमार विश्वास ने जताया विरोध तो नेहा सिंह राठौर ने लोकतंत्र, समानता और दोहरे मापदंडों पर उठाए सवाल

UGC Regulation 2026 पर देश में घमासान: कुमार विश्वास का विरोध, नेहा सिंह राठौर का तीखा पलटवार
UGC Regulation 2026 पर देश में घमासान: कुमार विश्वास का विरोध, नेहा सिंह राठौर का तीखा पलटवार

विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और भेदभाव खत्म करने के उद्देश्य से लाए गए UGC Regulation 2026 ने देश में एक नई वैचारिक बहस छेड़ दी है। यह बहस अब सिर्फ शिक्षा नीति तक सीमित नहीं रही, बल्कि जाति, वर्ग, लोकतंत्र, संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मूल सवालों से टकरा रही है। इसी मुद्दे पर मशहूर कवि कुमार विश्वास और लोक गायिका नेहा सिंह राठौर आमने सामने नजर आ रहे हैं।

कुमार विश्वास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए UGC Regulation 2026 का खुलकर विरोध किया। उन्होंने #UGC_RollBack हैशटैग के साथ नियमों को वापस लेने की मांग की और दिवंगत कवि रमेश रंजन की कविता के जरिए अपनी नाराज़गी जताई। कविता की पंक्तियों— “मैं अभागा सवर्ण हूं…” ने देखते ही देखते सोशल मीडिया पर बहस को आग दे दी।

कुमार विश्वास के समर्थकों का कहना है कि यह पोस्ट अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संभावित सरकारी दखल के खिलाफ आवाज़ है। वहीं आलोचकों का तर्क है कि जब तक नीतियां और कानून वंचित और हाशिए के समाज के लिए बनते रहे, तब यही वर्ग ‘मेरिट’ और ‘बराबरी’ की दुहाई देता रहा, लेकिन अब कानून खुद पर लागू होता दिख रहा है तो विरोध शुरू हो गया।

UGC Regulation 2026 पर देश में घमासान: कुमार विश्वास का विरोध, नेहा सिंह राठौर का तीखा पलटवार
UGC Regulation 2026 पर देश में घमासान: कुमार विश्वास का विरोध, नेहा सिंह राठौर का तीखा पलटवार

इसी पृष्ठभूमि में लोक गायिका नेहा सिंह राठौर का बयान सामने आया, जिसने UGC Regulation 2026 की बहस को और धारदार बना दिया। उन्होंने सिलसिलेवार पोस्ट में विरोध करने वालों से तीखे सवाल पूछे। नेहा सिंह राठौर ने लिखा कि जब संविधान ने सबको बराबर बताया है, तो फिर यह बराबरी ज़मीन पर क्यों नहीं दिखती?

उन्होंने पूछा कि समानता की बातें तब कहां चली जाती हैं जब किसी कमजोर पर अत्याचार होता है, किसी अल्पसंख्यक का घर गिराया जाता है या किसी को जाति और पेशे के नाम पर अपमानित किया जाता है। उन्होंने अखलाक और हरिओम वाल्मीकि जैसे मामलों का ज़िक्र करते हुए कहा कि ऐसे वक्त में न संविधान याद आता है, न लोकतंत्र।

नेहा सिंह राठौर ने UGC Regulation 2026 का विरोध कर रहे लोगों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जो लोग आज सरकार से सवाल पूछ रहे हैं, वही लोग कुछ समय पहले सरकार से सवाल करने वालों को देशद्रोही कह रहे थे। उनके शब्दों में “जब बुलडोज़र दूसरों पर चल रहा था, तब सबसे ज्यादा तालियां इन्हीं लोगों ने बजाई थीं।”

उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई सच में भेदभाव नहीं करता, तो फिर कानून से डरने की क्या ज़रूरत है। UGC Regulation 2026 में शिकायत निवारण के लिए कमेटी है, न्यायालय है, जांच की प्रक्रिया है फिर भय किस बात का? नेहा सिंह राठौर के मुताबिक, यह डर कानून का नहीं, बल्कि जवाबदेही का है।

इस पूरे विवाद ने UGC Regulation 2026 को एक साधारण प्रशासनिक नियम से कहीं आगे पहुंचा दिया है। अब यह कानून उस सामाजिक सच्चाई का आईना बन गया है, जिसमें लोकतंत्र और संविधान की याद अक्सर तभी आती है जब असर अपने वर्ग पर पड़ता है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि UGC के नए नियमों का मूल उद्देश्य कैंपस में जातिगत भेदभाव की शिकायतों को संस्थागत तरीके से हल करना है। लेकिन विरोध करने वाले इसे अस्पष्ट प्रावधानों और संभावित दुरुपयोग से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं समर्थकों का तर्क है कि दशकों से मौजूद असमानता को दूर करने के लिए ऐसे नियम जरूरी हैं।

राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि UGC Regulation 2026 ने देश के उस वैचारिक विरोधाभास को उजागर कर दिया है, जिसमें एक ओर ‘सब बराबर हैं’ का दावा किया जाता है और दूसरी ओर किसी भी सुधारात्मक कानून का तीखा विरोध होता है। यह बहस बताती है कि समस्या सिर्फ कानून की नहीं, बल्कि समाज की मानसिकता की भी है।

UGC Regulation 2026 पर देश में घमासान: कुमार विश्वास का विरोध, नेहा सिंह राठौर का तीखा पलटवार
UGC Regulation 2026 पर देश में घमासान: कुमार विश्वास का विरोध, नेहा सिंह राठौर का तीखा पलटवार

कुमार विश्वास और नेहा सिंह राठौर की यह वैचारिक टकराहट दरअसल उस बड़े सवाल को सामने लाती है क्या भारत में लोकतंत्र और समानता सार्वभौमिक मूल्य हैं, या फिर सुविधा के हिसाब से याद किए जाने वाले शब्द? UGC Regulation 2026 इसी सवाल के केंद्र में खड़ा नजर आता है।

आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस विरोध को किस तरह संबोधित करती है और क्या नियमों में कोई संशोधन होता है। लेकिन फिलहाल इतना तय है कि UGC Regulation 2026 ने शिक्षा से कहीं आगे जाकर देश की अंतरात्मा पर दस्तक दे दी है।

यह लेख सार्वजनिक बयानों, सोशल मीडिया पोस्ट्स और उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार संबंधित व्यक्तियों के निजी हैं। प्रकाशक या लेखक किसी राजनीतिक विचारधारा का समर्थन या विरोध नहीं करता।

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Tanu K

Tarannum, born on July 12, 1993, in the vibrant city of Gorakhpur, Uttar Pradesh, is a passionate content writer with a knack for storytelling. After earning her Bachelor’s in English from DDU, Gorakhpur, she dove into the world of words, driven by her love for crafting meaningful narratives. With seven years of experience, Tarannum has penned captivating content for niches like wellness, education, and e-commerce. Her writing is fresh, relatable, and SEO-savvy, connecting effortlessly with readers. From freelancing for local startups to strategizing content for a leading digital agency, she’s honed her skills in blogs, ad copy, and social media. In her downtime, Tarannum enjoys reading fiction and mentoring young writers, dreaming of stories that spark change.

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