Digital Arrest Scam in Gorakhpur में डॉक्टर को साइबर ठगों ने बनाया शिकार, ATS अधिकारी बनकर किया डिजिटल अरेस्ट पुलिस की तत्परता से बची बड़ी ठगी
Digital Arrest Scam in Gorakhpur गोरखपुर। साइबर अपराध की घटनाएँ दिन-ब-दिन तेजी से बढ़ रही हैं और अपराधी लगातार नए-नए हथकंडे अपनाकर आम लोगों को निशाना बना रहे हैं। ताजा मामला गोरखपुर जिले के सहजनवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से सामने आया है, जहाँ अधीक्षक डॉ. व्यास कुशवाहा को ठगों ने फर्जी कॉल करके ATS अधिकारी बनकर डराया और “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर फँसाने की कोशिश की।
यह घटना न केवल डॉक्टर और स्वास्थ्य विभाग को हिलाकर रख देने वाली है, बल्कि आम जनता के लिए भी चेतावनी है, कि कैसे ठग अब आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर लोगों को फर्जीवाड़े में फँसा रहे हैं।
कैसे शुरू हुई घटना?Digital Arrest Scam in Gorakhpur

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डॉ. व्यास कुशवाहा को अचानक फोन पर कॉल आया। दूसरी ओर से खुद को एटीएस (Anti Terrorist Squad) का अधिकारी बताने वाले शख्स ने कहा कि उनका नाम आतंकवादियों और पाकिस्तान से जुड़े लोगों के संपर्क में पाया गया है।
डॉक्टर को पहले तो यह मजाक लगा, लेकिन कुछ ही देर में कॉल करने वाले ने गंभीर लहजा अपनाते हुए कहा कि उनकी गतिविधियाँ संदिग्ध हैं, और उन्हें तुरंत पूछताछ के लिए “डिजिटल अरेस्ट” किया जा रहा है।
“डिजिटल अरेस्ट” यानी फोन और वीडियो कॉल पर घंटों निगरानी रखते हुए मानसिक दबाव डालना। ठग ने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, डॉक्टर अपने घर से बाहर नहीं जा सकते और उन्हें लगातार ऑनलाइन रहना होगा।
डॉक्टर पर कैसे बनाया गया दबाव?
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साइबर ठगों ने डॉक्टर से कहा कि उनके नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग का संदेह है।
उन्हें बार-बार धमकी दी गई कि अगर सहयोग नहीं किया तो उन पर UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया जाएगा।
ठग लगातार कॉल पर बने रहे और डॉक्टर को बाहर किसी से बात करने से भी मना किया।
उद्देश्य यह था कि डॉक्टर डर के साए में आकर अपनी बैंक डिटेल्स और पैसों का लेन-देन करें।
पुलिस प्रशासन की भूमिका Digital Arrest Scam in Gorakhpur
जैसे ही घटना की जानकारी पुलिस तक पहुँची, साइबर क्राइम थाना और गोरखपुर पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया।
डॉक्टर को समझाया गया कि यह पूरी तरह साइबर ठगी का नया हथकंडा है।
तत्काल मामले की रिपोर्ट दर्ज की गई और कॉल करने वालों के आईपी एड्रेस और मोबाइल नंबर ट्रेस किए गए।
साइबर सेल ने कॉल रिकॉर्डिंग और नंबर को तकनीकी जांच के लिए भेजा।
पुलिस का कहना है, कि यह गिरोह विदेश से संचालित हो सकता है, क्योंकि इस तरह के कॉल अक्सर दुबई, हांगकांग और पाकिस्तान से आने की पुष्टि पहले भी हो चुकी है।
अपराधियों की डिटेल और तरीका Digital Arrest Scam in Gorakhpur
जांच में यह सामने आया है,कि साइबर ठग एक अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय गैंग का हिस्सा हैं। इनके काम करने का तरीका तयशुदा है:
1. पहले किसी भी व्यक्ति को फोन करके पुलिस, CBI, NIA या ATS का अधिकारी बनते हैं।
2. उसके खिलाफ फर्जी कूरियर, मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स केस बताकर डराते हैं।
3. फिर कहते हैं, कि जांच पूरी होने तक पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट किया जाएगा।
4. इसके बाद वीडियो कॉल पर नजर रखते हैं, और धीरे-धीरे पैसों का ट्रांसफर कराते हैं।
अन्य शहरों में भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएँ
यह पहली बार नहीं है, कि गोरखपुर में ऐसा मामला सामने आया हो।
इसी साल एक सेवानिवृत्त शिक्षक से 14 लाख रुपये की ठगी की गई थी।
लखनऊ में एक रिटायर्ड वैज्ञानिक से 1.29 करोड़ रुपये हड़प लिए गए।
गुजरात में एक महिला डॉक्टर को तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 19 करोड़ रुपये तक का नुकसान कराया गया।
ये घटनाएँ बताती हैं, कि अपराधियों का जाल पूरे देशभर में फैला हुआ है, और इनकी निगरानी करना आसान नहीं है।
क्या कहती है पुलिस?
गोरखपुर एसएसपी का बयान Digital Arrest Scam in Gorakhpur
“यह मामला बेहद गंभीर है। साइबर ठग अब लोगों को आतंकवाद और सुरक्षा एजेंसियों के नाम पर फँसा रहे हैं। हमने पीड़ित डॉक्टर को सुरक्षित किया है,और उनके साथ कोई आर्थिक नुकसान नहीं हुआ। गैंग के नंबर और आईडी ट्रेस किए जा रहे हैं। साइबर क्राइम टीम ने जांच तेज़ कर दी है, और जल्द ही बड़ी कार्रवाई होगी।”
डिजिटल अरेस्ट से बचाव के उपाय
किसी भी अपरिचित कॉल पर अपनी बैंक डिटेल, आधार या ओटीपी शेयर न करें।
अगर कोई खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर कॉल करे, तो तुरंत स्थानीय पुलिस से संपर्क करें।
साइबर ठगी की शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन नंबर और cybercrime.gov.in पोर्टल पर रिपोर्ट करें।
घर के बुजुर्गों और पढ़े-लिखे लोगों को इस नए अपराध के बारे में जागरूक करें।
निष्कर्ष
गोरखपुर में डॉक्टर व्यास कुशवाहा के साथ हुई यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है,कि साइबर अपराध अब सिर्फ पैसों की ठगी तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि अपराधी आतंकवाद और कानून का डर दिखाकर भी लोगों को जाल में फँसा रहे हैं।
पुलिस प्रशासन की सक्रियता से डॉक्टर किसी बड़े आर्थिक नुकसान से बच गए, लेकिन यह घटना पूरे समाज के लिए चेतावनी है, कि अगर जागरूकता नहीं बढ़ाई गई तो ठग किसी को भी अपना शिकार बना सकते हैं।
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