Lucknow Memorial Scam लखनऊ स्मारक घोटाला: 11 साल बाद कार्रवाई तय, LDA के दो पूर्व अफसरों पर शिकंजा

Written by: akhtar husain

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Lucknow Memorial Scam लखनऊ स्मारक घोटाला: 11 साल बाद टूटी खामोशी, LDA के दो पूर्व शीर्ष इंजीनियरों पर कार्रवाई तय

लखनऊ स्मारक घोटाले में 11 साल बाद बड़ी कार्रवाई की तैयारी तेज, 1400 करोड़ रुपये के Lucknow Memorial Scam में LDA के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता पर जांच का दायरा बढ़ा।

लखनऊ।उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासन से जुड़े सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में शामिल Lucknow Memorial Scam एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। करीब 11 वर्षों तक ठंडे बस्ते में पड़ी फाइलें अब दोबारा खुल गई हैं, और इस बार कार्रवाई सीधे लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के दो पूर्व शीर्ष अधिकारियों तक पहुंच चुकी है।

Lucknow Memorial Scam लखनऊ स्मारक घोटाला: 11 साल बाद कार्रवाई तय, LDA के दो पूर्व अफसरों पर शिकंजा
Lucknow Memorial Scam लखनऊ स्मारक घोटाला: 11 साल बाद कार्रवाई तय, LDA के दो पूर्व अफसरों पर शिकंजा

वर्ष 2014 में विजिलेंस विभाग में दर्ज एफआईआर के आधार पर चल रही जांच को अब नई गति मिली है। लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने मामले की व्यक्तिगत निगरानी शुरू कर दी है, और एलडीए सचिव को सभी मूल दस्तावेज तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। यह संकेत साफ है, कि Lucknow Memorial Scam में अब सिर्फ औपचारिक जांच नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की तैयारी है।

2007–2011: जब स्मारकों के नाम पर बहा अरबों का पैसा

Lucknow Memorial Scam की शुरुआत 2007 से 2011 के बीच उस दौर में हुई, जब लखनऊ और नोएडा में भव्य स्मारकों और पार्कों का निर्माण कराया गया। इन परियोजनाओं में

अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल

मान्यवर कांशीराम स्मारक स्थल

गौतम बुद्ध उपवन

कांशीराम ईको ग्रीन गार्डन

नोएडा का अंबेडकर पार्क

जैसी हाई प्रोफाइल योजनाएं शामिल थीं।

इन स्मारकों के निर्माण के लिए पत्थरों की खरीद और निर्माण कार्यों में अत्यधिक कीमतों पर भुगतान, नियमों की अनदेखी और तकनीकी स्वीकृति में हेरफेर के गंभीर आरोप सामने आए। जांच में सामने आया कि लगभग 42.76 अरब रुपये का बजट स्वीकृत हुआ, जबकि 41.48 अरब रुपये खर्च कर दिए गए। इसी खर्च में करीब 1400 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता उजागर हुई, जिसने इस मामले को Lucknow Memorial Scam का नाम दिलाया।

सिर्फ LDA नहीं, पूरा सिस्टम रहा दायरे में

इस घोटाले की जांच में यह साफ हो चुका है,कि मामला केवल एलडीए तक सीमित नहीं था। राजकीय निर्माण निगम और उससे जुड़े कई तकनीकी अधिकारी भी इस नेटवर्क का हिस्सा पाए गए। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 57 अधिकारी और कर्मचारी अलग अलग स्तर पर इस महाघोटाले में शामिल थे। यही वजह है कि Lucknow Memorial Scam को उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी घोटालों में गिना जाता है।

Lucknow Memorial Scam लखनऊ स्मारक घोटाला: 11 साल बाद कार्रवाई तय, LDA के दो पूर्व अफसरों पर शिकंजा
Lucknow Memorial Scam लखनऊ स्मारक घोटाला: 11 साल बाद कार्रवाई तय, LDA के दो पूर्व अफसरों पर शिकंजा

अब शासन ने कस दी नकेल, सीधे एक्शन के आदेश

22 दिसंबर 2025 को शासन स्तर से जारी आदेश ने इस मामले को नई दिशा दे दी है। आदेश के अनुसार

लखनऊ के कमिश्नर को जांच जल्द पूरी कर कार्रवाई रिपोर्ट शासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

एलडीए सचिव विवेक श्रीवास्तव को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो सभी रिकॉर्ड और तकनीकी फाइलें जांच एजेंसी को उपलब्ध कराएंगे।

जांच में किसी भी तरह की देरी या लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।

यह आदेश बताता है,कि Lucknow Memorial Scam अब सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कसौटी बन चुका है।

इन दो पूर्व इंजीनियरों पर गिरेगी गाज

जांच के केंद्र में आए दो नाम

विमल कुमार सोनकर, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता (सेवानिवृत्त)

त्रिलोकी नाथ, तत्कालीन मुख्य अभियंता (सेवानिवृत्त)

सूत्रों के अनुसार, निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृति, लागत निर्धारण और भुगतान प्रक्रिया में इनकी भूमिका अहम रही है। इसी आधार पर इनके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

Lucknow Memorial Scam लखनऊ स्मारक घोटाला: 11 साल बाद कार्रवाई तय, LDA के दो पूर्व अफसरों पर शिकंजा
Lucknow Memorial Scam लखनऊ स्मारक घोटाला: 11 साल बाद कार्रवाई तय, LDA के दो पूर्व अफसरों पर शिकंजा

11 साल बाद फिर गरमाया Lucknow Memorial Scam

करीब एक दशक तक फाइलों में दबी रही जांच अब अचानक तेज हो गई है। प्रशासनिक गलियारों में इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी और मिसाल बनने वाली कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। अगर जांच अपने निष्कर्ष तक पहुंचती है, तो Lucknow Memorial Scam आने वाले समय में कई और बड़े नामों को बेनकाब कर सकता है।

डिस्क्लेमर यह लेख आधिकारिक सरकारी आदेशों, विजिलेंस एफआईआर और विश्वसनीय प्रशासनिक सूत्रों पर आधारित है। मामले की जांच अभी जारी है, इसलिए किसी भी अधिकारी को अंतिम रूप से दोषी या निर्दोष ठहराने का दावा नहीं किया गया है। जांच या न्यायिक प्रक्रिया के दौरान तथ्यों में परिवर्तन संभव है। लेख का उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है, न कि किसी व्यक्ति या संस्था की छवि को ठेस पहुंचाना।

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akhtar husain

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