Gorakhpur land dispute 2025 गोरखपुर में जमीन विवाद और पूर्व विधायक का स्मारक: क्यों गरमा गया माहौल

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Gorakhpur land dispute 2025 गोरखपुर में जमीन विवाद और पूर्व विधायक का स्मारक: क्यों गरमा गया माहौल

Gorakhpur land dispute 2025 गोरखपुर में पूर्व विधायक केदारनाथ सिंह की जमीन और स्मारक पर प्रशासन व समर्थकों में टकराव, पुलिस हिरासत और राजनीतिक असर जानें विस्तार से।

गोरखपुर इन दिनों सिर्फ अपने धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए ही नहीं, बल्कि एक बड़े विवाद की वजह से भी चर्चा में है। यह विवाद जुड़ा है पूर्व विधायक स्व. केदारनाथ सिंह की जमीन और उनकी प्रतिमा से। प्रशासन और समर्थकों के बीच टकराव इतना गहरा गया कि पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और दर्जनों लोगों को हिरासत में लेना पड़ा। सवाल यह है, कि यह विवाद केवल एक स्मारक तक सीमित है, या इसके पीछे कहीं गहरी राजनीति और सामाजिक समीकरण छिपे हैं?

घटना की शुरुआत: स्मारक हटाने पर विरोध

Gorakhpur land dispute 2025
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26 अगस्त 2025 की सुबह, गोरखपुर के गोलघर पार्क रोड इलाके में माहौल अचानक गर्म हो गया। प्रशासनिक टीम वहां एक कार्रवाई के लिए पहुंची थी। मामला था जमीन पर बने स्मारक और प्रतिमा को हटाने का। जैसे ही जेसीबी और पुलिस बल वहां पहुंचा, समर्थकों ने इसका जोरदार विरोध शुरू कर दिया।

नारेबाजी, धक्का-मुक्की और सड़क जाम की स्थिति पैदा हो गई। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया और पुलिस ने हालात काबू में करने के लिए 36 लोगों को हिरासत में ले लिया।

जमीन का मालिकाना हक: विवाद की असली जड़

“Gorakhpur land dispute 2025” यह विवाद किसी साधारण जमीन पर नहीं है। समर्थकों का कहना है कि यह जमीन सरकार ने स्वतंत्रता संग्राम के बाद 99 साल की लीज पर स्व. केदारनाथ सिंह को दी थी। परिवार का आरोप है,कि अब प्रशासन और कुछ लोग मिलकर फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर उन्हें बेदख़ल करने की कोशिश कर रहे हैं।

दूसरी ओर प्रशासन का दावा है, कि जमीन सरकारी रिकॉर्ड में निजी स्वामित्व के नाम पर दर्ज नहीं है। यही वजह है, कि इसे अतिक्रमण मानकर कार्रवाई की जा रही है।

यहां से विवाद केवल “जमीन बनाम अतिक्रमण” तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भावनाओं और सम्मान से जुड़ गया।

समर्थकों का आक्रोश और संगठन की भूमिका

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“Gorakhpur land dispute 2025” प्रदर्शन का नेतृत्व सैंथवार मल्ल महासभा के पदाधिकारियों ने किया। संगठन के अध्यक्ष गंगा सिंह सैंथवार और उनके साथ आए कार्यकर्ताओं ने साफ कहा कि स्मारक हटाना सिर्फ एक राजनीतिक साज़िश है।

उनका तर्क था कि केदारनाथ सिंह सिर्फ एक विधायक नहीं थे बल्कि इलाके की पहचान और सम्मान का प्रतीक थे। उनकी प्रतिमा हटाना उनके समर्थकों और समाज की अस्मिता पर चोट जैसा है।

पुलिस और प्रशासन की कार्यवाही “Gorakhpur land dispute 2025”

घटनास्थल पर पुलिस ने मोर्चा संभाला। SP सिटी अभिनव त्यागी, ADM सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे।

