Mau water shortage Ward 39 जनता पानी के लिए है त्रस्त, पालिका के अधिकारी हैं मस्त।

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Mau water shortage: योगीराज में मऊ के वार्ड 39 में पानी की किल्लत: जनता त्रस्त, अधिकारी बेफिक्र

Mau Water shortage उत्तर प्रदेश के Mau जिले में योगीराज की हकीकत कुछ और ही बयान कर रही है। जहां एक तरफ सरकार “हर घर जल” और विकास के दावे कर रही है, वहीं जमीनी स्तर पर जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रही है। नगरपालिका क्षेत्र के वार्ड नंबर 39, मलिक टोला की एक गली (डॉ. अंसारी के मकान के बगल वाली) में पिछले 18 दिनों से पानी की आपूर्ति ठप है।

यह समस्या किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि कई परिवारों की है, जो रोजमर्रा की जिंदगी में पानी के बिना परेशान हो रहे हैं। नगर पालिका के अधिकारी इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे, जबकि जल कल विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) पंकज वर्मा ने साफ-साफ कह दिया कि “आप अपना कनेक्शन खुद ठीक करवाओ, आपके पाइप में कचरा फंसा है।”

समस्या की जड़: पाइप में कचरा या प्रशासन की लापरवाही?

स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलापूर्ति पाइपलाइन गली के अंत में बंद है, जिससे कचरा निकलने का कोई रास्ता नहीं है। अगर कचरा फंसा भी है, तो यह पूरी गली की समस्या है, न कि व्यक्तिगत घरों की। जेई पंकज वर्मा का दावा है कि समस्या लोगों के निजी पाइपों में है और उन्हें खुद अपने खर्चे पर ठीक करवाना चाहिए। लेकिन हकीकत इससे अलग है। प्रभावित लोगों ने बताया कि उन्होंने अपने खर्चे पर पाइप साफ करवाए, फिर भी पानी की आपूर्ति बहाल नहीं हुई। जब निवासियों ने कहा कि यह नगर पालिका का काम है, तो जेई ने जवाब दिया, “नगर पालिका इसका जिम्मेदार नहीं है, खुद करवाओ।”

यह बात प्रशासन की जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने जैसी लगती है। उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं के तहत करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन ग्रामीण और शहरी इलाकों में पानी की समस्या आम है। मऊ जैसे जिले में, जहां गर्मी और सूखे की मार पहले से है, ऐसी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। निवासी बताते हैं कि पानी न होने से पीने, नहाने और घरेलू कामों में दिक्कत हो रही है। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

Mau Water

चेयरमैन की अनदेखी: “बात करता हूं” का वादा खोखला

मामले की गंभीरता को देखते हुए, स्थानीय चेयरमैन अरशद जमाल को दो बार सूचना दी गई। हर बार उनका जवाब एक ही था: “बात करता हूं।” लेकिन न तो उनकी बात अधिकारियों तक पहुंची, न ही कोई कार्रवाई हुई। यह सवाल उठाता है कि क्या उच्च स्तर पर भी समस्या को गंभीरता से लिया जा रहा है? मऊ नगर पालिका, जो जल आपूर्ति की जिम्मेदार है, क्यों चुप्पी साधे हुए है? क्या यह सिर्फ एक गली की समस्या है, या पूरे वार्ड में ऐसी शिकायतें आम हैं?

Mau Water shortage उत्तर प्रदेश में पानी की संकट

Mau Water shortage उत्तर प्रदेश में पानी की समस्या नई नहीं है। राज्य सरकार की रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई जिलों में पाइपलाइनें जर्जर हैं, और रखरखाव का अभाव है। जल जीवन मिशन के तहत लाखों कनेक्शन दिए गए, लेकिन कई जगहों पर पानी की आपूर्ति अनियमित है। मऊ जैसे पूर्वांचल इलाकों में, जहां भूजल स्तर गिर रहा है, ऐसी समस्याएं और गंभीर हो जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पाइपलाइनों में कचरा फंसना आम है, लेकिन इसका समाधान प्रशासन की जिम्मेदारी है, न कि निवासियों की। अगर पाइपलाइन का अंत बंद है, तो यह डिजाइन की खामी या रखरखाव की कमी दर्शाता है।

क्या करें प्रभावित निवासी?

अगर आप इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो निम्न कदम उठाएं:

  • शिकायत दर्ज करें: उत्तर प्रदेश जल निगम की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-180-0525 पर कॉल करें। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर भी शिकायत करें।
  • ऑनलाइन प्लेटफॉर्म: जल जीवन मिशन की वेबसाइट पर ऑनलाइन कंप्लेंट दर्ज करें।
  • मीडिया और सोशल मीडिया: स्थानीय अखबारों या X (ट्विटर) पर पोस्ट करें, और @UPGovt, @UPJalNigam, @myogioffice को टैग करें।
  • सामूहिक याचिका: सभी प्रभावित लोग मिलकर जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में याचिका दें।
  • आरटीआई: समस्या के कारण और बजट के बारे में आरटीआई दाखिल करें।

जिम्मेदारी कौन लेगा?

यह मामला सिर्फ पानी की कमी का नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही की कमी का है। योगीराज में विकास के बड़े-बड़े दावे हैं, लेकिन जब जनता बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रही है, तो सवाल उठना लाजमी है। Mau Water shortage जेई पंकज वर्मा और चेयरमैन अरशद जमाल जैसे अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह समस्या और बड़ी हो सकती है। उम्मीद है कि यह लेख ध्यान आकर्षित करेगा और जल्द ही समाधान होगा।

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