Chhath Puja 2025 की शुरुआत 25 अक्टूबर को नहाय-खाय से हो गई है। यह चार दिन तक चलने वाला सूर्य उपासना का पर्व है जिसमें व्रती महिलाएं खरना, डूबते सूर्य को अर्घ्य और उगते सूर्य की पूजा करती हैं। देशभर में छठ घाटों पर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है।
छठ पूजा 2025 की शुरुआत नहाय-खाय से
आस्था का महापर्व Chhath Puja 2025 देशभर में पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हो गया है। इस साल छठ पूजा की शुरुआत 25 अक्टूबर को नहाय-खाय के साथ हुई। यही दिन पर्व की शुद्ध शुरुआत मानी जाती है। इस दिन व्रती महिलाएं पवित्र नदियों, तालाबों या घाटों पर स्नान कर व्रत की शुरुआत करती हैं। फिर घर आकर सात्विक भोजन तैयार करती हैं, जो पूरी तरह शुद्ध और बिना लहसुन-प्याज का होता है।
यह दिन आत्मशुद्धि और व्रत की मानसिक तैयारी का प्रतीक है। दिल्ली, पटना, लखनऊ, कोलकाता, और मुंबई समेत देश के कई हिस्सों में छठ घाटों की सजावट पूरी हो चुकी है। जगह-जगह सफाई और लाइटिंग की व्यवस्था की गई है ताकि श्रद्धालु सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित कर सकें।
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दूसरा दिन खरना: तपस्या और भक्ति का दिन
नहाय-खाय के अगले दिन यानी 26 अक्टूबर को खरना मनाया जाएगा। यह दिन छठ व्रत का सबसे कठिन और पवित्र चरण होता है। व्रती पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को गुड़ की खीर, रोटी और फल का प्रसाद बनाकर सूर्यदेव को अर्पित करती हैं। इसके बाद वही प्रसाद ग्रहण करती हैं।
खरना का प्रसाद न सिर्फ व्रती के लिए पवित्र माना जाता है बल्कि पूरे परिवार और आसपास के लोगों के बीच इसे बांटने की परंपरा है। इस दिन की भक्ति और सादगी पूरे माहौल को आध्यात्मिक बना देती है। कई जगह भक्त छठ गीत गाकर भगवान सूर्य और छठ माई की आराधना करते हैं।
तीसरा दिन: डूबते सूर्य को अर्घ्य
27 अक्टूबर को व्रती महिलाएं और पुरुष डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे। यह छठ पर्व का सबसे भावनात्मक क्षण होता है। घाटों पर लाखों श्रद्धालु परिवार सहित पहुंचते हैं और अस्ताचलगामी सूर्य को जल अर्पित करते हैं।
शाम होते ही पूरे घाटों पर दीपों की रोशनी और भक्ति गीतों की गूंज सुनाई देती है। सूर्यदेव को जल चढ़ाने के साथ ही व्रती अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करती हैं। यह क्षण प्रकृति, परिवार और आध्यात्मिकता के अद्भुत संगम का प्रतीक है।
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चौथा दिन: उगते सूर्य को अर्घ्य और व्रत का समापन
28 अक्टूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ Chhath Puja 2025 का समापन होगा। यह अंतिम चरण सबसे शुभ माना जाता है क्योंकि व्रती उगते सूर्य की पूजा कर अपने चार दिन के कठोर व्रत को पूर्ण करती हैं।
अर्घ्य के बाद व्रती प्रसाद वितरण करती हैं और अपने प्रियजनों का आशीर्वाद लेती हैं। इस दिन हर घर में प्रसाद जैसे थेका, ठेकुआ, फल और नारियल का वितरण किया जाता है। यह पर्व सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि परिवार, शुद्धता और पर्यावरण के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
छठ पूजा 2025: परंपरा, पर्यावरण और नई पीढ़ी
आज जब आधुनिकता की दौड़ तेज हो रही है, तब भी Chhath Puja 2025 यह दिखाता है कि परंपराएं कैसे समाज को जोड़ती हैं। यह त्योहार न केवल सूर्यदेव की उपासना का पर्व है बल्कि जल, वायु और प्रकृति के संरक्षण का संदेश भी देता है।
नई पीढ़ी भी सोशल मीडिया पर #ChhathPuja2025 और #ChhathVrat जैसे ट्रेंड्स के जरिए इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है। भारत ही नहीं, नेपाल, मॉरीशस और दुनिया के कई देशों में बसे भारतीय समुदाय भी इस पर्व को पूरे उत्साह के साथ मना रहे हैं।
Disclaimer: यह लेख धार्मिक और सांस्कृतिक जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की धार्मिक मान्यता या प्रथा पर टिप्पणी करना नहीं है। पाठक स्थानीय परंपराओं और विश्वसनीय स्रोतों के अनुसार पूजा-व्रत का पालन करें।