Dehradun Cyber Fraud: देहरादून का चौंकाने वाला साइबर फ्रॉड केस, अफसर से 7.39 करोड़ की ठगी – पुलिस की कार्रवाई और सीख
Dehradun Cyber Fraud केस: ONGC अफसर से 7.39 करोड़ की ठगी पुलिस की जांच और बचाव देहरादून में Dehradun Cyber Fraud का बड़ा खुलासा। ONGC अफसर से 7.39 करोड़ की ठगी। जानिए पुलिस की कार्रवाई, STF ऑपरेशन और साइबर ठगी से बचाव के उपाय।
Dehradun Cyber Fraud का चौंकाने वाला खुलासा
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देहरादून का यह Dehradun Cyber Fraud केस हर किसी को हैरान कर देने वाला है। ONGC अफसर संजय कुमार आर्या को ठगों ने शेयर मार्केट और क्रिप्टो में पैसा डबल करने का लालच देकर 7.39 करोड़ रुपये से लूट लिया।
अफसर को एक फर्जी व्हाट्सएप ग्रुप “M-02 Wealth Secrets Exchange” में जोड़ा गया।
ग्रुप में लगातार बड़े मुनाफे के झूठे स्क्रीनशॉट शेयर किए जाते रहे।
पहले उन्होंने अपने ढाई करोड़ रुपये लगाए।
लालच बढ़ा तो बैंक से लोन लिया और रिश्तेदारों से भी पैसे उधार लिए।
देखते ही देखते उनकी मेहनत की कमाई और कर्ज सब कुछ साइबर ठगों की जेब में चला गया।
यह केस दिखाता है, कि लालच और भरोसे की गलत जगह पर निवेश कितना खतरनाक साबित हो सकता है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
जैसे ही यह Dehradun Cyber Fraud सामने आया, साइबर थाने ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
साइबर सेल ने ठगों के बैंक अकाउंट, मोबाइल नंबर और IP एड्रेस ट्रेस करना शुरू किया।
STF भी मामले की गहराई से जांच कर रही है।
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पुलिस का कहना है, कि जांच जारी है, और अपराधियों तक जल्द पहुंचा जाएगा।
हालांकि, अभी तक न तो कोई गिरफ्तारी हुई है, और न ही रकम की रिकवरी।
उत्तराखंड पुलिस के बड़े साइबर ऑपरेशन
देहरादून की इस घटना से पहले भी पुलिस ने कई ठग गिरोहों पर कार्रवाई की है।
Operation Prahar
दक्षिण भारत के साइबर गैंग पर शिकंजा कसने के लिए।
कई आरोपी गिरफ्तार और डिजिटल सबूत जब्त।
Operation Heli
चारधाम यात्रा के नाम पर चल रहे हेलीकॉप्टर टिकट फ्रॉड को रोकने के लिए।
142 फर्जी वेबसाइटें, 117 मोबाइल नंबर और 35 WhatsApp अकाउंट ब्लॉक।
67 बैंक खाते फ्रीज और 28 गिरफ्तारियां।
कुल ₹10.5 करोड़ की ठगी रोकी गई।
Mission E-Suraksha Chakra
साइबर हेल्पलाइन 1930 को और मज़बूत बनाया गया।
अब तक ₹34 करोड़ से ज्यादा रकम पीड़ितों को वापस कराई गई।
अन्य चौंकाने वाले Cyber Fraud केस
Dehradun Cyber Fraud के अलावा भी कई मामले सामने आए हैं:
एक IFS अफसर को फर्जी कस्टमर केयर बनकर ₹98,000 का चूना लगाया।
74 वर्षीय बुजुर्ग को फर्जी RBL Securities एजेंट ने ₹84.7 लाख से ठगा।
रिटायर्ड महिलाएं और व्यापारी भी व्हाट्सएप इन्वेस्टमेंट स्कैम का शिकार बने।
ये घटनाएँ बताती हैं कि पढ़े-लिखे और जागरूक लोग भी साइबर ठगी का आसान शिकार बन सकते हैं।
सीख और सकारात्मक संदेश
इस Dehradun Cyber Fraud केस में नकारात्मक पहलू साफ दिखता है, लालच और जल्दी अमीर बनने की चाहत अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार है।
लेकिन सकारात्मक पहलू यह है कि।
पुलिस लगातार जागरूकता अभियान चला रही है।
साइबर हेल्पलाइन 1930 और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करने से कई लोगों की रकम वापस हुई है।
STF के बड़े ऑपरेशन ने हजारों लोगों को ठगी से बचाया।
इसलिए कहा जा सकता है कि जागरूकता और सतर्कता ही इस डिजिटल युग की सबसे बड़ी ताकत है।
6. साइबर ठगी से बचने के पावर टिप्स
Dehradun Cyber Fraud जैसे केस से बचने के लिए:
कभी भी “पैसा डबल” स्कीम पर भरोसा न करें।
किसी अनजान व्हाट्सएप ग्रुप या लिंक पर क्लिक न करें।
बैंक या सिक्योरिटी कंपनी की कॉल्स को उनकी ऑफिशियल वेबसाइट से वेरिफाई करें।
संदिग्ध मैसेज या ऐप्स को तुरंत ब्लॉक करें।
ठगी होते ही 1930 हेल्पलाइन या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें।
FAQ
इस केस में कितनी ठगी हुई?
कुल ₹7.39 करोड़।
पुलिस ने क्या कदम उठाए?
FIR दर्ज, बैंक अकाउंट ट्रैकिंग और STF की जांच।
ठगी की शिकायत कहां करें?
हेल्पलाइन 1930 या cybercrime.gov.in।
क्या ठगी की रकम वापस मिल सकती है?
हाँ, कई मामलों में पुलिस ने रकम रिकवर की है।
निष्कर्ष
देहरादून का यह Dehradun Cyber Fraud केस हर किसी के लिए चेतावनी है। नकारात्मक पहलू यह है, कि ठग कितनी आसानी से पढ़े-लिखे लोगों को भी फंसा लेते हैं। लेकिन सकारात्मक पहलू यह है, कि पुलिस और STF लगातार साइबर अपराध पर नकेल कस रही है, और कई पीड़ितों की रकम वापस कराई जा चुकी है।
याद रखें: लालच से बचें, जागरूक रहें और तुरंत रिपोर्ट करें – यही साइबर अपराध से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।
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