सड़क पर जाम लग गया था, जिसे डायवर्ट करना पड़ा।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने और भीड़ नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया।

36 समर्थकों को हिरासत में लिया गया और पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया।

प्रशासन ने चेतावनी दी कि अगर भविष्य में कानून हाथ में लिया गया तो कठोर कार्रवाई होगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का रुख “Gorakhpur land dispute 2025”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में अपने जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान जमीन विवादों पर कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा:

कोई भी ताकतवर व्यक्ति गरीब और कमजोर का हक़ नहीं छीन सकता। ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई होगी।”

CM का यह बयान साफ संकेत देता है,कि सरकार जमीन विवादों में किसी भी तरह के दबाव में आने को तैयार नहीं है। हालांकि यह भी सवाल उठता है, कि जब मामला पूर्व विधायक के सम्मान से जुड़ा है तो क्या कोई बीच का रास्ता निकल सकता है?

  “Gorakhpur land dispute 2025”सामाजिक और राजनीतिक समीकरण

गोरखपुर, जहां मुख्यमंत्री का खुद का गढ़ है, वहां इस तरह की घटना का होना कई संकेत देता है:

राजनीतिक प्रतीकवाद स्मारक और प्रतिमा राजनीति में सिर्फ यादगार नहीं बल्कि पहचान का प्रतीक होती हैं। उन्हें हटाना समाज के एक वर्ग के लिए अपमान की तरह माना जाता है।

2. जातीय और सामाजिक समीकरण सैंथवार समाज इस इलाके में प्रभावशाली है। ऐसे में उनके विरोध को नज़रअंदाज़ करना आसान नहीं है।

3. प्रशासन की चुनौती – अतिक्रमण हटाना सरकार की प्राथमिकता है, लेकिन अगर यह राजनीतिक या भावनात्मक मुद्दा बन जाए तो हालात बिगड़ सकते हैं।

  “Gorakhpur land dispute 2025” मीडिया और जनता की नज़र

इस विवाद ने मीडिया का भी ध्यान खींचा है। जहां कुछ रिपोर्टें प्रशासन की सख्ती को सही ठहरा रही हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय अखबार और सोशल मीडिया पर समर्थकों की भावनाएं सामने आ रही हैं।

लोग सवाल पूछ रहे हैं।

क्या सच में यह जमीन सरकारी है?

अगर यह निजी है,  तो प्रशासन क्यों कार्रवाई कर रहा है?

और अगर सरकारी है, तो इतने साल तक कोई सवाल क्यों नहीं उठा?

  “Gorakhpur land dispute 2025”आगे क्या?

फिलहाल मामला शांत जरूर हुआ है, लेकिन पूरी तरह सुलझा नहीं है। कुछ संभावनाएं साफ दिख रही हैं:

कानूनी लड़ाई परिवार और समर्थक कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

प्रशासनिक जांच उच्च अधिकारियों ने जमीन के रिकॉर्ड की जांच के आदेश दे दिए हैं।

राजनीतिक दबाव  Accept और स्थानीय संगठन इसे बड़ा मुद्दा बनाकर सरकार को घेर सकते हैं।

समाधान का रास्ता हो सकता है, कि दोनों पक्षों के बीच समझौता या वैकल्पिक व्यवस्था खोजी जाए।

निष्कर्ष

“Gorakhpur land dispute 2025” गोरखपुर का यह विवाद सिर्फ एक जमीन या स्मारक तक सीमित नहीं है। यह हमें दिखाता है, कि कैसे अतीत की विरासत, भावनाएं और राजनीति वर्तमान में टकरा सकती हैं। प्रशासन कानून के आधार पर कदम उठाना चाहता है, जबकि समर्थकों के लिए यह मामला सम्मान और पहचान का है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार और प्रशासन इस विवाद को सख्ती से निपटाते हैं,या फिर कोई ऐसा रास्ता निकालते हैं,जो समाज और कानून दोनों को संतुलित कर सके।

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