Kajri Festival Gorakhpur सावन की सुरम्य छांव में खिला भारतीय संस्कृति का रंग”  श्री भगवती कन्या महाविद्यालय में हीरक जयंती और सावन महोत्सव की अद्भुत झलक

Written by: akhtar husain

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Kajri Festival Gorakhpur सावन की सुरम्य छांव में खिला भारतीय संस्कृति का रंग”  श्री भगवती कन्या महाविद्यालय में हीरक जयंती और सावन महोत्सव की अद्भुत झलक

Kajri Festival Gorakhpur गोरखपुर का ऐतिहासिक श्री भगवती प्रसाद कन्या महाविद्यालय, जो वर्ष 1950 से शिक्षा की लौ जलाए हुए है, इस वर्ष अपने हीरक जयंती समारोह के तहत सावन की हरियाली को संस्कृति की छांव में पिरोता हुआ एक अद्भुत आयोजन बना।

गोरखपुर में मनाया गया परंपरा और प्रतिभा का अद्वितीय संगम

गुरुवार को आयोजित यह आयोजन न केवल एक उत्सव था, बल्कि भारतीय लोकसंस्कृति, परंपरा, संगीत और स्त्री सशक्तिकरण की एक जीवंत झलक भी था।

कजरी की मिठास और छात्राओं का उत्साह, बना आयोजन का मुख्य आकर्षण

kajri-festival-gorakhpur  Kajri Festival Gorakhpur सावन की फुहारें भले ही बाहर न गिरी हों, लेकिन श्री भगवती कन्या महाविद्यालय के प्रांगण में उस दिन कजरी की सुरों की बरसात हो रही थी।

छात्राएं जब पारंपरिक परिधान में कजरी गीतों की प्रस्तुति देने मंच पर आईं, तो ऐसा लगा जैसे पूर्वांचल की सांस्कृतिक आत्मा जीवित हो उठी हो।

“पिया सावन में झूला झूलाय द, जिया बहलाय द” जैसी सुमधुर धुनों पर जब छात्राओं ने नृत्य और गायन किया, तो श्रोताओं की तालियों से सभागार गूंज उठा।

15 विद्यालयों की सहभागिता, हर कोने से झलकी नारी प्रतिभा

इस आयोजन की विशेष बात यह थी कि यह केवल महाविद्यालय तक सीमित नहीं रहा।

गोरखपुर शहर के 15 से अधिक कन्या विद्यालयों की छात्राओं ने इसमें भाग लिया।

हर छात्रा के चेहरे पर उत्साह और मंच पर आत्मविश्वास झलक रहा था। यह परंपरा और प्रतिभा का अद्भुत मेल था।

मेहंदी, राखी थाली सजाओ और पारंपरिक वेशभूषा प्रतियोगिता ने बढ़ाया आयोजन का सौंदर्य

सिर्फ सुर ही नहीं, सौंदर्य और सृजनात्मकता का संगम भी देखने को मिला।

मेहंदी प्रतियोगिता में जहाँ छात्राओं की कलात्मक अंगुलियों ने अनोखे डिज़ाइन रचा

वहीं राखी थाली सजाओ प्रतियोगिता में रंगों, कांचों और श्रद्धा का अनूठा मिश्रण देखने को मिला।

पारंपरिक वेशभूषा प्रतियोगिता में छात्राओं ने ग्रामीण भारत की जीवंत तस्वीर को मंच पर प्रस्तुत किया।

  Kajri Festival Gorakhpur प्रतिभा को मिला सम्मान, बना प्रेरणा का स्रोत

इस आयोजन में प्रतिभाओं को उचित मंच और पहचान दी गई।

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विजयी छात्राओं को सम्मानित किया गया, जो उनके आत्मविश्वास और भविष्य दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

कजरी गायन (एकल, कनिष्ठ वर्ग): गौरी मौर्या (श्री भगवती कन्या महाविद्यालय) – प्रथम स्थान

