fake POCSO case ग्रेटर कानपुर गैंग कांड: “Miss UP” से लेकर वकील तक, कैसे खुला झूठे POCSO केस और वसूली का सिंडिकेट?

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fake POCSO case ग्रेटर कानपुर गैंग कांड: “Miss UP” से लेकर वकील तक, कैसे खुला झूठे POCSO केस और वसूली का सिंडिकेट?

fake POCSO case भारत में न्याय व्यवस्था को अक्सर पीड़ित की रक्षा करने और अपराधियों को सज़ा देने के लिए जाना जाता है। लेकिन जब कानून का हथियार ही अपराध का औज़ार बन जाए, तो यह समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा है। हाल ही में कानपुर से एक ऐसा ही चौंकाने वाला खुलासा (shocking revelation) सामने आया। इसमें अधिवक्ता अखिलेश दुबे और उनके साथियों पर आरोप है, कि उन्होंने Miss UP बताई जाने वाली युवती और अन्य सहयोगियों की मदद से fake POCSO case दर्ज कराकर नेताओं और कारोबारियों से वसूली करने का खेल खेला।

अपराध की जड़: कब और कैसे हुआ खुलासा?

यह कहानी 7–8 अगस्त 2025 की रात से शुरू होती है। कानपुर पुलिस ने एक गुप्त ऑपरेशन “महाकाल” चलाया। इस ऑपरेशन के तहत BJP नेता रवि सतीजा की शिकायत पर अधिवक्ता अखिलेश दुबे और उनकी सहयोगी लवी मिश्रा को गिरफ्तार किया गया। आरोप था कि इन दोनों ने मिलकर सतीजा को झूठे POCSO case में फँसाकर ₹50 लाख की वसूली की कोशिश की।

fake POCSO case पुलिस की शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि यह कोई isolated incident नहीं बल्कि एक बड़ा extortion racket था, जिसमें “मुकदमा दर्ज कराओ और फिर मोलभाव करके पैसा वसूलो” मॉडल अपनाया गया था।

SIT की एंट्री और बड़ा खुलासा fake POCSO case

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इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नरेट ने तुरंत Special Investigation Team (SIT) गठित कर दी। SIT की रिपोर्ट में कई हैरान करने वाले सच (unbelievable truths) सामने आए:

गिरोह का मॉडस ऑपरेंडी साफ था – पहले किसी BJP नेता, बिल्डर या व्यापारी पर false rape case या POCSO case दर्ज कराना।

फिर समझौते के नाम पर लाखों रुपये की डिमांड।

कई बार “नाबालिग लड़की” का इस्तेमाल कर POCSO को शामिल करना ताकि आरोपी और डर जाए।

युवतियों के बयानों में यह बात सामने आई कि “हर केस में ₹50 हज़ार से ₹2 लाख तक की रकम हमें मिलती थी।” मीडिया रिपोर्ट्स में इसे ही “हर केस के 2 लाख” के रूप में वायरल किया गया।

fake POCSO case आरोपी कौन-कौन हैं?

 

1. अखिलेश दुबे (Lawyer) – मुख्य मास्टरमाइंड, जिन पर वसूली गैंग चलाने का आरोप है।

2. लवी मिश्रा – सहयोगी, गिरफ्तारी में शामिल।

3. अन्य नाम – पंकज दीक्षित, अनुज मिश्रा और कुछ स्थानीय हिस्ट्रीशीटर भी अलग-अलग FIR में सामने आए।

4. “Miss UP” युवती – मीडिया रिपोर्ट्स में उसका नाम सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन उसने स्वीकार किया कि उसे “प्रत्येक केस पर लाखों रुपये” मिलते थे।

पुलिस कार्रवाई: किन धाराओं में केस दर्ज?

