Fake OBC Certificate Case Gorakhpur गोरखपुर में फर्जी पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र मामले में शिक्षिका के खिलाफ एफआईआर

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Fake OBC Certificate Case Gorakhpur गोरखपुर में फर्जी पिछड़ा वर्ग प्रमाणपत्र मामले में शिक्षिका के खिलाफ एफआईआर

Fake OBC Certificate Case Gorakhpur गोरखपुर। जिले के कोनी प्राथमिक विद्यालय में नियुक्त शिक्षिका ज्योति अग्रवाल के खिलाफ शिक्षा विभाग ने गंभीर आरोपों के आधार पर एफआईआर दर्ज कराई है। आरोप यह है, कि उन्होंने पिछड़ा वर्ग (कलवार) प्रमाणपत्र का गलत इस्तेमाल कर सरकारी नौकरी हासिल की।

प्रमाणपत्र विवाद

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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (DBEO) की रिपोर्ट के अनुसार, ज्योति अग्रवाल सामान्य जाति की हैं। इसके बावजूद उन्होंने ज्योति जायसवाल (पत्नी रामभरत जायसवाल) के नाम से पिछड़ा वर्ग का प्रमाणपत्र प्राप्त किया। इस प्रमाणपत्र का उपयोग करके उन्होंने विशिष्ट बीटीसी-2008 (विशेष चयन) प्रशिक्षण कार्यक्रम में दाखिला लिया और बाद में सरकारी नौकरी भी हासिल की।

शिकायत और जांच Fake OBC Certificate Case Gorakhpur

मामला तब सामने आया जब स्थानीय निवासी आशीष कुमार गुप्ता ने शिक्षा विभाग में शिकायत की। शिकायत में बताया गया कि शिक्षिका ने प्रमाणपत्र की वास्तविकता को बदलकर इसका लाभ उठाया। विभाग ने तुरंत जांच शुरू की। जांच में दस्तावेजों में अनियमितताएँ पाई गईं, जिससे प्रमाणपत्र की वैधता पर सवाल खड़ा हुआ।

विभागीय कार्रवाई Fake OBC Certificate Case Gorakhpur

शिक्षा विभाग ने इस मामले में कूटरचित दस्तावेज़ों के आधार पर आरक्षण का गलत लाभ लेने के आरोप में एफआईआर दर्ज की। मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है।

Fake OBC Certificate Case Gorakhpur जांच पूरी होने पर, यदि दोष सिद्ध होता है, तो शिक्षिका के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें नौकरी से बर्खास्तगी, वेतन रोकना और अन्य कानूनी दंड शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, अदालत में दोष साबित होने पर सजा या जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

कानूनी और प्रशासनिक महत्व

यह मामला शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इससे यह संदेश जाता है, कि सरकारी नौकरी या प्रशिक्षण कार्यक्रम में योग्यता और ईमानदारी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

Fake OBC Certificate Case Gorakhpur कूटरचित दस्तावेज़ या फर्जी प्रमाणपत्र का उपयोग न केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और सरकारी संस्थाओं पर जनता का भरोसा प्रभावित करता है। इसीलिए विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।

निष्कर्ष Fake OBC Certificate Case Gorakhpur

ज्योति अग्रवाल के मामले में शिक्षा विभाग की कार्रवाई यह सुनिश्चित करेगी कि शिक्षा क्षेत्र में समान अवसर और पारदर्शिता बनी रहे। यह घटना याद दिलाती है, कि सरकारी भर्ती या प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसी भी प्रकार के फर्जी दस्तावेज़ का प्रयोग गंभीर अपराध माना जाता है।

Fake OBC Certificate Case Gorakhpur  जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद विभाग और न्यायालय के निर्णय से स्पष्ट होगा कि आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।

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