कजरी गायन (एकल, वरिष्ठ वर्ग): अंशिका (रामनारायण लाल कन्या इंटर कॉलेज) – प्रथम स्थान

समूह गान (वरिष्ठ): AD गर्ल्स इंटर कॉलेज

समूह गान (कनिष्ठ): भगवती कन्या महाविद्यालय

वेशभूषा प्रतियोगिता (वरिष्ठ): फलक खान (महाराणा प्रताप कन्या इंटर कॉलेज)

मेहंदी (वरिष्ठ): अर्चना (भगवती कन्या महाविद्यालय)

मेहंदी (कनिष्ठ): प्रियंका (कंपोजिट पूर्व माध्यमिक विद्यालय)

राखी थाली सजाओ: कली प्रजापति (भगवती कन्या महाविद्यालय)

Kajri Festival Gorakhpur मुख्य अतिथि ने दिए प्रेरक संदेश

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पण और दीप प्रज्वलन से हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि श्रीमती चारू चौधरी (उपाध्यक्ष, राज्य महिला आयोग) व कार्यक्रम अध्यक्ष अंजू चौधरी (पूर्व महापौर) की गरिमामयी उपस्थिति रही।

  Kajri Festival Gorakhpur चारू चौधरी ने कहा:

“आज के दौर में जब आधुनिकता की चकाचौंध में हमारी परंपराएं विलुप्त होती जा रही हैं, ऐसे आयोजन भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़ने का माध्यम हैं। कजरी जैसे लोकगीतों को बचाना सिर्फ एक प्रयास नहीं, बल्कि पीढ़ियों के लिए धरोहर सौंपना है।”

अंजू चौधरी ने कहा:

“सावन सिर्फ मौसम नहीं, एक सांस्कृतिक अनुभूति है। इन गीतों में गांव की मिट्टी की खुशबू और स्त्री स्वर की गरिमा झलकती है।”

 प्रबंधन और आयोजन टीम की सराहना

कार्यक्रम का कुशल संचालन पुनीता देवी और साधना यादव ने किया।

Kajri Festival Gorakhpur  वहीं आयोजन की सफलता में प्रबंधक प्रो. शिव शरण दास, प्रधानाचार्य श्रीमती रीना सिंह, और समन्वयक अनिता श्रीवास्तव, नंदिता दास, कादंबिनी, व निर्णायक मंडल (उमा मिश्रा, ह्दया त्रिपाठी, रीना जायसवाल, ममता श्रीवास्तव) की भूमिका सराहनीय रही।

सांस्कृतिक मूल्यों की संजीवनी बनी यह पहल

Kajri Festival Gorakhpur इस समारोह ने यह साफ़ कर दिया कि अगर शिक्षा संस्थान चाहें, तो वे केवल शिक्षा नहीं बल्कि संस्कृति के संवाहक भी बन सकते हैं।

आज जब आधुनिकता के नाम पर हमारी परंपराएं खोती जा रही हैं, ऐसे आयोजनों की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है।

भविष्य की दिशा – परंपरा और प्रगति का साथ

श्री भगवती कन्या महाविद्यालय का यह आयोजन सिर्फ अतीत की झलक नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा भी है –

जहां छात्राएं किताबों के साथ-साथ संस्कृति, कला और समाज की ज़िम्मेदारी भी सीखती हैं।

यह महज कार्यक्रम नहीं था, एक सशक्त, सुसंस्कृत और संवेदनशील भारत की ओर उठाया गया कदम था।

Kajri Festival Gorakhpur एकआयोजन जो दिल को छू गया

कजरी की तान, मेंहदी की खुशबू, और छात्राओं की मुस्कान –

श्री भगवती कन्या महाविद्यालय का यह हीरक जयंती समारोह सिर्फ यादों में नहीं, संस्कारों में भी बस गया।

akhtar husain

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