पुलिस ने अलग-अलग FIR में कई धाराएँ लगाईं। इनमें प्रमुख हैं:

Extortion (वसूली)

Criminal intimidation (धमकी)

Criminal conspiracy (षड्यंत्र)

POCSO Act (लेकिन बाद में SIT को कोई वास्तविक सबूत नहीं मिला)

कुछ केसों में मारपीट और अवैध हथियार की धाराएँ भी जोड़ी गईं। यह साफ है, कि गिरोह ने कानून का दुरुपयोग (abuse of law) करते हुए अपने निजी फायदे के लिए पूरे सिस्टम को चुनौती दी।

fake POCSO case तारीखवार घटनाओं का ब्यौरा

7–8 अगस्त 2025: ऑपरेशन महाकाल में अखिलेश दुबे और लवी मिश्रा गिरफ्तार।

9 अगस्त 2025: अदालत ने दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा।

10–12 अगस्त 2025: SIT गठित, मामले की जांच शुरू।

14 अगस्त 2025: SIT ने पुलिस अधिकारियों, KDA कर्मचारियों और अन्य लोगों को नोटिस भेजकर बयान तलब किए।

21 अगस्त 2025: अगली सुनवाई की तारीख तय।

fake POCSO case राजनीतिक साज़िश या अपराध का नेटवर्क?

यहाँ एक बड़ा सवाल उठता है, क्या यह केवल crime syndicate था या इसके पीछे कोई political conspiracy भी थी?

बीजेपी नेता का नाम सामने आने से राजनीति गरमा गई।

विपक्ष ने आरोप लगाया कि “बीजेपी नेता को बचाने के लिए SIT का गठन किया गया।”

वहीं, पीड़ित पक्ष का कहना है, कि यह एक सोच-समझी आपराधिक साज़िश थी, राजनीति से कोई लेना-देना नहीं।

नेगेटिव: यह घटना समाज में भरोसा तोड़ती है। जब POCSO Act जैसे सख्त कानून का दुरुपयोग होता है, तो असली पीड़ितों की आवाज दब जाती है।

पॉज़िटिव: पुलिस और SIT की तेज़ कार्रवाई से यह सिंडिकेट जल्दी बेनकाब हो गया। अगर जांच धीमी होती तो शायद यह नेटवर्क और बड़ा नुकसान करता।

  fake POCSO case चौंकाने वाले पहलू

यह गिरोह केवल केस दर्ज करने तक सीमित नहीं था। आरोप है,कि इन्होंने सरकारी ज़मीन और बिल्डिंग विवादों में भी हस्तक्षेप कर करोड़ों कमाए।

SIT की रिपोर्ट में यह भी संकेत मिला कि कुछ पुलिस अधिकारी और सरकारी कर्मचारी भी इस नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।

fake POCSO case समाज पर असर

इस घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि अगर POCSO Act जैसे सख्त कानून का गलत इस्तेमाल होगा, तो असली पीड़ित न्याय से वंचित हो जाएंगे। साथ ही यह घटना बताती है,कि fake cases का शिकार होने पर किसी भी निर्दोष की ज़िंदगी कैसे तबाह हो सकती है।

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FAQ

Q1. क्या “Miss UP” का नाम सार्वजनिक किया गया है?
नहीं, पुलिस ने अब तक उसकी पहचान पूरी तरह उजागर नहीं की।

Q2. क्या SIT को झूठे केस का कोई सबूत मिला?
नहीं, SIT ने पाया कि केस केवल वसूली का ज़रिया था।

Q3. आरोपियों के खिलाफ कौन-कौन सी धाराएँ लगी हैं?
Extortion, criminal intimidation, conspiracy और POCSO Act की धाराएँ शामिल की गई हैं।

Q4. आगे की सुनवाई कब है?
21 अगस्त 2025 को अदालत में सुनवाई तय है।

निष्कर्ष

कानपुर का यह मामला सिर्फ एक local crime story नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए चेतावनी है। जब कानून को हथियार बनाकर निर्दोषों को फँसाया जाता है, तो न्याय व्यवस्था की नींव हिल जाती है।

यह केस हमें यह याद दिलाता है कि law is for justice, not for blackmail। अगर ऐसे extortion rackets को समय रहते न रोका जाए, तो यह समाज और राजनीति दोनों को खोखला कर देंगे।

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