CBI Bribery Case बैंक मैनेजर को 5 साल की कैद, कोर्ट का बड़ा फैसला  लखनऊ कोर्ट न्यूज़

Written by: akhtar husain

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CBI Bribery Case में लखनऊ की सीबीआई अदालत ने बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर को 5 साल की कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। साथ ही पुलिस पर फायरिंग मामले में आरोपी अनुज रावत को जमानत। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।

CBI Bribery Case में बैंक मैनेजर को 5 साल की कैद: लखनऊ कोर्ट का सख्त और ऐतिहासिक फैसला

कई बार एक छोटी-सी लालच इंसान की पूरी ज़िंदगी बदल देती है। ऐसा ही हुआ उस चर्चित CBI Bribery Case में, जिसने यूपी के लखनऊ से लेकर दिल्ली तक चर्चा बटोरी। बैंक ऑफ बड़ौदा, बासखरी शाखा के तत्कालीन मैनेजर रामस्वरूप मिश्रा को अदालत ने घूस लेने के आरोप में दोषी पाया और 5 साल की सश्रम कैद सुनाई। यह फैसला बताता है,कि कानून भ्रष्टाचार को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करता। CBI Bribery Case अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मिसाल बन चुका है।

CBI Bribery Case बैंक मैनेजर को 5 साल की कैद, कोर्ट का बड़ा फैसला  लखनऊ कोर्ट न्यूज़
CBI Bribery Case बैंक मैनेजर को 5 साल की कैद, कोर्ट का बड़ा फैसला  लखनऊ कोर्ट न्यूज़

CBI Bribery Case: बैंक मैनेजर को मिली 5 साल की सश्रम कैद

लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने CBI Bribery Case में कड़ा फैसला सुनाते हुए बैंक मैनेजर रामस्वरूप मिश्रा को दोषी करार दिया। अदालत ने उन्हें 5 साल की सश्रम कैद और 50,000 रुपये के जुर्माने की सजा दी। यह मामला 7 मार्च 2017 को उस समय दर्ज हुआ, जब शिकायतकर्ता ने बताया कि “कामधेनु योजना” के तहत 20 लाख 25 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ था। कुछ राशि खाते में जमा हुई, लेकिन अचानक खाते का संचालन रोक दिया गया। पूछने पर मैनेजर ने खाते को चालू करने के लिए 30 हजार रुपये की घूस मांगी और बाद में 25 हजार रुपये पर राज़ी हुआ।

CBI Bribery Case की सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग किया और भ्रष्टाचार में शामिल रहा। अदालत ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर में ईमानदारी बनाए रखने के लिए ऐसे अपराधों पर सख्त सजा बेहद आवश्यक है। इस CBI Bribery Case ने एक बार फिर साबित किया कि न्याय व्यवस्था अभी भी निष्पक्ष और मजबूत है।

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रंगे हाथ पकड़े गए आरोपी, CBI ने बरामद किया खाली चेक

इस CBI Bribery Case की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि सीबीआई टीम ने आरोपी बैंक मैनेजर को रंगे हाथ पकड़ा। शिकायतकर्ता से रिश्वत के तौर पर हस्ताक्षरित खाली चेक लेते ही CBI ने उसे गिरफ्तार कर लिया और वही चेक मौके से बरामद किया। 31 मार्च 2017 को चार्जशीट दाखिल की गई और लंबे समय तक चली इस सुनवाई ने कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखे।

यह CBI Bribery Case सिर्फ एक बैंक कर्मचारी की हरकत नहीं थी, बल्कि यह उदाहरण था कि किस तरह भ्रष्टाचार आम लोगों की उम्मीदों को तोड़ता है,CBI ने मजबूत साक्ष्यों के आधार पर अदालत को संतुष्ट किया कि रिश्वत लेने की कोशिश साफ तौर पर साबित होती है। यही वजह है कि CBI Bribery Case में कठोर सजा सुनाई गई।

पुलिस पर फायरिंग करने वाले आरोपी अनुज रावत को मिली जमानत

इस CBI Bribery Case की चर्चा के बीच एक और बड़ा फैसला सामने आया। एडीजे नीलकांत मणि त्रिपाठी की अदालत ने पुलिस पार्टी पर कथित फायरिंग करने वाले आरोपी अनुज रावत की जमानत मंजूर कर ली।

अदालत ने कहा कि घटना में कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है, और न ही पुलिस टीम के किसी सदस्य को चोट की कोई स्पष्ट मेडिकल रिपोर्ट दर्ज है। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को 50-50 हजार की दो जमानतें भरने पर रिहा करने का आदेश दिया।

मामला 6 सितंबर का है, जब सुशांत गोल्फ सिटी थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ चेकिंग कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, आरोपी बाइक के साथ गिरा और कथित रूप से उसने पुलिस पर गोली चलाई, जिसके जवाब में पुलिस की फायरिंग में उसके पैर में गोली लगी।
अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य कमजोर हैं, और ऐसे में आरोपी को जमानत देना न्यायसंगत है। हालांकि, यह फैसला आने वाले समय में भी चर्चा का विषय रहेगा क्योंकि इस केस की आगे की सुनवाई में कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं।

भ्रष्टाचार और अपराध पर कानून की सख़्ती CBI Bribery Case ने दिया बड़ा संदेश

यह पूरा CBI Bribery Case और पुलिस फायरिंग मामला समाज को यह संदेश देता है,कि कानून अपना काम बखूबी कर रहा है। भ्रष्टाचार हो या हिंसा हर अपराध पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

समाज में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है, क्योंकि घूसखोरी और बैंकिंग अनियमितताओं का असर सीधे आम लोगों पर पड़ता है। जब भी दोषियों को न्यायालय से सजा मिलती है, यह आम जनता का विश्वास और भी मजबूत करती है।

CBI Bribery Case, जिसने लोगों का ध्यान खींचा, यह बताता है,कि भ्रष्टाचार चाहे कितना भी छोटा दिखे, उसका अंत जेल में ही होता है। यह केस भविष्य के लिए एक मजबूत उदाहरण बन चुका है।

Disclaimer: यह आर्टिकल उपलब्ध समाचार स्रोतों और प्राप्त विवरणों पर आधारित है। किसी व्यक्ति या संस्था की छवि को नुकसान पहुँचाने का उद्देश्य नहीं है। यह सामग्री केवल सूचना के लिए प्रकाशित की गई है।

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akhtar husain

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