Corruption Asset Seizure Bihar बिहार में भ्रष्टाचार पर सबसे बड़ी कार्रवाई, 8 अफसरों की 4.14 करोड़ की संपत्ति राज्यसात

Written by: Tanu K

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Corruption Asset Seizure Bihar बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐतिहासिक कार्रवाई: मुखिया, मजिस्ट्रेट, SDO सहित 8 अफसरों की 4.14 करोड़ की संपत्ति राज्यसात तय

Corruption Asset Seizure Bihar बिहार निगरानी ब्यूरो का बड़ा एक्शन, मुखिया, मजिस्ट्रेट, SDO सहित 8 भ्रष्टाचारियों की 4.14 करोड़ की संपत्ति होगी जब्त।

पटना। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे कड़ी और निर्णायक कार्रवाई सामने आई है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने प्रशासन, न्यायपालिका और पंचायत व्यवस्था से जुड़े आठ बड़े भ्रष्टाचारियों की 4.14 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति को राज्यसात करने का प्रस्ताव भेज दिया है। जैसे ही सक्षम प्राधिकार की औपचारिक घोषणा जारी होगी, ये सभी संपत्तियां सीधे राज्य सरकार के अधीन चली जाएंगी। यह कदम न केवल कानूनी कार्रवाई है, बल्कि Corruption Asset Seizure Bihar के तहत भ्रष्ट सिस्टम पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।

Corruption Asset Seizure Bihar बिहार में भ्रष्टाचार पर सबसे बड़ी कार्रवाई, 8 अफसरों की 4.14 करोड़ की संपत्ति राज्यसात
Corruption Asset Seizure Bihar बिहार में भ्रष्टाचार पर सबसे बड़ी कार्रवाई, 8 अफसरों की 4.14 करोड़ की संपत्ति राज्यसात

2012 से 2019 तक के भ्रष्टाचार मामलों का नतीजा

निगरानी ब्यूरो के मुताबिक, जिन आठ आरोपियों की संपत्ति जब्त की जा रही है, उनके खिलाफ 2012 से 2019 के बीच अलग-अलग जिलों में भ्रष्टाचार के गंभीर मामले दर्ज हुए थे। वर्षों की जांच, आय से अधिक संपत्ति के प्रमाण और ठोस साक्ष्यों के आधार पर अब यह कार्रवाई निर्णायक मोड़ पर पहुंची है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह कार्रवाई साबित करती है,कि Corruption Asset Seizure Bihar केवल फाइलों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन पर उतर चुका अभियान है।

कौन कौन हैं वो आठ भ्रष्टाचारी, जिनकी संपत्ति होगी जब्त

निगरानी ब्यूरो की सूची में शामिल नाम और जब्ती की प्रस्तावित राशि इस प्रकार है,

मैनेजर यादव, तत्कालीन मुखिया, लौरिया (पश्चिम चंपारण)  80.04 लाख रुपये

प्रमोद कुमार राय, तत्कालीन मुखिया, जितवरिया (समस्तीपुर)  3.71 लाख रुपये

ओमप्रकाश मांझी, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग – 90.75 लाख रुपये

(भ्रष्टाचार सिद्ध होने पर सेवा से बर्खास्त)

राकेश कुमार राय, तत्कालीन न्यायिक दंडाधिकारी, दरभंगा – 41.12 लाख रुपये

दिलीप कुमार, तत्कालीन फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, लखीसराय – 88.25 लाख रुपये

विजय प्रताप सिंह, तत्कालीन एसडीओ, गोपालगंज – 62.35 लाख रुपये

अजय कुमार गुप्ता, तत्कालीन टैक्स दारोगा, मोतिहारी नगर परिषद – 34.62 लाख रुपये

फूलपरी कुमारी, तत्कालीन सीडीपीओ, पटना ग्रामीण  12.76 लाख रुपये

कुल प्रस्तावित जब्ती: 4.14 करोड़ रुपये, जो Corruption Asset Seizure Bihar को अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में शामिल करता है।

96.76 करोड़ की संपत्तियों पर अभी भी कानूनी प्रक्रिया जारी

निगरानी ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं,कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान यहीं नहीं रुका है,

अब तक 119 मामलों में 96.76 करोड़ रुपये की संपत्ति राज्यसात करने का प्रस्ताव भेजा जा चुका है।

66 मामले (57 करोड़ रुपये) प्राधिकृत पदाधिकारी के न्यायालय में लंबित हैं।

32 मामले (20.80 करोड़ रुपये) हाईकोर्ट में विचाराधीन हैं।

कुछ प्रकरण सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचे हैं।

अब तक 11 मामलों में 6.03 करोड़ रुपये की संपत्तियां अंतिम रूप से राज्यसात की जा चुकी हैं।

ये आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि Corruption Asset Seizure Bihar एक सतत और सख्त अभियान बन चुका है।

Corruption Asset Seizure Bihar बिहार में भ्रष्टाचार पर सबसे बड़ी कार्रवाई, 8 अफसरों की 4.14 करोड़ की संपत्ति राज्यसात
Corruption Asset Seizure Bihar बिहार में भ्रष्टाचार पर सबसे बड़ी कार्रवाई, 8 अफसरों की 4.14 करोड़ की संपत्ति राज्यसात

निगरानी डीजी का सख्त संदेश

निगरानी ब्यूरो के डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने स्पष्ट कहा

“भ्रष्टाचारियों की अवैध संपत्तियों को राज्यसात करना हमारी प्राथमिकता है। अब तक 119 मामलों में लगभग 97 करोड़ रुपये की संपत्तियों के लिए प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। वर्ष 2025 में ही आठ मामलों में यह प्रक्रिया शुरू की गई है।”

उनका यह बयान बताता है कि आने वाले समय में Corruption Asset Seizure Bihar और तेज होगा।

भ्रष्ट तंत्र पर सीधा वार

विश्लेषकों का मानना है, कि नौकरी से बर्खास्तगी से ज्यादा असरदार कार्रवाई अवैध संपत्तियों की जब्ती होती है। जब वर्षों की कमाई एक झटके में राज्यसात हो जाती है, तब भ्रष्टाचार की जड़ें हिलती हैं। यही वजह है, कि यह कार्रवाई बिहार में प्रशासनिक ईमानदारी की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है।

डिस्क्लेमर यह लेख निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, आधिकारिक बयानों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सूचना देना है। सभी संबंधित व्यक्तियों को कानून के तहत तब तक निर्दोष माना जाएगा, जब तक सक्षम न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध न हो जाए। न्यायिक प्रक्रिया प्रचलित है, आगे प्राप्त सूचनाओं के आधार पर तथ्यों में परिवर्तन संभव है।

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Tanu K

Tarannum, born on July 12, 1993, in the vibrant city of Gorakhpur, Uttar Pradesh, is a passionate content writer with a knack for storytelling. After earning her Bachelor’s in English from DDU, Gorakhpur, she dove into the world of words, driven by her love for crafting meaningful narratives. With seven years of experience, Tarannum has penned captivating content for niches like wellness, education, and e-commerce. Her writing is fresh, relatable, and SEO-savvy, connecting effortlessly with readers. From freelancing for local startups to strategizing content for a leading digital agency, she’s honed her skills in blogs, ad copy, and social media. In her downtime, Tarannum enjoys reading fiction and mentoring young writers, dreaming of stories that spark change.

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