Noida lekhpal bribe arrest ग्रेटर नोएडा में रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया लेखपाल, कार से ₹4.7 लाख बरामद किसानों के हक पर भारी भ्रष्टाचार
Noida lekhpal bribe arrest ग्रेटर नोएडा के दादरी तहसील में लेखपाल दर्शन कुमार को ₹50,000 रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया। ACB मेरठ यूनिट ने उसकी कार से ₹4.7 लाख नकद बरामद किए। दलाल मोहसिन खान भी गिरफ्तार।
किसानों के हक पर लगा दाग जब रक्षक ही बन गया भक्षक
ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है।
दादरी तहसील में तैनात लेखपाल दर्शन कुमार को ₹50,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है।
Anti Corruption Bureau (मेरठ यूनिट) की टीम ने छापा मारकर उसकी कार से ₹4.7 लाख रुपये नकद बरामद किए।
यह वही व्यक्ति है,जिसे किसानों की ज़मीन की रक्षा करनी थी, लेकिन वह उनके लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गया।
ग्रामीणों का कहना है,कि दर्शन कुमार लंबे समय से लोगों से रिपोर्ट अपडेट करने के नाम पर अवैध वसूली करता था।
किसानों के मुताबिक, सच्चाई की रिपोर्ट भी तब तक नहीं बनती जब तक जेब गर्म न की जाए।
रिश्वत का जाल किसान से मांगे थे ₹50,000, दलाल भी पकड़ा गया
यह कार्रवाई तब हुई जब गाँव धूम मानिकपुर के किसान महेश चन्द्र शर्मा ने शिकायत दी कि लेखपाल ने जमीन के सत्यापन के लिए ₹50,000 की मांग की है।
Anti Corruption Bureau (ACB) मेरठ यूनिट ने तुरंत टीम गठित की और शिकायत के आधार पर ट्रैप प्लान बनाया।
जैसे ही किसान ने तय रकम लेखपाल को दी, ACB टीम ने मौके पर पहुंचकर लेखपाल दर्शन कुमार और उसके सहयोगी दलाल मोहसिन खान को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
कार्रवाई के दौरान लेखपाल की कार से ₹4.7 लाख रुपये और कुछ दस्तावेज बरामद हुए।
इस छापेमारी का नेतृत्व निरीक्षक मयंक अरोड़ा और निरीक्षक दुर्गेश कुमार की टीम ने किया।
टीम में सिविल ड्रेस में पहुंचे अधिकारियों ने पूरी कार्रवाई को रिकॉर्ड भी किया ताकि कोर्ट में ठोस साक्ष्य पेश किए जा सकें।
भ्रष्टाचार पर ACB की सर्जिकल स्ट्राइक प्रशासन में मचा हड़कंप
ACB मेरठ यूनिट की इस कार्रवाई से पूरे जिले में हड़कंप मच गया है।
सूत्रों के मुताबिक, लेखपाल दर्शन कुमार कई महीनों से किसानों से पैसे लेकर फर्जी रिपोर्ट तैयार करता था।
उसके खिलाफ पहले भी कई मौखिक शिकायतें की गई थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी।
इस बार ACB ने सबूतों के साथ उसे धर दबोचा।
पकड़े जाने के बाद लेखपाल और दलाल दोनों को दादरी पुलिस को सुपुर्द किया गया।
उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (Prevention of Corruption Act) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
दोनों आरोपियों को मेडिकल जांच के बाद न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
ACB अधिकारियों ने बताया कि बरामद रकम और अन्य कागजातों की जांच आगे बढ़ाई जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह पैसा किन लोगों से वसूला गया था।
किसानों की आवाज “हमारे हक के लिए रिश्वत क्यों?”
गाँव के लोगों ने कहा कि जमीन संबंधी कार्यों के लिए हर बार लेखपाल रिश्वत मांगता था।
किसानों के अनुसार, खतौनी अपडेट या उत्तराधिकार रिपोर्ट में नाम जोड़ने तक के लिए “सेवा शुल्क” तय था।
अब जब ACB ने उसे पकड़ लिया है, तो गाँव में लोग राहत की सांस ले रहे हैं।
एक ग्रामीण ने कहा, “हम कई बार शिकायत करना चाहते थे, लेकिन डरते थे। अब जब सरकार की टीम ने कार्रवाई की है, तो विश्वास लौटा है।”
किसानों ने यह भी मांग की है,कि प्रशासन ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों को केवल निलंबित न करे, बल्कि स्थायी रूप से सेवा से बर्खास्त करे ताकि भविष्य में कोई दूसरा अफसर ऐसा करने की हिम्मत न करे।
क्या बदल रहा है सिस्टम?
यूपी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कई कदम उठाए हैं
Online Mutation Process (नामांतरण)
Digital Khatauni Verification
Geo tagging of Land Parcels
IGRS Portal पर शिकायत निवारण सिस्टम
इन कदमों ने पारदर्शिता तो बढ़ाई है, पर असली चुनौती जमीनी स्तर पर है।
जब तक ईमानदार अफसर अपनी भूमिका गंभीरता से नहीं निभाते, तब तक किसान को सिस्टम पर भरोसा करना मुश्किल है।
ACB जैसी टीमें यही भरोसा फिर से कायम करने की दिशा में काम कर रही हैं।
जनता की जिम्मेदारी रिश्वत न दें, न लें
भ्रष्टाचार मिटाने में जनता की भूमिका सबसे अहम है।
अगर कोई सरकारी कर्मचारी रिश्वत मांगता है, तो लोग तुरंत ACB Helpline 1064 या वेबसाइट acbup.gov.in पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
अब हर नागरिक के पास मोबाइल और इंटरनेट है, इसलिए रिश्वत देना या लेना, दोनों ही अक्षम्य हैं।
युवाओं को यह समझना होगा कि “Transparency is the new revolution”
जब हर प्रक्रिया ऑनलाइन और रिकॉर्डेड होगी, तब रिश्वतखोरी की गुंजाइश अपने आप खत्म हो जाएगी।
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अब डर नहीं, सबूत के साथ आवाज उठाएँ
ग्रेटर नोएडा का यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि किसानों की जीत है।
यह दिखाता है, कि जब कोई आम नागरिक साहस करके भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत करता है, तो सिस्टम भी जाग जाता है।
किसानों ने दिखा दिया है, कि डर पर हिम्मत भारी पड़ सकती है।
अब जरूरत है, कि हर नागरिक इसी तरह भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाए।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल समाचार और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी सार्वजनिक रिपोर्ट्स और आधिकारिक मीडिया स्रोतों पर आधारित है। किसी व्यक्ति या संस्था की छवि को नुकसान पहुँचाना लेखक या प्रकाशक का उद्देश्य नहीं है।