SSP Anurag Arya ने ड्यूटी में ढिलाई पर मारा बड़ा हंटर, दारोगा समेत तीन पुलिसकर्मी सस्पेंड

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बरेली से बड़ी खबर SSP Anurag Arya ने ड्यूटी में ढिलाई पर मारा बड़ा हंटर, दारोगा समेत तीन पुलिसकर्मी सस्पेंड

SSP Anurag Arya का बड़ा एक्शन बरेली जिले में पुलिस की लापरवाही पर,  गश्त न करने, अपराधियों को नजरअंदाज करने और जनता से बदसलूकी के चलते दारोगा व दो सिपाही निलंबित।

 बरेली से बड़ी खबर: अनुशासन की कसौटी पर फेल हुए खाकीधारी

बरेली ज़िले के शेरगढ़ थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाली कार्रवाई सामने आई है। SSP अनुराग आर्य ने पुलिस विभाग में शिथिलता और जनविश्वास को ठेस पहुंचाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ा अनुशासनात्मक कदम उठाते हुए एक सब-इंस्पेक्टर और दो सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

SSP Anurag Arya बरेली ज़िले के शेरगढ़ थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाली कार्रवाई साम इस कार्रवाई के पीछे वजह है – लगातार मिल रही शिकायतें, जिनमें आरोप था कि पुलिस ना तो गश्त कर रही थी, ना ही वक्त पर शिकायतों पर कार्रवाई।

 क्या है पूरा मामला?SSP Anurag Arya

SSP Anurag Arya बरेली के ग्रामीण बेल्ट में पिछले कुछ दिनों से अवैध शराब तस्करी, चोरी और असामाजिक तत्वों की बढ़ती गतिविधियों ने स्थानीय लोगों को परेशान कर रखा था। इन मामलों में पुलिस की निष्क्रियता को लेकर आम जनता ने सोशल मीडिया से लेकर पुलिस कंट्रोल रूम तक कई बार शिकायत दर्ज कराई

सूत्रों की मानें तो एक मामला ऐसा भी था, जिसमें स्थानीय शराब माफिया को बचाने के लिए चौकी इंचार्ज ने कार्रवाई टाल दी। यही नहीं, कई मामलों में पीड़ितों को उल्टा धमकाया गया कि ज्यादा शिकायत करोगे तो उल्टा मुकदमा दर्ज कर देंगे।

 किन पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज़?

जांच और जनशिकायतों के आधार पर जिन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया, वे हैं:

1. SI रामवीर सिंह – चौकी प्रभारी, शेरगढ़

2. कांस्टेबल रवि पाल

3. कांस्टेबल दिनेश यादव

इन तीनों पर लगे आरोप गंभीर हैं: रूटीन गश्त में लापरवाही, अपराध की सूचना छुपाना, पीड़ितों से बदसलूकी, अपराधियों को मौन समर्थन देना, वरिष्ठ अधिकारियों को गलत रिपोर्ट देना.

SSP Anurag Arya ने क्या कहा?

जैसे ही शिकायतों की गंभीरता सामने आई, SSP अनुराग आर्य ने स्वयं मामले की मॉनिटरिंग शुरू की और सर्विलांस टीम को सतर्क कर दिया। मौके की सच्चाई जानने के बाद उन्होंने बिना देर किए तीनों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया।

पुलिस की वर्दी एक जिम्मेदारी है, विशेषाधिकार नहीं। अगर कोई इस वर्दी का गलत इस्तेमाल करता है या ड्यूटी में लापरवाह है, तो उसे नौकरी में रहने का हक नहीं है।”

जनता में बढ़ा था गुस्सा, अब मिली राहत

पिछले हफ्ते शेरगढ़ में अपराधियों का मनोबल इस तरह से बढ़ गया था की आम जनता में भय का माहौल था पुलिस को फोन करने पर कोई रिप्लाई नहीं मिलता था मुकदमा दर्ज करने की तो बात दूर बरेली एसएसपी के इस फैसले ने जनता में उम्मीद जगाई

> “हम पुलिस को बार-बार फोन करते थे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता था। FIR तो दूर, बात तक नहीं सुनते थे।”

— प्रेमबाला, स्थानीय महिला दुकानदार

अब SSP की कार्रवाई के बाद लोगों ने चैन की सांस ली है।

कानूनी और विभागीय प्रक्रिया क्या होगी आगे?

तीनों निलंबित पुलिसकर्मियों के खिलाफ:

विभागीय जांच शुरू हो चुकी है

CCTV, कॉल रिकॉर्ड और पीड़ितों के बयान जुटाए जा रहे हैं

जरूरत पड़ी तो IPC की धाराओं के तहत मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा

ट्रांसफर या बर्खास्तगी तक की कार्रवाई हो सकती है

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सोशल मीडिया पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया रही?

जैसे ही कार्रवाई की खबर आई , सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर और लोकल व्हाट्सएप ग्रुप्स में  SSP Anurag Arya के फैसले की तारीफ होने लगी।

“अब लग रहा है बरेली में कानून नाम की भी कोई चीज़ है।”

“अनुराग आर्य जैसे अफसर पूरे उत्तर प्रदेश में होने चाहिए।”

“खाकी का डर तभी टिकेगा, जब वर्दी वाले भी जवाबदेह होंगे।”

 पुलिस सुधार की दिशा में एक छोटा लेकिन असरदार कदम

SSP Anurag Arya बरेली पुलिस की यह कार्रवाई सिर्फ निलंबन तक सीमित नहीं, बल्कि एक संदेश है – कि अब पुलिस विभाग अपने भीतर के दोषियों पर भी सख्त होगा। SSP आर्य की यह पहल उस बदलाव की शुरुआत है, जिसकी लंबे समय से जनता मांग कर रही थी।

 “बदलाव सिर्फ बाहर के अपराधियों से लड़कर नहीं, अंदर की गंदगी हटाकर भी आता है।” वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता, नवनीत शर्मा

वर्दी पहनना हक़ नहीं, ज़िम्मेदारी है

दारोगा और सिपाही को निलंबित करना किसी के लिए व्यक्तिगत सज़ा नहीं, बल्कि पूरे विभाग को यह याद दिलाना है कि सरकारी ड्यूटी सिर्फ उपस्थिति दर्ज करने का नाम नहीं, बल्कि लोगों की उम्मीदों का बोझ है। SSP अनुराग आर्य की यह कार्रवाई बताती है कि अगर कोई अफसर ईमानदारी से डटा हो, तो व्यवस्था को सही दिशा दी जा सकती है।

जनता ने आवाज़ उठाई, प्रशासन ने सुनी – यही असली लोकतंत्र है।

और बरेली ने एक बार फिर दिखा दिया कि वर्दी में अनुशासन न हो, तो कानून की रक्षा नहीं, उसकी तौहीन होती है।

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