Gorakhpur Power Corporation Scam: रिटायरमेंट से पहले सहायक लेखाधिकारी बर्खास्त, करोड़ों के गबन में दोष सिद्ध

Written by: akhtar husain

Published on:

Google News
Follow Us

Gorakhpur Power Corporation Scam रिटायरमेंट से ठीक एक दिन पहले गिरी गाज, 1.69 करोड़ के गबन में बिजली निगम का सहायक लेखाधिकारी बर्खास्त

Gorakhpur Power Corporation Scam में बड़ा एक्शन, 1.69 करोड़ के गबन में बिजली निगम के सहायक लेखाधिकारी को रिटायरमेंट से एक दिन पहले बर्खास्त, जुर्माना भी लगा

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से सामने आई यह खबर सरकारी सिस्टम में जवाबदेही और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती की एक बड़ी मिसाल बन गई है। बिजली निगम ने ऐसा फैसला लिया है, जिसने यह साफ कर दिया कि सेवा निवृत्ति किसी भी कर्मचारी को भ्रष्टाचार से बचा नहीं सकती। Gorakhpur Power Corporation Scam के तहत बिजली निगम के सहायक लेखाधिकारी ईशपाल सिंह को रिटायरमेंट से महज एक दिन पहले नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। उन पर 1.69 करोड़ रुपये से अधिक के गबन का आरोप सिद्ध पाया गया है। इसके साथ ही उन पर 11 लाख रुपये से ज्यादा का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है।

ईशपाल सिंह वर्तमान में गोरखपुर जिले के उप मुख्य लेखाधिकारी कार्यालय, क्षेत्र प्रथम से संबद्ध थे और उनकी सेवानिवृत्ति 31 दिसंबर 2025 को तय थी। लेकिन निगम ने 30 दिसंबर को ही अंतिम आदेश जारी करते हुए उन्हें सेवा से बाहर का रास्ता दिखा दिया। यह फैसला न सिर्फ विभागीय हलकों में चर्चा का विषय बना, बल्कि इसे Gorakhpur Power Corporation Scam में अब तक की सबसे सख्त विभागीय कार्रवाई माना जा रहा है।

Gorakhpur Power Corporation Scam: रिटायरमेंट से पहले सहायक लेखाधिकारी बर्खास्त, करोड़ों के गबन में दोष सिद्ध
Gorakhpur Power Corporation Scam: रिटायरमेंट से पहले सहायक लेखाधिकारी बर्खास्त, करोड़ों के गबन में दोष सिद्ध

2016 से जुड़ा है पूरा मामला

इस केस की जड़ें वर्ष 2016 में बागपत जिले से जुड़ी हैं। उस समय ईशपाल सिंह विद्युत वितरण खण्ड, बागपत में सहायक लेखाधिकारी (राजस्व) के पद पर तैनात थे। आरोप है,कि फरवरी 2016 से मई 2018 के बीच उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए विभागीय कर्मचारियों के साथ मिलकर ऑनलाइन बिलिंग सिस्टम में भारी गड़बड़ी की। इसी दौरान करोड़ों रुपये का सरकारी धन गबन कर लिया गया, जो आगे चलकर Gorakhpur Power Corporation Scam के रूप में सामने आया।

ऑनलाइन बिलिंग सिस्टम बना गबन का जरिया

जांच में सामने आया कि गबन की यह रकम HCL और M-Power (Fluent Grid) जैसे ऑनलाइन बिलिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्राप्त हुई थी। आरोप है,कि ईशपाल सिंह ने बिलिंग क्लर्क सुरेश बाबू और रोकड़िया के साथ मिलीभगत कर भुगतान की राशि को सरकारी खाते में जमा न कराकर निजी तौर पर हड़प लिया। कुल 1,69,52,473 रुपये की धनराशि का गबन किया गया। इसके अलावा 25 रसीद बुक भी विभाग को वापस नहीं की गईं, जो गंभीर वित्तीय अनियमितता को दर्शाता है।

यही कारण है,कि Gorakhpur Power Corporation Scam को केवल एक साधारण विभागीय गलती नहीं, बल्कि सुनियोजित वित्तीय अपराध माना गया।

निलंबन, तबादला और लंबी जांच

मामला उजागर होने के बाद ईशपाल सिंह को निलंबित कर वाराणसी मुख्यालय से संबद्ध किया गया। बाद में उनका तबादला गोरखपुर कर दिया गया, जहां वे उप मुख्य लेखाधिकारी कार्यालय क्षेत्र प्रथम में कार्यरत रहे। इस दौरान विभागीय जांच लगातार चलती रही। वर्ष 2023 में जांच रिपोर्ट के आधार पर निगम ने उन्हें बर्खास्त कर दिया था, जिससे यह मामला Gorakhpur Power Corporation Scam के रूप में और मजबूत हुआ।

