Voter List SIR Ahmedabad अहमदाबाद में SIR के नाम पर बड़ा विवाद: ज़िंदा मुसलमानों को ‘मृत’ बताकर वोटर लिस्ट से नाम हटाने का आरोप, साज़िश की जांच की मांग
Voter List SIR Ahmedabad गुजरात के अहमदाबाद में मुसलमानों ने आरोप लगाया है, कि SIR प्रक्रिया के दौरान ज़िंदा लोगों को मृत दिखाकर वोटर लिस्ट से नाम हटाए गए। फॉर्म-7 के दुरुपयोग और सख्त कार्रवाई की मांग उठी है।
SIR प्रक्रिया के बीच अहमदाबाद में गंभीर आरोप
अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद में मतदाता सूची को लेकर एक बेहद गंभीर और संवेदनशील विवाद सामने आया है। स्थानीय मुसलमानों का आरोप है,कि Special Intensive Revision (SIR) के दौरान Voter List SIR Ahmedabad से कई ऐसे मतदाताओं के नाम हटा दिए गए, जो पूरी तरह जीवित हैं, और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करते रहे हैं।
आरोप लगाने वालों का कहना है, कि यह महज़ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से मताधिकार से वंचित करने की कोशिश है।
फॉर्म भरे, नाम जुड़े फिर भी ‘मृत’ घोषित
प्रभावित नागरिकों के अनुसार, उन्होंने SIR अभियान के दौरान सभी जरूरी फॉर्म भरे, दस्तावेज दिए और शुरुआती मसौदा मतदाता सूची में उनके नाम दर्ज भी किए गए थे।
इसके बावजूद बाद में Voter List SIR Ahmedabad से उनके नाम यह कहकर हटा दिए गए कि संबंधित मतदाता मृत हैं, जबकि वे खुद अपने परिवार के साथ मौजूद हैं।
फॉर्म 7 के दुरुपयोग का गंभीर आरोप
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है,कि कुछ अज्ञात तत्वों ने फॉर्म-7 का गलत इस्तेमाल कर इन मतदाताओं को मृत घोषित करने का आवेदन दिया।
आरोप यह भी है, कि बिना फिजिकल वेरिफिकेशन और बिना संबंधित व्यक्ति को सूचना दिए ही निर्वाचन तंत्र ने नाम काटने की प्रक्रिया पूरी कर दी।
विशेषज्ञों का कहना है,कि यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह Voter List SIR Ahmedabad की पारदर्शिता पर सीधा सवाल है।
मताधिकार पर सीधा हमला
प्रभावित परिवारों का कहना है,कि किसी ज़िंदा नागरिक को मृत घोषित करना सिर्फ एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि उसके संवैधानिक अधिकारों का हनन है।
लोगों का आरोप है, कि इस तरह की कार्रवाई से खास समुदाय के मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया से बाहर करने की कोशिश की जा रही है।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय स्तर पर पीड़ितों ने चुनाव आयोग और जिला प्रशासन से मांग की है, कि
फॉर्म-7 के जरिए आवेदन देने वालों की पहचान की जाए
बीएलओ और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच हो
जिन मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, उन्हें तत्काल Voter List SIR Ahmedabad में बहाल किया जाए
लोगों का कहना है, कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो लोकतंत्र पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा।
लोकतंत्र, पारदर्शिता और अल्पसंख्यक अधिकारों का सवाल
विश्लेषकों के अनुसार, यह मामला सिर्फ अहमदाबाद तक सीमित नहीं है। यह देशभर में चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची की निष्पक्षता और अल्पसंख्यक अधिकारों से जुड़ा बड़ा सवाल खड़ा करता है।
यदि जीवित नागरिकों को मृत बताकर वोटर लिस्ट से हटाया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।
फॉर्म-7 के दुरुपयोग का आरोप
अब निगाहें चुनाव आयोग पर टिकी हैं। पीड़ितों को उम्मीद है, कि आयोग Voter List SIR Ahmedabad से जुड़े इन आरोपों की निष्पक्ष और गहन जांच करेगा तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर मतदाता सूची की विश्वसनीयता बहाल करेगा।
यह लेख स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और सार्वजनिक रूप से सामने आए आरोपों पर आधारित है। चुनाव आयोग या प्रशासन की आधिकारिक जांच के बाद तथ्य बदल सकते हैं। लेख का उद्देश्य सूचना देना है, किसी आरोप की पुष्टि करना नहीं।