Greater Noida dowry case: निक्की की दर्दनाक मौत और समाज की कड़वी हकीकत

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Greater Noida dowry case: निक्की की दर्दनाक मौत और समाज की कड़वी हकीकत

Greater Noida dowry case निक्की की दर्दनाक मौत, पुलिस कार्रवाई और समाज की सच्चाई निक्की की दर्दनाक मौत, पुलिस कार्रवाई और समाज की सच्चाई कुछ खबरें सिर्फ घटनाएँ नहीं होतीं, वे सवाल बनकर दिल को झकझोर देती हैं। ग्रेटर नोएडा के सिरसा गांव से आई निक्की की मौत की खबर भी ऐसी ही है। एक 26 वर्षीय विवाहित महिला, जिसने कभी अपने घर-आँगन को हंसी से भरने का सपना देखा था, उसी के ससुराल वालों ने उसे दहेज की आग में झोंक दिया।

निक्की की कहानी: एक विवाहिता की दर्दनाक मौत

Greater Noida dowry case
सोर्स बाय गूगल इमेज

Greater Noida dowry case निक्की की शादी तीन साल पहले विपिन नामक युवक से हुई थी। शादी के समय मायके वालों ने स्कॉर्पियो गाड़ी और कई उपहार दिए थे। लेकिन जल्द ही रिश्ते की नींव में दरार पड़ गई क्योंकि ससुराल वालों ने ₹35 लाख की अतिरिक्त मांग कर दी।

निक्की ने प्रताड़ना सही, उम्मीद की कि शायद हालात सुधर जाएंगे। मगर 23 अगस्त की रात उसका विश्वास टूट गया। पति और ससुराल पक्ष ने उसे पीटा और फिर आग के हवाले कर दिया।

उसका छह साल का बेटा अब भी रोते हुए वही कहता है।

“पापा ने मम्मी को लाइटर से जला दिया।”

यह मासूम गवाही किसी भी संवेदनशील इंसान को रातों की नींद हराम कर सकती है।

पुलिस की कार्रवाई और FIR में दर्ज धाराएँ

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मायके वालों की शिकायत पर कासना थाने में मामला दर्ज किया गया। पति विपिन को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य आरोपी फरार हैं।

Greater Noida dowry case भारतीय न्याय संहिता के प्रावधान

अनुच्छेद 103(1) – हत्या

अनुच्छेद 115(2) – जानलेवा चोट

अनुच्छेद 61(2) – आपराधिक साजिश

कानून विशेषज्ञ मानते हैं, कि इसमें दहेज मृत्यु (BNS अनुच्छेद 80) और पति या रिश्तेदार द्वारा क्रूरता (BNS अनुच्छेद 85) भी लागू हो सकते हैं।

आंकड़े बताते हैं दहेज हत्या की भयावह सच्चाई

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल 6,000 से अधिक महिलाएँ दहेज हत्या की शिकार बनती हैं।

इसका मतलब है कि हर दिन औसतन 15–17 बहुओं की जान जाती है।

  Greater Noida dowry case समाज की मानसिकता पर बड़ा सवाल

कानून तो है, सजा भी है, पर मानसिकता नहीं बदली। शादी को अब भी लेन-देन का सौदा समझा जाता है। दहेज को ‘रीति-रिवाज’ का नाम देकर इसे जायज़ ठहराया जाता है।

क्या बेटियों की कीमत अब भी रुपये और गाड़ियों से तय होगी?

क्या विवाह सिर्फ रिश्तों का बंधन नहीं, बल्कि सौदेबाज़ी बन चुका है?

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1. तेज़ और सख्त न्याय – दहेज हत्या के मामलों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएँ।

2. सामाजिक मुहिम – स्कूल-कॉलेज स्तर पर दहेज विरोधी अभियान चलें।

3. महिलाओं की आत्मनिर्भरता – बेटियों को शिक्षित और आर्थिक रूप से मजबूत बनाना होगा।

4. परिवार की भूमिका – माता-पिता को ही सबसे पहले यह संकल्प लेना होगा कि वे दहेज नहीं देंगे और न ही लेंगे।

निष्कर्ष: निक्की की कहानी से सबक

निक्की अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी कहानी हमें सोचने पर मजबूर करती है।

हम सबको तय करना होगा कि आने वाली पीढ़ी को हम कैसा समाज देंगे

एक ऐसा समाज जहाँ बेटियाँ बराबरी से जिएँ, या एक ऐसा जहाँ वे दहेज की आग में जलती रहें?

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 FAQs

Q1. भारत में दहेज हत्या के मामलों पर कौन-कौन सी धाराएँ लागू होती हैं?

A1. दहेज हत्या के लिए BNS की धारा 80 (पूर्व IPC 304B), धारा 85 (पति/रिश्तेदार द्वारा क्रूरता) और हत्या से संबंधित अनुच्छेद लागू होते हैं।

Q2. ग्रेटर नोएडा दहेज हत्या मामले में पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?

A2. पति विपिन को गिरफ्तार किया गया है, और उसके खिलाफ हत्या, साजिश और जानलेवा चोट जैसी धाराएँ लगाई गई हैं। अन्य आरोपी फरार हैं।

Q3. भारत में हर साल कितनी महिलाएँ दहेज हत्या की शिकार होती हैं?

A3. NCRB के अनुसार, हर साल करीब 6,000 महिलाएँ दहेज हत्या की शिकार बनती हैं। यानी रोज़ाना 15–17 मामले सामने आते हैं।

Q4. दहेज प्रथा रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

A4. कड़े कानून का पालन, तेज़ ट्रायल, सामाजिक जागरूकता, और महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता इस समस्या का समाधान हो सकते हैं।

 

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