हालांकि, जनवरी 2024 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले में पुनः जांच के आदेश देते हुए उन्हें सशर्त बहाल किया और निलंबन में रखने का निर्देश दिया। इसके बाद पूरे मामले की जिम्मेदारी जिले के मुख्य अभियंता आशुतोष श्रीवास्तव को सौंपी गई।

पुनः जांच में फिर साबित हुआ दोष

मुख्य अभियंता द्वारा की गई विस्तृत जांच में भी ईशपाल सिंह पर लगे सभी आरोप सही पाए गए। दस्तावेजी सबूत, वित्तीय रिकॉर्ड और विभागीय रिपोर्ट्स के आधार पर यह साफ हो गया कि गबन जानबूझकर और योजनाबद्ध तरीके से किया गया था। जांच रिपोर्ट ने Gorakhpur Power Corporation Scam में निगम के लिए निर्णायक आधार तैयार कर दिया।

रिपोर्ट मिलने के बाद निदेशक (कार्मिक प्रबंधन एवं प्रशासन) डॉ. जान मथाई ने 30 दिसंबर को अंतिम आदेश जारी करते हुए ईशपाल सिंह को सेवा से बर्खास्त कर दिया। साथ ही 11,06,457 रुपये की धनराशि जुर्माने के रूप में वसूलने का आदेश भी दिया गया।

रिटायरमेंट से पहले कार्रवाई ने दिया कड़ा संदेश

यह कार्रवाई इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि अक्सर देखा जाता है, कि कर्मचारी सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचकर विभागीय कार्रवाई से बच जाते हैं। लेकिन Gorakhpur Power Corporation Scam में लिया गया यह फैसला बताता है,कि अब सिस्टम में “आखिरी दिन” का कोई सहारा नहीं मिलेगा।

बिजली निगम के अधिकारियों का कहना है, कि यह निर्णय भविष्य में भ्रष्टाचार करने वालों के लिए चेतावनी है। सरकारी धन के दुरुपयोग पर चाहे वह कर्मचारी सेवा में हो या रिटायरमेंट की दहलीज पर कार्रवाई तय है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती का संकेत

विशेषज्ञों का मानना है,कि यह केस उत्तर प्रदेश में सरकारी विभागों में वित्तीय पारदर्शिता को लेकर एक अहम उदाहरण बनेगा। Gorakhpur Power Corporation Scam ने यह दिखा दिया कि तकनीक के जरिए किए गए गबन भी अब जांच से नहीं बच सकते। ऑनलाइन बिलिंग और डिजिटल सिस्टम में हुई अनियमितताओं पर भी अब बारीकी से नजर रखी जा रही है।

आगे भी हो सकती है कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार, इस मामले से जुड़े अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है। यदि उनकी संलिप्तता पाई जाती है तो Gorakhpur Power Corporation Scam में और भी कार्रवाई संभव है। विभाग अब ऐसे मामलों में “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाने की तैयारी में है।

डिस्क्लेमर यह समाचार रिपोर्ट उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों, विभागीय आदेशों, जांच रिपोर्ट्स और विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। लेख में उल्लिखित सभी आरोप संबंधित विभागीय व न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। इसका उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है, न कि किसी व्यक्ति, संस्था या विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाना। किसी भी अंतिम निष्कर्ष या कानूनी निर्णय के लिए पाठक संबंधित न्यायालय अथवा अधिकृत प्राधिकरण के आदेशों पर ही भरोसा करें।

इसे भी पढ़ें गोरखपुर में बढ़ता अपराध: Gorakhpur Crime Rate ने बढ़ाई चिंता, हर महीने औसतन पांच हत्याएँ

akhtar husain

न्यूज़ दिल से भारत के पाठकों से अनुरोध है कि अगर आप सच्ची और अच्छी ख़बरें पढ़ना चाहते हैं तो न्यूज़ दिल से भारत को सहयोग करें ताकि निष्पक्ष पत्रकारिता करने में हमारे सामने जो बाधाये आती है हम उनको पार कर सके सच्ची और अच्छी खबरें आप तक पहुंचा सके

For Feedback - newsdilsebharat@gmail.com

Related News