Food Adulteration Case: मऊ में चायपत्ती के घोल में रंगे अंडे पकड़े गए, खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई
मऊ जिले में एक चौंकाने वाला Food Adulteration Case सामने आया, जिसने आम उपभोक्ताओं की सेहत और भरोसे दोनों को हिलाकर रख दिया। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने हकीकतपुरा (नेशनल स्कूल के पास) स्थित एक प्रतिष्ठान पर छापेमारी की, जहाँ अंडों को देसी अंडा दिखाने के लिए चायपत्ती के गाढ़े घोल में रंगने की हैरान करने वाली प्रक्रिया चल रही थी। आसान भाषा में कहें तो लोगों के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ किया जा रहा था। यह Food Adulteration Case न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि एक गम्भीर धोखाधड़ी भी है, जिसकी जांच अब तेज कर दी गई है।
शिकायत पर तुरंत कार्रवाई, 2160 रंगे हुए अंडे और चायपत्ती का घोल बरामद
जिला प्रशासन को मिली जन शिकायत के बाद सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा ने टीम के साथ प्रतिष्ठान का निरीक्षण किया। जांच में 74 कैरट (कुल 2160 अंडे) संदिग्ध हालत में मिले। इसके अलावा एक टीन में करीब 14 लीटर चायपत्ती का घोल और ब्रांड “ताज़ा” की 04 पैकेट चायपत्ती भी बरामद हुई।
जब टीम ने दुकानदार वसीम से पूछताछ की, तो उसने स्वीकार किया कि वह इन अंडों को चायपत्ती के घोल में डालकर उनका रंग गहरा करता है, ताकि वे देसी अंडा जैसे दिखें और अधिक कीमत पर बिक सकें।
यह पूरा मामला एक गंभीर Food Adulteration Case साबित हो रहा है, जिसकी तह तक जाने के लिए नमूनों को प्रयोगशाला भेजा गया है।
नमूने लैब भेजे गए, 72 कैरट अंडे सीज, खाद्य विभाग की सख्त कार्रवाई जारी
निरीक्षण के बाद अंडों, चायपत्ती के घोल और ब्रांडेड चायपत्ती के नमूने फूड विश्लेषक की प्रयोगशाला में भेज दिए गए। मौके पर मौजूद 72 कैरट अंडे, जिनकी कीमत ₹15,120 थी, विभाग ने तत्काल सीज कर मकान मालिक मुमताज अहमद की सुरक्षित अभिरक्षा में सौंप दिए।
यदि जांच रिपोर्ट में मिलावट सिद्ध होती है, तो इस Food Adulteration Case में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत कड़ी कार्रवाई होगी। इसमें भारी जुर्माना, लाइसेंस रद्द होने और कानूनी दंड जैसे प्रावधान शामिल हैं।
खाद्य विभाग ने साफ कहा है कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए ऐसी धोखाधड़ी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बढ़ती डिमांड का फायदा उठाकर मिलावट, देसी अंडे की आड़ में बड़ा खेल
देसी अंडों की बढ़ती मांग ने इस तरह के Food Adulteration Case को बढ़ावा दिया है। देसी अंडे सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं, इसलिए कई दुकानदार नकली तरीकों से इनका रंग बदलकर अधिक कमाई का रास्ता चुन रहे हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो चायपत्ती के घोल में रंगे अंडों में बैक्टीरिया संक्रमण की संभावना अधिक होती है, जिससे फूड प्वाइजनिंग और अन्य स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाते हैं।
यह पूरा Food Adulteration Case बताता है कि खाद्य बाजार में लोगों को जागरूक रहना जरूरी है, क्योंकि कई बार दिखने में देसी लगने वाला अंडा वास्तव में नकली होता है।
उपभोक्ताओं के लिए चेतावनी—इस तरह पहचानें असली देसी अंडा
चूंकि यह Food Adulteration Case उपभोक्ताओं के लिए एक चेतावनी है, इसलिए कुछ आसान तरीकों को ध्यान में रखकर लोग सुरक्षित खरीदारी कर सकते हैं:
देसी अंडों का आकार सामान्य अंडों से छोटा होता है। इनका रंग हल्का-गहरा प्राकृतिक भूरापन लिए होता है, अत्यधिक चमक संदिग्ध हो सकती है। बहुत सस्ता या बहुत महंगा अंडा खरीदते समय सतर्क रहें। विश्वसनीय दुकानदार से ही अंडे खरीदें।
अगर किसी खाद्य उत्पाद पर संदेह हो, तो तुरंत खाद्य विभाग को शिकायत करें। इससे मिलावटखोरों पर रोक लगेगी और ऐसे Food Adulteration Case भविष्य में कम होंगे।
यह लेख प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी और जांच पर आधारित है। अंतिम निष्कर्ष प्रयोगशाला रिपोर्ट और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।