Aajivika Mission में भुगतान न मिलने और अनियमितता के आरोप

Written by: akhtar husain

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Aajivika Mission में भुगतान न मिलने और अनियमितता के आरोप, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने जांच की मांग उठाई

इटौरा। आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों से काम कराने के बाद भुगतान नहीं मिलने और अभिलेखों में कथित गड़बड़ी किए जाने का मामला सामने आया है। महादेव स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2021 से समूह संचालित होने के बावजूद उन्हें आजीविका मिशन की ओर से अपेक्षित सुविधाओं का लाभ नहीं मिला। समूह की महिलाओं का कहना है कि अधिकारियों के निर्देश और भरोसे पर उन्होंने कई गांवों में विभिन्न कार्य किए, लेकिन मेहनत के अनुरूप भुगतान नहीं किया गया।

समूह की अध्यक्ष सुमन शर्मा, सचिव कंचन और कोषाध्यक्ष चंदा देवी सहित अन्य सदस्यों ने बताया कि वर्ष 2023 में ब्लॉक स्तर पर कार्यरत वीएमएम सुग्रीव/डिंपल शुक्ला के माध्यम से उन्हें मनरेगा से जुड़े कार्यों के लिए सीआई बोर्ड तैयार कर लगाने का काम मिला था। महिलाओं के अनुसार काम मिलने के बाद उन्होंने लगातार बोर्ड तैयार किए और क्षेत्र के लगभग 25 से 26 गांवों में करीब 160 सीआई बोर्ड लगाए।

महिलाओं का कहना है कि कार्य पूरा करने के बाद जब भुगतान की बात की गई तो उन्हें लंबे समय तक यह कहकर आश्वासन दिया गया कि पैसा आने के बाद भुगतान कर दिया जाएगा। नवंबर 2024 में दो बोर्डों के बदले ₹10,000 की राशि समूह के खाते में आने की बात कही गई है। इसके बाद बाकी भुगतान के लिए महिलाओं को कथित रूप से संबंधित ग्राम प्रधानों से पैसा मांगने के लिए कहा जाने लगा।

समूह की महिलाओं का सवाल है कि यदि काम आजीविका मिशन के माध्यम से कराया गया था और उनके जीएसटी दस्तावेज, बैंक खाते की जानकारी, चेकबुक तथा पंजीकरण संबंधी कागजात जमा हैं, तो भुगतान की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय क्यों नहीं की जा रही है। महिलाओं का आरोप है कि उन्हें भुगतान के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

झंडे बनाने के भुगतान को लेकर भी शिकायत

महादेव स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने झंडे तैयार करने के काम में भी भुगतान संबंधी गंभीर शिकायतें की हैं। महिलाओं के मुताबिक पिछले वर्ष उन्होंने लगभग 600 झंडे तैयार करके ब्लॉक पर डिंपल शुक्ला को उपलब्ध कराए थे। इसके बाद इस वर्ष करीब 1000 झंडों की मांग की गई।

महिलाओं का कहना है कि अधिकारियों के स्तर से जांच किए जाने के बाद उन्होंने लगभग 1500 झंडे तैयार कर दिए, लेकिन उनके अनुसार रिकॉर्ड में इसकी संख्या केवल 180 दिखाई जा रही है। महिलाओं का आरोप है कि पिछले वर्ष और इस वर्ष तैयार किए गए झंडों का भुगतान उन्हें नहीं मिला है।

समूह की सदस्यों ने कहा कि उन्होंने सामग्री खरीदने और झंडे तैयार करने में समय और मेहनत लगाई। इसके बावजूद भुगतान नहीं मिलने से उनके सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है। महिलाओं ने पूरे मामले में तैयार किए गए बोर्ड और झंडों की वास्तविक संख्या, संबंधित रजिस्टर, बिल, भुगतान रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन की जांच कराने की मांग की है।

आंबेडकर स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष पुष्पा देवी ने भी लगाए आरोप

इसी मामले से जुड़े एक अन्य प्रकरण में ग्राम इटौरा निवासी पुष्पा देवी पत्नी तेज बहादुर, जो आंबेडकर स्वयं सहायता समूह, इटौरा की अध्यक्ष हैं, ने भी आजीविका मिशन से जुड़े कार्य में अनियमितता का आरोप लगाया है।

पुष्पा देवी के अनुसार उन्हें 10 जुलाई 2023 को सामुदायिक शौचालय में टेकर के रूप में कार्य मिला था। उनका कहना है कि उन्होंने समय से अपने दायित्व का निर्वहन किया, लेकिन बाद में उनकी जानकारी के बिना समूह के पदाधिकारियों में बदलाव कर सामुदायिक शौचालय का काम दूसरे लोगों से कराया जाने लगा।

पुष्पा देवी का दावा है कि सरकारी रिकॉर्ड में आज भी सामुदायिक शौचालय के टेकर के पद पर उनका नाम दर्ज है। उनके अनुसार आजीविका मिशन से संबंधित व्यवस्था के तहत ₹6,000 तथा साफ-सफाई के लिए ₹3,000 की राशि उनके नाम पर दर्शाई जाती थी, लेकिन उन्हें वास्तविक भुगतान नहीं मिला।

उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी जानकारी के बिना उन्हें टेकर के पद से हटाकर केवल समूह की सदस्य के रूप में रखा गया। पुष्पा देवी का कहना है कि उनके पास संबंधित पासबुक और रजिस्टर मौजूद हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि करीब छह माह के भुगतान को कथित रूप से फर्जी मोहर और पासबुक के माध्यम से निकाल लिया गया।

जांच होने पर सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति

दोनों स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि विभागीय रिकॉर्ड, समूह की पासबुक, बैंक स्टेटमेंट, रजिस्टर, कार्य से संबंधित दस्तावेज, बिल-वाउचर और भुगतान विवरण की जांच की जाए तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

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महिलाओं का आरोप है कि गरीब परिवारों से जुड़ी समूह की सदस्यों से काम तो कराया गया, लेकिन उनके मेहनताने और कार्य की पूरी राशि नहीं दी गई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए और यदि जांच में किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता या गलत भुगतान पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

महिलाओं ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से बदनाम करना नहीं, बल्कि अपने किए गए कार्य का उचित भुगतान और पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराना है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि समूहों के दस्तावेज और बैंक रिकॉर्ड की जांच कराकर जिन महिलाओं ने वास्तव में काम किया है, उन्हें उनकी बकाया राशि दिलाई जाए।

 

akhtar husain

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