गोरखपुर ने खोया अपना साहित्यिक सितारा – मशहूर कवि अब्दुर्रहमान गेहुआंसागरी का निधन

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Abdurrahman Gehuansagari गोरखपुर ने खोया अपना साहित्यिक सितारा – मशहूर कवि अब्दुर्रहमान गेहुआंसागरी का निधन

Abdurrahman Gehuansagari गोरखपुर ने खोया अपना साहित्यिक सितारा – मशहूर कवि अब्दुर्रहमान गेहुआंसागरी का निधन गोरखपुर। जनपद के प्रसिद्ध कवि, लेखक और गीतकार अब्दुर्रहमान गेहुआंसागरी (81 वर्ष) का सोमवार रात 10:37 बजे निधन हो गया। उनके निधन की सूचना उनके सुपुत्र और फिल्म लेखक ओबैदुर्रहमान गेहुआंसागरी “बाबू भाई” ने दी। उनके निधन की खबर से साहित्य और कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

Abdurrahman Gehuansagari एक अनमोल साहित्यिक यात्रा

अब्दुर्रहमान गेहुआंसागरी मूल रूप से गेहुआं सागर (बड़गों) के रहने वाले थे। वर्तमान में वे संतकबीर पूरम (फुलवरिया) में रह रहे थे। लंबे समय से वे अस्वस्थ थे और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। लेकिन अपने जीवन के अंतिम दिनों तक भी वे साहित्य से जुड़े रहे।

Abdurrahman Gehuansagari  उन्होंने हिंदी और भोजपुरी साहित्य को कई यादगार रचनाएँ दीं। उनकी लेखनी में समाज की सच्चाइयों, मानवीय भावनाओं और जीवन के संघर्षों की झलक मिलती है। वे ऐसे साहित्यकार थे जिन्होंने अपनी रचनाओं से पीढ़ियों को प्रेरित किया।

उनकी प्रमुख रचनाएँ

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Abdurrahman Gehuansagariअब्दुर्रहमान जी ने गीत, गजल, कहानियाँ, उपन्यास और बाल साहित्य की कई अमूल्य कृतियाँ दीं।

गीत और कविताएँ

गीत मेरे आवाज़ तुम्हारी

पनिहारी, पनघट, गीतकलश, बोले बालम चिरई (भोजपुरी गीत)

उपन्यास और कहानियाँ

भटकती किरण (उपन्यास)

सिसकती आहटें (हिंदी कहानी)

बच्चों के लिए रचनाएँ

तितली, गुड़िया रानी, गुड़िया गुड्डा

हरसिंगार के फूल, रजनीगंधा (बाल कविताएँ)

खिसकती जमीन गीत, नन्हे गुलाब, नन्हे सिपाही (बाल गीत)

  Abdurrahman Gehuansagari    गजल संग्रह

मधु कलश (हिंदी गजल)

इन रचनाओं ने उन्हें एक ऐसे साहित्यकार के रूप में स्थापित किया, जिनकी लेखनी सरल, सजीव और जनमानस से जुड़ी रही।

साहित्य और कला जगत में गहरा शोक

उनके निधन की खबर से गोरखपुर और आसपास के कला एवं साहित्य प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई।

 Abdurrahman Gehuansagari  श्रद्धांजलि देने वालों में शामिल रहे –

वरिष्ठ रंगकर्मी बेचन सिंह, फिल्म लेखक-निर्देशक प्रदीप जायसवाल, देशबंधु पांडेय, कौशलेंद्र भूषण, बीएनए पासआउट धर्मेंद्र भारती, , राजू रोमन, संजू सोलंकी, संजू राज, अजय श्रीवास्तव, कवि-लेखक राजकुमार सिंह, दिवाकर यादव सहित कई अन्य साहित्यकारों और कलाकारों ने गहरा दुख प्रकट किया।

सभी ने एकमत से कहा कि अब्दुर्रहमान गेहुआंसागरी का जाना साहित्य जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

साहित्य जगत में उनका योगदान क्यों रहा खास?

Abdurrahman Gehuansagari  अब्दुर्रहमान गेहुआंसागरी की लेखनी सिर्फ शब्दों का मेल नहीं थी, बल्कि वह समाज की भावनाओं और यथार्थ का सजीव चित्रण थी। उनकी कविताएँ, गीत और गज़लें जीवन के हर पहलू को छूती थीं।

उनके गीतों में लोक-संस्कृति की सुगंध थी।

गज़लों में मानवीय भावनाओं की गहराई झलकती थी।

बाल साहित्य में मासूमियत और सीख का अद्भुत मेल था।

उनकी रचनाएँ आज भी पाठकों के दिलों में जिंदा हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी।

Abdurrahman Gehuansagari    कला प्रेमियों ने जताया दुख

युवा और वरिष्ठ साहित्यकारों ने कहा कि गेहुआंसागरी जी का जाना सिर्फ गोरखपुर ही नहीं, बल्कि पूरे हिंदी-भोजपुरी साहित्य जगत की बड़ी क्षति है।

“ऐसे शख्सियत कभी-कभी ही जन्म लेते हैं। उन्होंने अपने लेखन से समाज को दिशा दी और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित किया।”

एक अपूरणीय क्षति

अब्दुर्रहमान गेहुआंसागरी का निधन गोरखपुर की साहित्यिक धरोहर के लिए गहरा आघात है। उन्होंने अपने जीवन के 81 वर्षों में साहित्य को समर्पित किया और एक ऐसी विरासत छोड़ी जिसे भुलाया नहीं जा सकता।

उनका जाना न केवल साहित्यकारों के लिए बल्कि उन सभी पाठकों के लिए भी एक बड़ी क्षति है जो उनकी रचनाओं से प्रेरणा लेते रहे हैं।

 उनकी विरासत – हमेशा जिंदा रहेगी

Abdurrahman Gehuansagari   भले ही अब वे हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनकी कविताएँ, गीत, गज़लें और कहानियाँ आने वाले समय में भी लोगों के दिलों को छूती रहेंगी। उनका नाम हिंदी और भोजपुरी साहित्य के इतिहास में हमेशा अमर रहेगा।

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