FIR against 52 in Gorakhpur गोरखपुर कलक्ट्रेट परिसर में  हंगामा: ठेकेदार समेत 52 लोगों पर केस दर्ज, मजदूर-अधिवक्ताओं के टकराव ने मचाया बवाल

Estimated read time 1 min read

FIR against 52 in Gorakhpur गोरखपुर कलक्ट्रेट परिसर में  हंगामा: ठेकेदार समेत 52 लोगों पर केस दर्ज, मजदूर-अधिवक्ताओं के टकराव ने मचाया बवाल

FIR against 52 in Gorakhpur गोरखपुर के प्रशासनिक केंद्र कलक्ट्रेट परिसर में उस समय अफरातफरी मच गई जब निर्माण कार्य को लेकर मजदूरों और अधिवक्ताओं के बीच तकरार  ने हिंसक रूप ले लिया। इस हंगामे के बाद कार्यदायी संस्था के ठेकेदार समेत कुल 52 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मामला सिर्फ तकरार और बहस का नहीं था, बल्कि इसमें चोट, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी और शांति भंग करने जैसी बहुत गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ है।

इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन को हिला कर रख दिया, बल्कि अधिवक्ता संघ और मजदूर यूनियन के बीच भी नफरत की दीवार खड़ी कर दी

 ऐसा क्या हुआ था कलक्ट्रेट में

पिछले हफ्ते गोरखपुर कलक्ट्रेट परिसर में निर्माण कार्य हो रहा था। कार्यदायी संस्था द्वारा नियुक्त मजदूर वहां ईंट-सीमेंट का काम कर रहे थे। तभी कुछ अधिवक्ता रास्ते में हो रही खुदाई और शोर-शराबे को लेकर नाराज हो गए। कहा जा रहा है कि अधिवक्ताओं ने काम को रोकने की बात कही, लेकिन मजदूरों की ओर से जवाबी प्रतिक्रिया आई।

यही बहस होते होते  फिर हाथापाई तक पहुंच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ मजदूरों ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया, वहीं वकीलों की तरफ से आरोप है, कि उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट हुई।

 क्या लिखा है,एफआईआर में

इसे पढ़ें गोरखपुर के पाम पैराडाइज में घर का सपना होगा सरकार 

FIR against 52 in Gorakhpur
सोर्स बाय गूगल इमेज

थाना  कैंट पुलिस ने प्राप्त शिकायत के अनुसार कार्यदायी संस्था के ठेकेदार, सुपरवाइज़र और अन्य मजदूरों समेत 52 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ IPC की धारा 147 (दंगा), 323 (मारपीट), 504 (गाली-गलौज), 506 (धमकी देना) और 427 (संपत्ति को नुकसान) जैसी बहुत गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है।

शिकायतकर्ता अधिवक्ता संघ के  महामंत्री चंद्र प्रकाश मिश्रा ने अपनी शिकायत में कहा है, कि निर्माण कार्य में लगे मजदूरों द्वारा न सिर्फ गाली-गलौज की गई, बल्कि अधिवक्ताओं के साथ बदसलूकी भी की गई। कुछ ने तो ईंट-पत्थर भी चलाने की कोशिश की।

  FIR against 52 in Gorakhpur प्रशासन की प्रतिक्रिया

गोरखपुर के जिलाधिकारी ने इस घटना को गंभीर मानते हुए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। वहीं एसपी सिटी ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा, “कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। चाहे वह मजदूर हों या अन्य कोई  जांच के आधार पर दोषी पाए जाने पर  कार्रवाई की जाएगी।

उधर, कलक्ट्रेट परिसर में पुलिस बल की तैनाती भी की गई है। ताकि किसी प्रकार की कोई घटना या पुनरावृत्ति ना हो।

कौन है कार्यदायी संस्था?

