Muslim Yadav UP tension यूपी में अवैध कब्जा करने वालों पर कार्रवाई तेज, वायरल आदेश पत्र से यादव-मुस्लिम समुदाय में मचा हड़कंप
Muslim Yadav UP tension उत्तर प्रदेश में अवैध कब्जों के खिलाफ चल रहे सरकारी अभियान ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। लेकिन इस बार चर्चा का केंद्र बना है एक वायरल आदेश पत्र, जिसमें अवैध कब्जों के खिलाफ विशेष रूप से “यादव और मुस्लिम समुदाय” को टारगेट किए जाने की बात कही जा रही है। यह आदेश वायरल होते ही पूरे प्रदेश में राजनीतिक से लेकर सामाजिक स्तर पर बहस छिड़ गई है।
सरकारी तंत्र में इस पर सफाई दी जा रही है कि कार्रवाई जाति या धर्म देखकर नहीं, बल्कि कानून के अनुसार की जा रही है। वहीं दूसरी ओर, कुछ राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन इसे एकतरफा और पक्षपाती कार्रवाई करार दे रहे हैं।
क्या है वायरल आदेश पत्र का मामला?

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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ एक कथित सरकारी पत्र लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज जैसे शहरों में तेजी से शेयर किया जा रहा है। इस पत्र में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि “क्षेत्र में यादव और मुस्लिम समुदाय द्वारा किए गए अवैध कब्जों की सूची तैयार की जाए और उनके खिलाफ अभियान चलाया जाए।”
“Muslim Yadav UP tensionअवैध निर्माण चिन्हित करें
कब्जे हटाने के लिए बुलडोज़र की कार्रवाई करें
स्थानीय विरोध या राजनीतिक हस्तक्षेप को नजरअंदाज़ करें
इस कथित आदेश पर वरिष्ठ अधिकारियों की सील और हस्ताक्षर भी दिख रहे हैं, जिससे इसकी प्रामाणिकता को लेकर कंफ्यूजन बढ़ गया है।
प्रशासन की सफाई: जाति-धर्म नहीं, सिर्फ अवैध कब्जा है टारगेट
वायरल पत्र को लेकर सवाल उठने पर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि:
“हमारी सरकार सबका साथ, सबका विकास की नीति पर चल रही है। यह कार्रवाई सिर्फ अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ है, न कि किसी विशेष समुदाय या जाति के खिलाफ।”
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कई जिलों में धार्मिक या जातिगत पहचान से परे जाकर कब्जों की पहचान की जा रही है और जहां कानून का उल्लंघन हुआ है, वहीं कार्रवाई हो रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: विपक्ष ने साधा निशाना
विपक्षी दलों ने इस आदेश को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है।
समाजवादी पार्टी, जो यादव और मुस्लिम वोट बैंक पर मजबूत पकड़ रखती है, ने कहा:
यह सरकार की सोची-समझी साजिश है। केवल यादव और मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाना, उनके खिलाफ एक ‘नैरेटिव’ खड़ा करना, यह पूरी तरह असंवैधानिक और पक्षपातपूर्ण है।”
वहीं कांग्रेस और AIMIM जैसे दलों ने इस अभियान को “राजनीतिक ध्रुवीकरण का औजार” कहा है।
Muslim Yadav UP tension स्थानीय लोगों की चिंता: डर और असमंजस का माहौल
जहां एक ओर प्रशासन दावा कर रहा है कि कानून के दायरे में ही कार्रवाई हो रही है, वहीं प्रभावित क्षेत्रों में डर और भ्रम का माहौल है।
लखनऊ के एक स्थानीय निवासी मोहम्मद शमीम ने बताया:
“हम पिछले 25 साल से इस ज़मीन पर रह रहे हैं। हमारे पास बिजली का बिल, राशन कार्ड, आधार सब है। फिर भी कहा जा रहा है कि हम अवैध कब्जाधारी हैं।”
इसी तरह, हरदोई जिले में रहने वाले रामदयाल यादव का कहना है:
“सरकार को जांच करनी चाहिए कि कब्जा किसने और कब किया। अगर नियम तोड़े हैं तो कार्रवाई सब पर बराबरी से होनी चाहिए, ना कि जाति देखकर।”
वायरल आदेश पर कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं और पूर्व न्यायाधीशों ने भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि:
यदि कोई भी प्रशासनिक आदेश जाति या धर्म के आधार पर कार्रवाई का निर्देश देता है, तो वह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन करता है।
कोर्ट में इस प्रकार के आदेश को चुनौती दी जा सकती है और इसे रद्द करवाया जा सकता है।
“Muslim Yadav UP tensionपूर्व न्यायधीश बी.के. मिश्रा ने कहा:
“यदि आदेश असली है और उसमें जातिगत टारगेटिंग की बात है, तो यह पूरी तरह असंवैधानिक और गैर-कानूनी है।”
सोशल मीडिया पर बवाल, #StopCasteTargeting ट्रेंड में
वायरल आदेश को लेकर ट्विटर (अब X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर जमकर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
ट्रेंड हो रहे हैं:
#StopCasteTargeting
#BulldozerPolitics
#YadavMuslimRights
#SelectiveJustice
लोगों का कहना है कि इस तरह की एकतरफा कार्रवाइयाँ देश की सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
सरकार की रणनीति: बुलडोज़र मॉडल या डर की राजनीति?
योगी आदित्यनाथ सरकार का बुलडोज़र मॉडल पहले भी सुर्खियों में रहा है। माफियाओं, गैंगस्टर्स और भू-माफियाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई की गई, जिसे जनता का बड़ा समर्थन भी मिला।
Muslim Yadav UP tensionलेकिन अब यह सवाल उठ रहा है कि:
क्या अब बुलडोज़र का उपयोग चुनिंदा समुदायों या जातियों को डराने के लिए किया जा रहा है?
अगर ऐसा है, तो यह लोकतंत्र और कानून के शासन के लिए खतरे की घंटी हो सकती है।
पारदर्शिता और न्याय जरूरी
Muslim Yadav UP tension वायरल आदेश पत्र के आधार पर अगर सच में एकतरफा कार्रवाई हो रही है, तो यह न केवल संवैधानिक मूल्यों का हनन है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
जरूरी है कि:
जांच निष्पक्ष हो
कार्रवाई सभी के खिलाफ समान रूप से हो
राजनीतिक लाभ के लिए समाज को बांटने से बचा जाए
Muslim Yadav UP tensionयूपी सरकार को चाहिए कि वह इस मुद्दे पर पूरी पारदर्शिता से जनता को भरोसा दे और यह स्पष्ट करे कि कानून सबके लिए बराबर है – चाहे वह किसी भी जाति, धर्म या वर्ग से हो।
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