Facebook Investment Fraud: गोरखपुर का सबसे बड़ा ऑनलाइन घोटाला
गोरखपुर जिले में साइबर अपराधियों ने एक रिटायर्ड सरकारी अधिकारी को निशाना बनाकर ₹25 लाख की चौंकाने वाली ठगी कर डाली।यह वारदात Facebook Investment Fraud का ताजा और खतरनाक उदाहरण है, जिसने दिखा दिया कि अपराधी किस हद तक टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग कर रहे हैं।
मामला दर्ज होने के बाद साइबर थाना सक्रिय हो गया है, और पुलिस ने अपराधियों तक पहुँचने के लिए डिजिटल सुराग जुटाने शुरू कर दिए हैं।
धोखाधड़ी का तरीका: कैसे बिछाया गया जाल
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अपराधियों ने एक फर्जी वीडियो तैयार किया, जिसमें केंद्रीय वित्त मंत्री का चेहरा और आवाज़ जोड़कर ऐसा भ्रम पैदा किया गया कि सरकार कोई निवेश योजना चला रही है।
इस वीडियो को फेसबुक पर एक आकर्षक विज्ञापन (Facebook Ad) के रूप में चलाया गया।
रिटायर्ड अधिकारी ने इसे असली मान लिया और निवेश की प्रक्रिया शुरू कर दी।
यही था असली Facebook Investment Fraud, जिसमें भरोसा जीतने के लिए तकनीक और लालच दोनों का इस्तेमाल किया गया। ताकि आसानी से आप उनके जाल में फस जाए।
घटनाक्रम की पूरी टाइमलाइन
तारीख/दिन घटना का विवरण
23 अगस्त 2025 फेसबुक पर विज्ञापन देखा, वित्त मंत्री का फर्जी वीडियो चला।
24 अगस्त 2025 कॉल और मैसेज द्वारा निवेश का दबाव बढ़ा।
25 अगस्त 2025 रिटायर्ड अधिकारी ने कुल ₹25 लाख विभिन्न खातों में ट्रांसफर किए।
26 अगस्त 2025 संदेह होने पर पीड़ित ने साइबर थाना गोरखपुर में लिखित शिकायत दी।
27 अगस्त 2025 पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की और मामला सार्वजनिक हुआ। तब सबको पता चला
यह टाइमलाइन दिखाती है कि महज़ कुछ दिनों में कैसे एक सुनियोजित स्कैम को अंजाम दिया गया।
अपराधियों की चालाकी
1. फर्जी पहचान – वीडियो एडिट कर सरकारी व्यक्ति की छवि का दुरुपयोग।
2. लालच का हथियार – निवेश पर ऊँचे मुनाफे का लालच दिया गया।
3. तत्काल निर्णय का दबाव – कहा गया कि ऑफर सीमित समय तक ही है।
. तकनीकी जाल – कई बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल।
5. प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग – फेसबुक विज्ञापन टूल को स्कैम के लिए इस्तेमाल किया गया।
यह दर्शाता है,कि Facebook Investment Fraud कितना प्रोफेशनल और खतरनाक होता जा रहा है।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
साइबर थाना गोरखपुर ने तुरंत FIR दर्ज की।
बैंक खातों की डिटेल्स खंगाली गईं और संदिग्ध अकाउंट्स को ट्रैक किया गया।
बैंक खातों की डिटेल्स खंगाली गईं और संदिग्ध अकाउंट्स को ट्रैक किया गया।
डिजिटल फॉरेंसिक टीम को फेसबुक एड और पेमेंट गेटवे की जांच में लगाया गया।
उच्च स्तरीय एजेंसियों से भी सहयोग माँगा गया ताकि अपराधियों तक पहुँचा जा सके।
पुलिस का दावा है, कि रकम रिकवर करने और गिरोह को पकड़ने की कोशिश तेज़ी से चल रही है।
पीड़ित का दर्द और परिवार पर असर
रिटायर्ड अधिकारी ने पूरी ज़िंदगी की मेहनत से जमा पूंजी का बड़ा हिस्सा खो दिया।
परिवार इस सदमे से बाहर नहीं आ पा रहा है।
उनका कहना है — “अगर हमें पहले चेतावनी मिली होती, तो यह गलती न होती।”
यह घटना बताती है,कि साइबर अपराध केवल पैसों की चोरी नहीं, बल्कि मानसिक आघात भी है।
समाज और सिस्टम के लिए सीख
सकारात्मक पक्ष: पुलिस ने तुरंत केस दर्ज किया और जांच में सक्रियता दिखाई।
नकारात्मक पक्ष : फेसबुक जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर फर्जी विज्ञापन आसानी से चलाए जा रहे हैं।
चेतावनी: शिक्षित और समझदार लोग भी Facebook Investment Fraud का शिकार हो सकते हैं।
बचाव के उपाय: कैसे बचें Facebook Investment Fraud से
1. सोशल मीडिया विज्ञापनों पर अंधविश्वास न करें।
2. किसी भी निवेश को लेकर हमेशा ऑफिशियल वेबसाइट से पुष्टि करें।
3. संदिग्ध विज्ञापन या वीडियो तुरंत रिपोर्ट करें।
4. बैंक या UPI डिटेल्स कभी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।
5. ठगी होने पर 1930 हेल्पलाइन या cybercrime.gov.in पर तुरंत शिकायत करें।
निष्कर्ष
गोरखपुर की यह घटना हमें सतर्क करती है,कि Facebook Investment Fraud आज साइबर अपराध का सबसे खतरनाक रूप बन चुका है।
पुलिस जांच में जुटी है, और उम्मीद है,कि अपराधियों को सजा मिलेगी, लेकिन असली सबक यही है, कि सतर्क रहना ही सुरक्षा है।
याद रखें: डिजिटल दुनिया में सबसे बड़ा हथियार है—संदेह और जागरूकता।
FAQ
Q1. गोरखपुर में कितना नुकसान हुआ?
कुल ₹25 लाख रुपये की ठगी की गई।
Q2. अपराधियों ने ठगी कैसे की?
फेसबुक विज्ञापन में वित्त मंत्री का फर्जी वीडियो दिखाकर निवेश का झांसा दिया।
Q3. पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
FIR दर्ज की, बैंक खातों की जांच और डिजिटल फॉरेंसिक शुरू किया गया।
Q4. क्या पैसा वापस मिल सकता है?
जांच जारी है, पुलिस रिकवरी की दिशा में काम कर रही है।
Q5. आम लोग कैसे बच सकते हैं?
सोशल मीडिया विज्ञापनों से सावधान रहें, केवल सरकारी/ऑफिशियल पोर्टल से ही निवेश करें।
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