Gorakhpur ki Beti HongKong Wrestling 2025 Winner गोरखपुर की धरती पर जन्मी ‘शेरनी’ ने रचा इतिहास, हॉन्गकॉन्ग में लहराया भारत का परचम

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Gorakhpur ki Beti HongKong Wrestling 2025 Winner गोरखपुर की धरती पर जन्मी ‘शेरनी’ ने रचा इतिहास, हॉन्गकॉन्ग में लहराया भारत का परचम

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

Gorakhpur ki Beti जहां एक ओर बड़े शहरों की चकाचौंध में प्रतिभाएं तराशी जाती हैं, वहीं गोरखपुर के खजनी क्षेत्र के छोटे से गांव जमौली बुजुर्ग की एक बेटी ने साबित कर दिया कि असली चमक संघर्ष की भट्टी से निकलती है। अंशिका यादव, महज 17 वर्ष की इस बेटी ने हॉन्गकॉन्ग चाइना इंटरनेशनल रेसलिंग चैंपियनशिप 2025 में 73 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर दुनिया को हैरान कर दिया।

 हॉन्गकॉन्ग से उठी भारत माता की जयकार

प्रतियोगिता का आयोजन हॉन्गकॉन्ग में बड़े धूमधाम से किया गया, जहां अलग-अलग देशों से आई पहलवानों ने हिस्सा लिया। लेकिन जब फाइनल मुकाबले में अंशिका ने विपक्षी खिलाड़ी को अपने जबरदस्त दाव से पटकनी देकर चित कर दिया चीत करते ही पूरे स्टेडियम में भारत माता का जयकारा गुज उठा वह पल सिर्फ अंशिका का नहीं बल्कि हर उस भारत की बेटी का था जो गांव छोटे कस्बे से बड़े ख्वाब देती है।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

कुश्ती क्वीन अंशिका का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। सीमित संसाधन, ग्रामीण परिवेश, और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। गोरखपुर के स्वर्गीय श्री ज्ञान सिंह व्यायामशाला में उन्होंने कुश्ती के हर हुनर सीखे, और कोच श्याम पाल ने उन्हें तकनीक, धैर्य और आत्मबल से परिचित कराया।

उनकी मेहनत को देखकर गोरखपुर कुश्ती संघ के अध्यक्ष श्री दिनेश सिंह ने भी उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया। जब JWS बेंगलुरु की टीम ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए नामित किया, तब अंशिका ने अपने हुनर से इस मौके को स्वर्णिम सफलता में बदल दिया।

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Gorakhpur ki Beti
सोर्स बाय गूगल इमेज

Gorakhpur ki Beti मैट पर शेरनी की तरह उतरी अंशिका

प्रतियोगिता में अंशिका का आत्मविश्वास देखते ही बनता था। वह मैट पर जैसे ही, उतरीं, उनकी नजरों में केवल जीत की चमक थी। उन्होंने एक-एक करके सभी प्रतिद्वंद्वियों को अपने विशेष दांवों और धोबी पछाड़, उल्टा पंजा और पंजाबी पटखनी से परास्त कर दिया।

हर राउंड के बाद उनका आत्मबल और मजबूत होता गया, और फाइनल में उन्होंने साबित कर दिया कि असली ताकत जिम की मशीनों से नहीं, खेतों की मिट्टी से निकलती है।

  Gorakhpur ki Beti गांव में जश्न का माहौल

जैसे ही खबर गांव पहुंची, जमौली बुजुर्ग में जश्न का माहौल छा गया। मंदिरों में घंटियां बजीं, लोगों ने मिठाइयां बांटीं और पूरे गांव ने मिलकर बेटी के सम्मान में जयघोष किया।

बच्चे ‘अंशिका दीदी जिंदाबाद’ के नारे लगाते दिखे। बुजुर्गों की आंखों में गर्व के आंसू थे। यह जीत सिर्फ पदक की नहीं, बल्कि हर ग्रामीण परिवार की आशा और आत्मबल की जीत थी।

  Gorakhpur ki Beti गोरखपुर की शेरनी’ बनी नई पहचान

अब देश की शान अंशिका को ‘गोरखपुर की शेरनी’ के नाम से जाना जा रहा है। मीडिया चैनल, खेल विशेषज्ञ और सोशल मीडिया सभी पर उनकी तारीफ हो रही है। ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर #AnshikaYadav और #PrideOfGorakhpur ट्रेंड कर रहे हैं।

कोच बोले – “ये तो शुरुआत है”

कोच श्याम पाल ने कहा –

Gorakhpur ki Beti अंशिका में वो फौलादी हौसला है, जो सिर्फ खिलाड़ी नहीं, चैंपियन बनाता है। हमने शुरू से देखा है, वो लड़ती नहीं, ‘लड़ाई को जीती है।’ ये गोल्ड सिर्फ एक शुरुआत है, अभी ओलंपिक का रास्ता खुला पड़ा है।

अब नजर ओलंपिक और एशियन गेम्स पर

गोल्डन गर्ल अंशिका की नजरें अब और ऊंचे लक्ष्यों पर हैं। उन्होंने खुद कहा

मैं चाहती हूं कि भारत का झंडा ओलंपिक में भी सबसे ऊपर लहराए। मुझे वहां तक पहुंचना है।

सरकार और खेल मंत्रालय से अब उन्हें बेहतर ट्रेनिंग, उपकरण और अवसर की जरूरत है, ताकि यह युवा खिलाड़ी भविष्य में ओलंपिक और एशियन गेम्स में भी भारत को गौरवान्वित कर सके।

 हर बेटी के लिए बनी प्रेरणा

मिट्टी से मैट तक अंशिका की सफलता केवल व्यक्तिगत नहीं है, यह हर उस बेटी के लिए प्रेरणा है जो समाज की बेड़ियों को तोड़कर कुछ कर दिखाना चाहती है। वह संदेश है

सपने देखने की हिम्मत करो, मेहनत की मशाल से उन्हें रोशन करो, और एक दिन वो हकीकत जरूर बनते हैं।

Gorakhpur ki Beti सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया

एक यूज़र ने लिखा: गांव की बेटी से इंटरनेशनल गोल्ड मेडलिस्ट! अंशिका तुमने हम सबका सिर ऊंचा कर दिया।

दूसरा कमेंट: ये सिर्फ पदक नहीं, भारत की बेटियों की शक्ति का प्रमाण है।

 जब इरादे हो फौलादी, तो दुनिया झुकती है

गोरखपुर की इस होनहार बेटी ने एक बार फिर यह सिखा दिया कि अगर जज्बा हो, तो कोई भी मंच बड़ा नहीं।

अंशिका यादव की यह जीत सिर्फ गोरखपुर की नहीं, पूरे भारत की जीत है।

उनकी कहानी हमें यह भी बताती है, कि बेटियाँ बोझ नहीं, बदलाव की आधारशिला हैं।

Gorakhpur ki Beti आज उनका नाम हॉन्गकॉन्ग से लेकर हर भारतीय के दिल तक गूंज रहा है, और कल वह शायद ओलंपिक की पोडियम पर खड़ी होकर भारत के लिए राष्ट्रगान सुनें – यही सपना है, और यही उम्मीद।

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