गोरखपुर सूरजकुंड तालाब में मछलियों की मौत: तेल और ऑक्सीजन की कमी बनी वजह

Written by: Tanu K

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गोरखपुर के Surajkund fish pond में हाल ही में हुई सैकड़ों मछलियों की मौत ने शहरवासियों को चौंका दिया। पहले यह माना गया कि किसी जहरीले रसायन से यह घटना हुई है, लेकिन जांच रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि असली कारण पानी में तेल की परत और ऑक्सीजन की भारी कमी थी। त्योहारों के बाद Surajkund fish pond का पानी दूषित हो गया था, जिससे मछलियां सांस नहीं ले सकीं और मरने लगीं।

त्योहारों के बाद बढ़ा प्रदूषण, पूजा सामग्री बनी जिम्मेदार

नारायण लेबोरेटरी एंड कंसल्टेंसी, गोरखपुर ने Surajkund fish pond से 31 अक्टूबर को पानी के नमूने लिए। रिपोर्ट में पाया गया कि तालाब के पानी में oil contamination और organic pollution का स्तर बेहद अधिक था। दिवाली और छठ पूजा के दौरान तेल, घी, फूल और पूजा सामग्री सीधे तालाब में डाली गई थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन वस्तुओं से पानी की सतह पर तेल की परत जम गई, जिसने ऑक्सीजन का प्रवाह रोक दिया। यही वजह है कि Surajkund fish pond में पहले छोटी मछलियां मरीं, फिर बड़ी मछलियां दूषित पानी से प्रभावित हुईं। रिपोर्ट के अनुसार, पानी का COD 120 mg/L और BOD 4.5 mg/L दर्ज किया गया, जो सामान्य से काफी अधिक है।

वैज्ञानिकों की रिपोर्ट: “ऑक्सीजन शॉक” और “तेल विषाक्तता”

दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय के इंडस्ट्रियल माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ साहिल महफूज ने बताया कि Surajkund fish pond में हुई यह घटना “oxygen shock और oil poisoning” का स्पष्ट उदाहरण है। जब तालाब की सतह पर तेल की परत जम जाती है, तो ऑक्सीजन घुलना बंद हो जाती है।

महफूज ने कहा कि 29 अक्टूबर को संभवतः पानी में घुली ऑक्सीजन 2 mg/L से नीचे चली गई थी। इस वजह से Surajkund fish pond की पारिस्थितिकी बिगड़ गई। बारिश के बाद जब नया पानी आया, तब जाकर स्थिति में थोड़ी सुधार हुआ। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसे धार्मिक कचरे को तालाब में डालना जारी रहा, तो आगे भी ऐसी घटनाएं हो सकती हैं।

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हेरिटेज फाउंडेशन की अपील: तालाबों की रक्षा जरूरी

हेरिटेज फाउंडेशन की संरक्षिका अनीता अग्रवाल ने प्रशासन से आग्रह किया कि Surajkund fish pond और अन्य जलस्रोतों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों के बाद तालाबों में तेल, घी और फूल बहाने से पर्यावरण को भारी नुकसान होता है।

उनका मानना है कि Surajkund fish pond की सफाई और निगरानी नियमित रूप से की जानी चाहिए। अगर लोग थोड़ी जागरूकता दिखाएं, तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है। फाउंडेशन ने नगर निगम से अपील की है कि वह तालाब के पास पूजा सामग्री डालने पर प्रतिबंध लगाए और लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराए।

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समाधान और चेतावनी: जलस्रोतों की देखभाल हर नागरिक की जिम्मेदारी

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि Surajkund fish pond जैसी जगहें शहर की पारिस्थितिकी के लिए बहुत अहम हैं। यहां के जलजीव न केवल स्थानीय जैव विविधता का हिस्सा हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र के जल संतुलन को बनाए रखते हैं। अगर प्रदूषण यूं ही जारी रहा, तो भविष्य में यह तालाब पूरी तरह मृत जलाशय बन सकता है।

सरकार और समाज दोनों को मिलकर काम करना होगा ताकि Surajkund fish pond को बचाया जा सके। यह जरूरी है कि हम अपने धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यों में पर्यावरण का ध्यान रखें और किसी भी जलस्रोत को प्रदूषण का शिकार न बनने दें।

Disclaimer: यह रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध प्रयोगशाला विश्लेषण और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। उद्देश्य केवल पर्यावरणीय जागरूकता फैलाना है, किसी संस्था या व्यक्ति को दोष देना नहीं।

Tanu K

Tarannum, born on July 12, 1993, in the vibrant city of Gorakhpur, Uttar Pradesh, is a passionate content writer with a knack for storytelling. After earning her Bachelor’s in English from DDU, Gorakhpur, she dove into the world of words, driven by her love for crafting meaningful narratives. With seven years of experience, Tarannum has penned captivating content for niches like wellness, education, and e-commerce. Her writing is fresh, relatable, and SEO-savvy, connecting effortlessly with readers. From freelancing for local startups to strategizing content for a leading digital agency, she’s honed her skills in blogs, ad copy, and social media. In her downtime, Tarannum enjoys reading fiction and mentoring young writers, dreaming of stories that spark change.

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