FIR against 52 in Gorakhpur जिस संस्था के ठेकेदार और सुपरवाइज़र पर केस दर्ज हुआ है, वह  एक प्राइवेट कंपनी है, जिसे प्रशासनिक भवन के रिनोवेशन का कार्य सौंपा गया था। यह संस्था पूर्व में भी कई सरकारी निर्माणों कार्यों में शामिल रही है।

हालांकि अभी तक कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन अंदरखाने से खबर है कि कंपनी खुद पर लगे आरोपों को खारिज करती है और कहती है कि कुछ अधिवक्ता जबरदस्ती काम रुकवाने की कोशिश कर रहे थे।

FIR against 52 in Gorakhpur अधिवक्ता संघ की मांगें

गोरखपुर अधिवक्ता संघ इस घटना के विरोध में एक सुर में खड़ा नजर आ रहा है। अधिवक्ताओं की मांग है कि:

ठेकेदार और सुपरवाइज़र को तत्काल प्रभाव से गिरफ्तार किया जाए।

कलक्ट्रेट परिसर में निर्माण कार्य की निगरानी के लिए विशेष प्रशासनिक समिति बनाई जाए।

अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।

संघ ने चेतावनी दी है, कि यदि कार्रवाई में देरी हुई तो वे कार्य बहिष्कार और आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

  मजदूर यूनियन की सफाई

दूसरी ओर, मजदूर यूनियन ने अधिवक्ताओं पर आरोप लगाते हुए कहा कि “हम सिर्फ अपना काम कर रहे थे। बिना किसी वजह के अधिवक्ताओं ने हमें धमकाया और काम बंद कराने की कोशिश की। लेकिन मजदूरों ने विरोध किया तो उसका कारण सुरक्षा था।”

यूनियन का कहना है कि कुछ अधिवक्ताओं ने मजदूरों को जातिसूचक शब्द भी कहे, जिससे तनाव और बढ़ गया।

  FIR against 52 in Gorakhpur क्या है अगला कदम?

इस पूरे विवाद के बाद प्रशासन के सामने चुनौती दोहरी हो गई है, एक तरफ अधिवक्ता संघ का दबाव, दूसरी तरफ मजदूर यूनियन की नाराजगी। अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पुलिस सूत्रों के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है, और गवाहों के बयान लिए जा रहे हैं।

एक उच्च अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “यह सिर्फ आपसी विवाद नहीं, बल्कि प्रशासनिक परिसर की गरिमा से जुड़ा मामला है। इसलिए जांच को निष्पक्ष और तेज़ गति से किया जाएगा।”

  FIR against 52 in Gorakhpur  सवाल जो उठ रहे हैं…

क्या प्रशासन ने बिना समुचित सुरक्षा व्यवस्था के निर्माण कार्य शुरू करवा दिया?

क्या कलक्ट्रेट परिसर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह का टकराव रोका जा सकता था?

क्या अधिवक्ताओं और मजदूरों के बीच संवाद की कमी थी?

क्या प्रशासनिक अनदेखी की वजह से मामला इतना बढ़ा था।

FIR against 52 in Gorakhpur गोरखपुर कलक्ट्रेट परिसर में हुआ यह हंगामा एक साधारण बहस नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, श्रमिकों की असुरक्षा और अधिवक्ताओं की संवेदनशीलता का संगम था। ऐसे मामलों से न सिर्फ न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि आम जनता के बीच प्रशासनिक ढांचे की साख पर भी सवाल उठते हैं।

FIR against 52 in Gorakhpur ज़रूरत इस बात की है कि दोनों पक्षों के बीच सामंजस्य स्थापित हो, जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। ताकि कलक्ट्रेट जैसी जगह, जहां न्याय और शासन दोनों का चेहरा होता है, वहां शांति और गरिमा बनी रहे।

Google search engine
akhtar husain https://newsdilsebharat.net

न्यूज़ दिल से भारत के पाठकों से अनुरोध है कि अगर आप सच्ची और अच्छी ख़बरें पढ़ना चाहते हैं तो न्यूज़ दिल से भारत को सहयोग करें ताकि निष्पक्ष पत्रकारिता करने में हमारे सामने जो बाधाये आती है हम उनको पार कर सके सच्ची और अच्छी खबरें आप तक पहुंचा सके

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours