Kushinagar murder case कुशीनगर में RSS नेता के बेटे उत्कर्ष सिंह की निर्मम हत्या, गांव में तनाव और प्रशासन अलर्ट
घटना का संक्षिप्त विवरण
Kushinagar murder case उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के सेमरा गांव में शुक्रवार (30 अगस्त 2025) की शाम एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई। यहां 40 वर्षीय उत्कर्ष सिंह, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के जिला सह-संघचालक इंद्रजीत सिंह के पुत्र थे, की पशु चराने को लेकर हुए विवाद में निर्मम हत्या कर दी गई। उत्कर्ष अखिल भारतीय गहरवार क्षत्रिय महासभा के जिला संगठन मंत्री भी थे।
ग्रामीणों के अनुसार, विवाद के दौरान हमलावरों ने उन्हें लाठी-डंडों, फरसे और धारदार हथियारों से बेरहमी से पीटा। उनकी आंखें चोट दी गईं, कान काट दिए गए और गले पर गंभीर वार कर मौके पर ही मौत हो गई।
विवाद की जड़ Kushinagar murder case
इसे भी पढ़ें गोरखपुर साइबर अपराधियों ने डॉक्टर को बनाया शिकार

स्थानीय लोगों का कहना है, कि उत्कर्ष सिंह अपने खेत में मवेशियों को चरने से रोक रहे थे। इस बीच गांव के कुछ दबंगों के पशु खेत में घुस गए। उत्कर्ष ने विरोध किया तो कहासुनी मारपीट में बदल गई और देखते ही देखते विवाद ने हिंसक रूप ले लिया।
हत्या के बाद आरोपी शव के पास ही बैठे रहे और पुलिस आने तक वहां से हटे नहीं। इस घटना से ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया
आरोपी कौन हैं?
मृतक के परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने चार लोगों को नामजद किया है। ये सभी कन्हई यादव के बेटे बताए जा रहे हैं।
1. सच्चिदानंद यादव
2. श्रीनिवास यादव
3. देवेंद्र यादव
4. ज्ञान यादव
पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से फरार है।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए।
FIR दर्ज: हत्या और अन्य धाराओं में केस दर्ज।
गिरफ्तारी: तीन आरोपी पकड़े गए, चौथा फरार।
फॉरेंसिक जांच: घटनास्थल से हथियार और खून के नमूने लिए गए।
अतिरिक्त पुलिस बल: गांव में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई।
परिजनों और ग्रामीणों की प्रतिक्रिया
हत्या के बाद पूरे गांव में गुस्से का माहौल है। परिजनों और ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया। उनकी मांग है कि:
दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
परिवार को आर्थिक मदद और सुरक्षा दी जाए।
जांच प्रक्रिया तेजी से पूरी हो।
काफी देर तक वार्ता चलने के बाद प्रशासन के आश्वासन पर परिजनों ने अंतिम संस्कार किया।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएँ
यह हत्या सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं रही, बल्कि कानून व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर गई।
राजनीतिक नेताओं ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर न्याय दिलाने का आश्वासन दिया।
सामाजिक संगठनों ने भी घटना की निंदा की और त्वरित कार्रवाई की मांग की।
स्थानीय लोगों का कहना है, कि गांव में पहले भी छोटे विवाद होते रहे हैं, लेकिन इतनी क्रूर घटना पहली बार हुई है।
घटना का प्रभाव
इस निर्मम हत्या ने गांव और आसपास के इलाके में भय का माहौल पैदा कर दिया है। लोग खेतों में काम करने और अकेले निकलने से भी डर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब एक संगठन से जुड़े व्यक्ति को इस तरह मार दिया गया, तो आम जनता कितनी असुरक्षित है, यह सवाल बड़ा है।
प्रशासन का आश्वासन Kushinagar murder case
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि:
दोषियों पर जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
पीड़ित परिवार को हर संभव मदद दी जाएगी।
फरार आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
समाज में उठ रहे सवाल Kushinagar murder case
1. दबंगई पर रोक कब लगेगी? – ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से दबंगों का आतंक है, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं होती।
2. न्याय कितनी जल्दी मिलेगा? – परिवार को डर है कि लंबी कानूनी प्रक्रिया न्याय में बाधा बनेगी।
3. आम जनता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? – लोगों का कहना है कि प्रशासन को जमीनी स्तर पर अधिक सख्त होना पड़ेगा।
निष्कर्ष Kushinagar murder case
कुशीनगर की यह घटना एक परिवार की त्रासदी भर नहीं है, बल्कि समाज और प्रशासन दोनों के लिए बड़ा सवाल है। उत्कर्ष सिंह की हत्या यह दिखाती है, कि किस तरह मामूली विवाद भी खतरनाक रूप ले सकता है।
अब जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की है, कि वे दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करें और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाएं। यदि इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह सिर्फ कुशीनगर ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल में असुरक्षा और आक्रोश की भावना को जन्म दे सकता है।
+ There are no comments
Add yours